8 हिंदी दूर्वा

भारत की खोज

जवाहरलाल नेहरू

इस किताब को जवाहरलाल नेहरू ने तब लिखा था जब वे अहमदनगर की जेल में बंदी थे। सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस किताब को नेहरू ने लगभग पाँच महीने में लिखा था। यह किताब भारत के इतिहास को एक रोचक नजरिये से दिखाता है। इस किताब को हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए जो इतिहास में रुचि रखता है। इस किताब को उसे भी पढ़ना चाहिए जिसे इतिहास एक उबाऊ विषय लगता है। इस किताब को पढ़ने के बाद किसी भी व्यक्ति की इतिहास में रुचि विकसित हो सकती है।

प्रश्न 1: ‘आखिर यह भारत है क्या? अतीत में यह किस विशेषता का प्रतिनिधित्व करता था? उसने अपनी प्राचीन शक्ति को कैसे खो दिया? क्या उसने इस शक्ति को पूरी तरह खो दिया है? विशाल जनसंख्या का बसेरा होने क अलावा क्या आज उसके पास ऐसा कुछ बचा है जिसे जानदार कहा जा सके?’

ये प्रश्न अध्याय दो के शुरुआती हिस्से से लिए गए हैं। अब तक आप पूरी पुस्तक पढ़ चुके होंगे। आपके विचार से इन प्रश्नों के क्या उत्तर हो सकते हैं? जो कुछ आपने पढ़ा है उसके आधार पर और अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर: भारत एक प्राचीन देश है जहाँ पर मानव सभ्यता का विकास हजारों वर्षों पहले शुरु हो चुका था। हड़प्पा सभ्यता; जो विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है का विकास इसी भारतभूमि पर हुआ था। इस तरह से हम कह सकते हैं भारत ‘सभ्यता’ का प्रतीक है। भारत ने अपने इतिहास में अनेकों उतार चढ़ाव देखे हैं। मध्यकालीन युग में कुछ ऐसा हुआ कि भारतीयों की रचनात्मकता समाप्त हो गई। वे बाहरी दुनिया में होने वाली गतिविधियों से मुँह मोड़ने लगे। इसी कारण से भारत कहीं न कहीं पिछड़ता चला गया जिसकी परिणती अंग्रेजों के हाथों गुलामी के रूप में हुई। लेकिन भारत में जो सबसे बड़ी शक्ति थी वह थी सभी संस्कृतियों को अपने आप में आत्मसात करने की। वह शक्ति आज भी बरकरार है। आज के भारत में ढ़ेर सारी समस्याएँ हैं। लेकिन लोग अभी भी नई तकनीकि और नये बदलावों को अपनाने में पीछे नहीं हटते हैं। यही बात शायद भारत को जानदार बनाती है।

प्रश्न 2: आपके अनुसार भारत यूरोप की तुलना में तकनीकी-विकास की दौड़ में क्यों पिछड़ गया था?

उत्तर: जब यूरोप में पुनर्जागरण हो रहा था उस समय भारत रुढ़िवादिता के शिकंजे में कसता जा रहा था। जातिवाद अपनी जड़ें बुरी तरह से जमा चुका था। इसके कारण समाज का विभाजन नियत चौखटों में हो गया था। समाज के एक वर्ग का दूसरे वर्ग के साथ विचारों का आदान प्रदान लगभग बंद हो चुका था। परदा प्रथा ने समाज के कुलीन वर्गों में अपना घर बना लिया था। इससे महिलाएँ मुख्यधारा से पूरी तरह कट चुकी थीं। इन कारणों से नये ज्ञान के प्रचार प्रसार में बाधा पड़ने लगी। इसलिए यूरोप की तुलना में भारत तकनीकी-विकास की दौड़ में पिछड़ गया था।

प्रश्न 3: नेहरू जी ने कहा कि – “मेरे खयाल से, हम सब के मन में अपनी मातृभूमि की अलग-अलग तसवीरें हैं और कोई दो आदमी बिलकुल एक जैसा नहीं सोच सकते।“ अब आप बताइए कि

  • आपके मन में अपनी मातृभूमि की कैसी तसवीर है?

