8 हिंदी दूर्वा

आषाढ़ का पहला दिन

भवानीप्रसाद मिश्र

हवा का जोर वर्षा की झरी, झाड़ों का गिर पड़ना
कहीं गर्जन का जाकर दूर सिर के पास फिर पड़ना
उमड़ती नदी का खेती की छाती तक लहर उठना
ध्वजा की तरह बिजली का दिशाओं में फहर उठना
ये वर्षा के अनोखे दृश्य जिसको प्राण से प्यारे
जो चातक की तरह तकता है बादल घने कजरारे
जो भूखा रहकर, धरती चीरकर सबको खिलाता है
जो पानी वक्त पर आये नहीं तो तिलमिलाता है
अगर आषाढ़ के पहले दिवस के प्रथम इस क्षण में
वही हलधर अधिक आता है, कालिदास से मन में
तो मुझको क्षमा कर देना।

इस कविता में मानसून के शुरु होने पर एक किसान की खुशी का वर्णन किया गया है। आषाढ़ हिंदी कैलेंडर का एक महीना होता है और इस महीने के आसपास मानसून की शुरुआत होती है। जब मानसून आता है तो हवा जोरों से चलती है जिससे झाड़ झंखार गिर जाते हैं। बादल ऐसे गरजते हैं जैसे आपके सिर के ऊपर ही गर्जना कर रहे हों। नदियाँ अपने उफान पर होती हैं। कभी कभी तो वे खेत के कलेजे तक चढ़ जाती हैं। चारों दिशाओं में बिजली ऐसे चमकती है जैसे ध्वजाएं लहराती हों।

एक व्यक्ति जिसे वर्षा के ये अनूठे दृश्य प्राणों से भी प्यारे लगते हैं वो है किसान। किसान किसी पपीहे की तरह टकटकी लगाए बादलों का इंतजार करता है। वह खुद भूखा रहकर भी खेत में जी-तोड़ मेहनत करता है। उसकी मेहनत की बदौलत खेतों से अनाज निकलता है और दुनिया के लोगों को भोजन मिलता है। यदि समय पर बारिश नहीं आती है तो किसान को सबसे ज्यादा बेचैनी होती है।

कवि ने लिखा है कि अगर आपके मन में बादल देखने के बाद कालिदास की बजाय किसान की तस्वीर आती है तो उस समय एक ही रास्ता है और वो है कालिदास से क्षमा मांग लेना।

कालिदास रचित मेघदूतम एक प्रसिद्ध रचना है। इसमें प्रेमी और प्रेमिका मेघों के द्वारा अपना संदेश भेजते हैं। दोनों को हमेशा बादलों के आने का इंतजार रहता है। इस रचना की प्रषिद्धि के कारण साहित्य में मेघों की चर्चा होने पर कालिदास का ध्यान आना स्वाभाविक है।



दो गौरैया

माँ यह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए, इसलिए वे पिताजी की मदद नहीं कर रहीं थीं। वो हंस इसलिए रहीं थीं कि उन्हें पता था कि पिताजी अंदर से एक दयालू इंसान हैं। वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे चिड़ियों को ज्यादा हानि पहुँचे। वो शायद ये भी जानती थीं कि थोड़े प्रयास के बाद पिताजी हार मानकर शांत बैठ जाएंगे।

सागर यात्रा

समुद्र का पानी खारा होने की वजह से ना तो पीने लायक होता है ना ही नहाने लायक। ज्यादा खारेपन की वजह से साबुन भी उसमें बेअसर हो जाता है। इसलिए समुद्र के पानी से ना तो हम नहा सकते हैं, ना ही कपड़े धो सकते हैं। इसलिए लेखक और उसके साथियों को समुद्र यात्रा में पानी की समस्या हुई।

उठ किसान ओ

इस कविता में किसान से जग जाने का आह्वान किया गया है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि खेती के नए तरीके हमारे देश में इस्तेमाल होने लगे हैं, फिर भी बारिश का महत्व पहले की तरह ही है।

एक खिलाड़ी की कुछ यादें

लेखक ने एक बार लाहौर में ध्यानचंद को हॉकी खेलते देखा था। ध्यानचंद की दक्षता ने लेखक को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लेखक के शब्दों में एक महान खिलाड़ी आपको अपने खेल की ओर आकर्षित करता है। उस खिलाड़ी की महानता आपके लिए एक प्रेरणाश्रोत का काम करती है।

सस्ते का चक्कर

अजय के अन्य दोस्तों ने कहा कि नरेंद्र की आदतें अच्छी नहीं है। वह चटोर लड़का है। अजय को उसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि नरेंद्र बहुत ही बदनाम लड़का था।

वल्ली अम्माई

बस में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना ज्यादातर लोगों को पसंद आता है। वल्ली को भी खिड़की के पास वाली सीट मिल गयी थी। खिड़की के बाहर का दृश्य वल्ली को बहुत सुंदर लग रहा था। सड़क की एक ओर नहर थी। नहर के पीछे ताड़ के पेड़ थे।

अन्याय के खिलाफ

श्री राम राजू भी एक कोया आदिवासी था। उसने हाई स्कूल तक की पढ़ाई थी। वह 18 साल की उम्र में साधू बन गया था। उसके ज्ञान के कारण लोग उसे अपना नेता मानने लगे थे। जब अंग्रेजों ने कोया आदिवासियों का राशन रोक दिया तो उनपर कहर टूट पड़ा। श्री राम राजू ने अपने लोगों की तकलीफ का अंत करने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।

केशव शंकर पिल्लई

शुरु में पिल्लई जगह-जगह प्रदर्शनी लगाकर अपना संग्रह लोगों को दिखाते थे। लेकिन जब उनका संग्रह बहुत बड़ा हो गया तो उन्हें कहीं भी लाने ले जाने में कठिनाई होने लगी। उनके टूटने का भी खतरा बढ़ने लगा। इसलिए पिल्लई ने एक स्थाई संग्रहालय बनाने की योजना बनाई। इसके अलावा देश विदेश के लोगों ने इस काम में उनका पूरा सहयोग किया।