    उत्तर: मेरी मातृभूमि एक विशाल देश है जहाँ दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहती है। यहाँ पर हर तरह की भौगोलिक संरचनाएँ है, हर प्रकार की ऋतुएँ आती जाती हैं। यहाँ के अधिकांश लोगों में एक अजीब सा अपनापन है। यहाँ लाखों समस्याएँ हैं, फिर भी यहाँ के लोग खुश रहने के हजारों बहाने तलाश ही लेते हैं।
  • अपने साथियों से चर्चा करके पता करो कि उनकी मातृभूमि की तसवीर कैसी है और आपकी और उनकी तसवीर (मातृभूमि की छवि) में क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं?

    उत्तर: मेरे मित्र ने बताया कि भारत ऐसा देश है जिसने कई महापुरुषों को जन्म दिया है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया जिससे गिनती करना बहुत आसान हो गया।


प्रश्न 4: जवाहरलाल नेहरू ने कहा, “यह बात दिलचस्प है कि भारत अपनी कहानी की इस भोर-बेला में ही हमें एक नन्हें बच्चे की तरह नहीं, बल्कि अनेक रूपों में विकसित सयाने रूप में दिखाई पड़ता है।“ उन्होंने भारत के विषय में ऐसा क्यों और किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर: नेहरू ने यह कथन सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में कहा है। सिंधु घाटी सभ्यता आज से कोई पाँच हजार साल पहले हुआ करती थी। इसलिए उस काल को नेहरू ने भारत की कहानी की भोर-बेला कहा है। लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता अत्यंत विकसित सभ्यता थी। वहाँ के खंडहरों से पता चलता है कि उस समय की नगर योजना कमाल की थी। सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं। नालियों का एक परिष्कृत तंत्र था। सार्वजनिक सुविधाएँ भी मौजूद थीं। इसलिए नेहरू ने कहा है कि उस भोर बेला में भी भारत किसी नन्हें बच्चे की तरह नहीं, बल्कि किसी सयाने की तरह दिखता है।

प्रश्न 5: सिंधु घाटी सभ्यता के अंत के बारे में अनेक विद्वानों के कई मत हैं। आपके अनुसार इस सभ्यता का अंत कैसे हुआ होगा, तर्क सहित लिखिए।

उत्तर: जहाँ पर सिंधु घाटी सभ्यता थी वहाँ के अधिकाँश भूभाग में आज रेगिस्तान है। हड़प्पा के अनाज भंडारों के अवशेषों से यह कहा जा सकता है कि उस काल में वहाँ पर खेती बारी के लायक उपजाऊ जमीन हुआ करती थी। इसलिए जलवायु परिवर्तन ही सिंधु घाटी सभ्यता के अंत का कारण रहा होगा। समय बीतने के साथ रेगिस्तान का प्रसार होने लगा होगा और लोग उस स्थान को छोड़कर उपजाऊ जमीन वाले स्थानों की ओर पलायन कर गये होंगे।

प्रश्न 6: उपनिषदों में बार-बार कहा गया है कि – “शरीर स्वस्थ हो, मन स्वच्छ हो और तन-मन दोनों अनुशासन में रहें।“ आप अपने दैनिक क्रिया कलापों में इसे कितना लागू कर पाते हैं? लिखिए।

उत्तर: मैं सुबह तड़के उठ जाता हूँ क्योंकि स्कूल बस सुबह छ: बजे आ जाती है। स्कूल जाने से पहले मैं नहा धोकर तैयार हो जाता हूँ। इससे पूरे दिन तन और मन में ताजगी बनी रहती है। मेरी माँ मेरे लिए संतुलित आहार ही बनाती है ताकि मैं स्वस्थ रहूँ। रोज शाम में मैं आउटडोर गेम खेलने जाता हूँ ताकि शरीर की वर्जिस हो जाये।

प्रश्न 7: नेहरू जी ने कहा कि – “इतिहास की उपेक्षा के परिणाम अच्छे नहीं हुए।“ आपके अनुसार इतिहास लेखन में क्या-क्या शामिल किया जाना चाहिए? एक सूची बनाइए और उस पर कक्षा में अपने साथियों और अध्यापकों से चर्चा कीजिए।

उत्तर: इतिहास में हम अक्सर शासकों और उनकी विजय या पराजय के बारे में पढ़ते हैं। यह बात सच है कि शासकों ने हमारी सभ्यता पर हमेशा से ही गहरा प्रभाव डाला है। लेकिन इसके साथ ही इतिहासकारों को कृषि व्यवस्था, कला, वाणिज्य, आदि पर भी प्रकाश डालना चाहिए। कुछ उदाहरणों सहित सामान्य जन-जीवन के बारे में भी इतिहास में लिखा जाना चाहिए।

प्रश्न 8: “हमें आरंभ में ही एक ऐसी सभ्यता और संस्कृति की शुरुआत दिखाई पड़ती है जो तमाम परिवर्तनों के बावजूद आज भी बनी हुई है।“ आज की भारतीय संस्कृति की ऐसी कौन-कौन सी बातें/चीजें हैं जो हजारों साल पहले से चली आ रही हैं? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।

उत्तर: भारत को प्रकृति ने उपजाऊ जमीन और प्राकृतिक संपदा का वरदान दिया है। यहाँ पर मानव सभ्यता के फलने फूलने के लिए प्रचुर संसाधन और अवसर हैं। इसलिए भारत में हमेशा से बाहरी लोग आते रहे हैं। भारत की प्राचीन सभ्यता में जो सबसे बड़ी खासियत थी वह थी उसका लचीलापन और दूसरी संस्कृतियों को अपने में आत्मसात करने का गुण। इसलिए जो भी भारत की भूमि पर आया वह समय बीतने के साथ साथ यहीं का होकर रह गया। आर्य से लेकर मुगल तक; सबने भारत को अपना घर बना लिया। यहाँ पर आज दुनिया के सभी मुख्य धर्मों के अनुयायी रहते हैं, लेकिन मूल रूप से वे हैं पक्के हिंदुस्तानी। भारत की इसी खूबी ने हमारी सभ्यता को एक निरंतरता प्रदान की है।

प्रश्न 9: आपने पिछले साल (सातवीं कक्षा में) बाल महाभारत कथा पढ़ी। भारत की खोज में भी महाभारत के सार को सूत्रबद्ध करने का प्रयास किया गया है – “दूसरों के साथ ऐसा आचरण नहीं करो जो तुम्हें खुद अपने लिए स्वीकार्य न हो।“ आप अपने साथियों से कैसे व्यवहार की अपेक्षा करते हैं और स्वयं उनके प्रति कैसा व्यवहार करते हैं? चर्चा कीजिए।

उत्तर: मैं चाहता हूँ कि मेरे मित्र मुझे उतना सम्मान दें जितना किसी भी मित्र को देना चाहिए।

प्रश्न 10: प्राचीन काल से लेकर आज तक राजा या सरकार द्वारा जमीन और उत्पादन पर ‘कर’ लगाया जाता रहा है। आजकल हम किन-किन वस्तुओं और सेवाओं पर कर देते हैं, सूची बनाइए।

उत्तर: आज लगभग हर उस वस्तु पर टैक्स लगाया जाता है जिसे पैकेट में बेचा जाता है। सेवाएँ जिनपर टैक्स लगता है, उनमें से कुछ के नाम हैं: इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्ट, फोन बिल, हॉस्पिटल बिल, रेस्तरां, आदि।

प्रश्न 11: प्राचीन समय में विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रभाव के दो उदाहरण बताइए। वर्तमान समय में विदेशों में भारतीय संस्कृति के कौन-कौन से प्रभाव देखे जा सकते हैं? अपने साथियों से मिलकर एक सूची बनाइए। (संकेत: खान-पान, पहनावा, फिल्में, हिंदी, कंप्यूटर, टेलीमार्केटिंग, आदि)

उत्तर: प्राचीन समय में अरब देशों और पश्चिम के देशों ने भारत से दशमलव प्रणाली सीखी। मध्ययुग में भारत से उन कपड़ों की मांग अच्छी थी जिनपर हाथ से कशीदाकारी की जाती थी। आज पूरे ब्रिटेन में चिकन टिक्का को वहाँ का नेशनल डिश माना जाता है। भारत की करी को कई देशों के लोग पसंद करते हैं। हमारे कई संगीतकारों ने पश्चिमी देशों में अपनी अलग पहचान बनाई है; जैसे रविशंकर, ए. आर. रहमान, आदि।

प्रश्न 12: पृष्ठ संख्या 34 पर कहा गया है कि जातकों में सौदागरों की समुद्री यात्राओं/यातायात के हवाले भरे हुए हैं। विश्व/भारत के मानचित्र में उन स्थानों/रास्तों को खोजिए जिनकी चर्चा इस पृष्ठ पर की गई है।

उत्तर: स्वयं कीजिए

प्रश्न 13: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में अनेक विषयों पर चर्चा है, जैसे, “व्यापार और वाणिज्य, कानून और न्यायालय, नगर-व्यवस्था, सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह और तलाक, स्त्रियों के अधिकार, कर और लगान, कृषि, खानों और कारखानों को चलाना, दस्तकारी, मंडियाँ, बागवानी, उद्योग-धंधे, सिंचाई और जलमार्ग, जहाज और जहाजरानी, निगमें, जन-गणना, मत्स्य उद्योग, कसाई खाने, पासपोर्ट और जेल – सब शामिल हैं। इसमें विधवा विवाह को मान्यता दी गई है और विशेष परिस्थिति में तलाक को भी।“ वर्तमान में इन विषयों की क्या स्थिति है? अपनी पसंद के किन्हीं दो विषयों पर लिखिए।

उत्तर: आज के भारत में विधवा विवाह को पूरी मान्यता है। कानूनी मान्यता के अलावा अब समाज का नजरिया भी इस विषय पर काफी बदल चुका है। यदि दूर दराज के गाँवों को छोड़ दें तो अधिकाँश लोग आज विधवा विवाह के पक्षधर हैं। इस मामले में परिवार के पुरुष स्वयं आगे बढ़कर पूरी कोशिश करते हैं कि किसी कम उम्र की विधवा का पुनर्विवाह हो जाये ताकि उसकी बाकी जिंदगी सुचारु रूप से चले। जहाँ तक स्त्रियों के अधिकार का प्रश्न है तो उस मामले में भी काफी कुछ बदला है। अब स्त्रियों को संपत्ति का अधिकार है। शिक्षा के प्रसार के कारण आज महिलाएँ लगभग हर क्षेत्र में काम करती हुई दिखाई देती हैं।

प्रश्न 14: आजादी से पहले किसानों की समस्याएँ निम्नलिखित थीं – “गरीबी, कर्ज, निहित स्वार्थ, जमींदार, महाजन, भारी लगान और कर, पुलिस के अत्याचार ..” आपके विचार से आजकल किसानों की समस्याएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: आजादी के सत्तर वर्षों के बाद भी किसानों की समस्याएँ कमोबेश वैसी ही हैं। आज भी अधिकाँश किसान गरीबी के बोझ के तले दबे हुए हैं। जमींदार तो अब नहीं रहे लेकिन महाजन और साहूकार अब भी किसानों का खून पीते हैं। हाल के वर्षों में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। किसानों को अपनी फसल औने पौने दामों में बेचनी पड़ती है और उनके बदले में बिचौलिये की आय बढ़ जाती है।

प्रश्न 15: “सार्वजनिक काम राजा की मर्जी के मोहताज नहीं होते, उसे खुद हमेशा इनके लिए तैयार रहना चाहिए।“ ऐसे कौन-कौन से सार्वजनिक कार्य हैं जिन्हें आप बिना किसी हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते हैं?

उत्तर: जब स्कूल में सफाई अभियान होता है तो मैं उसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता हूँ। अपने मुहल्ले में कोई धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है तो मैं उसमे हर संभव हाथ बँटाता हूँ।

प्रश्न 16: महान सम्राट अशोक ने घोषणा की कि वह प्रजा के कार्य और हित के लिए ‘हर स्थान पर और हर समय’ हमेशा उपलब्ध हैं। हमारे समय के शासक/लोक-सेवक इस कसौटी पर कितना खरा उतरते हैं? तर्क सहित लिखिए।

उत्तर: आज के शासक इस कसौटी पर बिलकुल फेल हो जाते हैं। चुनाव के पहले तो वे तरह तरह के वादे करते हैं और अपने आप को जनसेवक बताते हैं। लेकिन एक बार चुनाव जीत जाने के बाद वे प्रजा पर बिलकुल ध्यान नहीं देते। उनका सारा समय अपने आप को और अपनी पार्टी को मजबूत करने में लगा रहता है। हाल के वर्षों में देखा गया है कि राजनेताओं की संपत्ति में हर वर्ष गुणात्मक वृद्धि होती है, लेकिन जनता की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है।

प्रश्न 17: “औरतों के परदे में अलग-थलग रहने से सामाजिक जीवन के विकास में रुकावट आई।“ कैसे?

उत्तर: कहा जाता है कि यदि आप औरत को शिक्षित करते हैं तो आप पूरे परिवार और पूरे समाज को शिक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए माना जाता है कि वह माँ ही होती है जिससे कोई भी बच्चा जीवन का पहला पाठ सीखता है। औरतों को परदे में रखने से वे समाज से बिलकुल कट गईं। इससे औरतों और बाहरी गतिविधियों के बीच विचारों का आदान प्रदान रुक गया। इस तरह से हमारी आबादी का पचास प्रतिशत हिस्सा सामाजिक विकास में भागीदारी नहीं कर पाया। इसलिए औरतों के परदे में अलग-थलग रहने से सामाजिक विकास में रुकावट आई।

प्रश्न 18: मध्यकाल के इन संत रचनाकारों की अनेक रचनाएँ अब तक आप पढ़ चुके होंगे। इन रचनाकारों की एक-एक रचना अपनी पसंद से लिखिए: (1) अमीर खुसरो (2) कबीर (3) गुरु नानक (4) रहीम

उत्तर: अमीर खुसरो – पहेलियाँ, कबीर – दोहे, गुरु नानक – गुरु ग्रंथ साहिब, रहीम – दोहे

प्रश्न 19: बात को कहने के तीन प्रमुख तरीके अब तक आप जान चुके होंगे: (क) अभिधा, (ख) लक्षण (ग) व्यंजना। बताइए, नेहरू जी का निम्नलिखित वाक्य इन तीनों में से किसका उदाहरण है? यह भी बताइए कि आपको ऐसा क्यों लगता है?

“यदि ब्रिटेन ने भारत में यह बहुत भारी बोझ नहीं उठाया होता (जैसा कि उन्होंने हमें बताय है) और लंबे समय तक हमें स्वराज्य करने की वह कठिन कला नहीं सिखाई होती, जिससे हम इतने अनजान थे, तो भारत न केवल अधिक स्वतंत्र और अधिक समृद्ध होता ...... बल्कि उसने कहीं अधिक प्रगति की होती।“

उत्तर: जब बात को सीधे-सीधे न कहकर घुमा फिराकर कहा जाता है तो उसे व्यंजना कहते हैं। इस शैली में अपनी बात रखने से फायदा यह होता है कि आपकी बात दूसरे तक पहुँच जाती है और उससे सुनने वाला नाराज भी नहीं होता है। इस शैली में अक्सर व्यंग्य का पुट रहता है जिससे पाठकों को मजा आता है।

प्रश्न 20: “नयी ताकतों ने सिर उठाया और वे हमें ग्रामीण जनता की ओर ले गई। पहली बार एक नया और दूसरे ढ़ंग का भारत उन युवा बुद्धिजीवियों के सामने आया......”

आपके विचार से आजादी की लड़ाई के बारे में कही गई ये बातें किस ‘नयी ताकत’ की ओर इशारा कर रही हैं? वह कौन व्यक्ति था और उसने ऐसा क्या किया जिसने ग्रामीण जनता को भी आजादी की लड़ाई का सिपाही बना दिया?

उत्तर: उन्नीसवीं सदी के अंत तक आजादी की बातें केवल पढ़े लिखे और अमीर तबके के लोग करते थे। ये वैसे लोग थे जिन्होंने अंग्रेजी में शिक्षा पाई थी। बीसवीं सदी के दूसरे दशक आते-आते किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के लोग भी आजादी की बात करने लगे थे। एक बड़े जन समुदाय का समर्थन ही वह नयी ताकत थी। यह वह समय था जब महात्मा गांधी भारत की राजनीति में आये थे। गांधी जी ने अपना ध्यान यहाँ के किसानों और गरीबों के मुद्दों पर लगाया। उन्होंने ग्रामीणों को ऐसे राष्ट्र का सपना दिखाया जहाँ हर किसी के आत्मसम्मान की बात होती हो। गांधी जी के प्रयासों के कारण ही ग्रामीण जनता भी आजादी की लड़ाई में शामिल हो गई।

प्रश्न 21: ‘भारत माता की जय’ – आपके विचार से इस नारे में किसकी जय की बात कही जाती है? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

उत्तर: इस नारे में उस अमूर्त मातृभूमि के प्रति प्रेम झलकता है जिसकी मिट्टी में खेलकूदकर हम सभी बड़े हुए हैं। मिट्टी का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। हम जो भोजन खाते हैं वह इसी मिट्टी में उगता है। हमारे घर भी इसी जमीन पर बनते हैं। हमारा पूरा क्रियाकलाप मिट्टी की सतह पर ही होता है। इसलिए अपनी मिट्टी से जुड़ाव होना मनुष्य का एक प्राकृतिक गुण होता है।

प्रश्न 22: भारत पर प्राचीन काल से ही अनेक विदेशी आक्रमण होते रहे। उनकी सूची बनाइए। समय क्रम में बनाएँ तो और भी अच्छा होगा। आपके विचार से भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना इससे पहले के आक्रमणों से किस तरह अलग है?

उत्तर: भारत में कई विदेशी आक्रमण होते रहे हैं; जैसे कि हूण, यूनानी, तुर्की, मुगल, आदि। इनमें से कुछ आक्रमणकारी तो केवल लूटपाट करने की मंशा से आते थे। कुछ आक्रमणकारी अपनी साम्राज्यवादी नीतियों के कारण यहाँ आये। लेकिन जिस किसी ने भी अपना शासन यहाँ स्थापित किया वह कालांतर में यहीं का होकर रह गया; जैसे कुषाण और मुगल। लेकिन अंग्रेज उनसे अलग थे। अंग्रेजों ने कोई आक्रमण नहीं किया, बल्कि वे तो यहाँ व्यापार करने आए थे। अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया लेकिन उस शासन की बागडोर भारत से हजारों मील दूर हुआ करती थी। इसके पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ था। अंग्रेज कभी भी भारतीय होकर नहीं रह पाये।

प्रश्न 23: अंग्रेजी सरकार शिक्षा के प्रसार को नापसंद करती थी। क्यों? शिक्षा के प्रसार को नापसंद करने के बावजूद अंग्रेजी सरकार को शिक्षा के बारे में थोड़ा बहुत काम करना पड़ा। क्यों?

उत्तर: अंग्रेजी सरकार यह नहीं चाहती थी की भारत के लोग पढ़ लिख लें। अंग्रेज चाहते थे की भारतीय लोग हमेशा अज्ञान के अंधेरे में ही रहें ताकि उनपर शासन करना आसान हो। जब अंग्रेजों का शासन भारत के एक बड़े भूभाग तक फैल गया तो उन्हें ऐसे लोगों की जरूरत पड़ने लगी जो निचले दर्जे की नौकरियाँ करके उनके राजकाज में हाथ बँटाएँ। ऐसे ही क्लर्कों की फौज बनाने के लिए अंग्रेजी सरकार को शिक्षा के बारे में थोड़ा बहुत काम करना पड़ा।

प्रश्न 24: ब्रिटिश शासन के दौर के लिए कहा गया कि – “नया पूँजीवाद सारे विश्व में जो बाजार तैयार कर रहा था उससे हर सूरत में भारत के आर्थिक ढ़ाँचे पर प्रभाव पड़ना ही था।“ क्या आपको ऐसा लगता है कि अब भी नया पूँजीवाद पूरे विश्व में जो बाजार तैयार कर रहा है, उससे भारत के आर्थिक ढ़ाँचे पर प्रभाव पड़ रहा है? कैसे?

उत्तर: नया पूँजीवाद आज पूरे विश्व को एकीकृत बाजार में बदल रहा है। इससे कई फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। आज लगभग हर बहुराष्ट्रीय कम्पनी भारत में अपना व्यवसाय कर रही है क्योंकि भारत एक विशाल बाजार है। इससे रोजगार के लाखों अवसर पैदा हुए हैं। इससे ग्राहकों के पास चुनने के लिए हजारों विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन इससे स्थानीय व्यापारियों को काफी नुकसान भी हुआ है। मजदूरों का शोषण काफी बढ़ गया है। उपभोक्तावाद तेजी से बढ़ा है जिसके बुरे प्रभाव समाज पर पड़ रहे हैं।



दो गौरैया

माँ यह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए, इसलिए वे पिताजी की मदद नहीं कर रहीं थीं। वो हंस इसलिए रहीं थीं कि उन्हें पता था कि पिताजी अंदर से एक दयालू इंसान हैं। वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे चिड़ियों को ज्यादा हानि पहुँचे। वो शायद ये भी जानती थीं कि थोड़े प्रयास के बाद पिताजी हार मानकर शांत बैठ जाएंगे।

सागर यात्रा

समुद्र का पानी खारा होने की वजह से ना तो पीने लायक होता है ना ही नहाने लायक। ज्यादा खारेपन की वजह से साबुन भी उसमें बेअसर हो जाता है। इसलिए समुद्र के पानी से ना तो हम नहा सकते हैं, ना ही कपड़े धो सकते हैं। इसलिए लेखक और उसके साथियों को समुद्र यात्रा में पानी की समस्या हुई।

उठ किसान ओ

इस कविता में किसान से जग जाने का आह्वान किया गया है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि खेती के नए तरीके हमारे देश में इस्तेमाल होने लगे हैं, फिर भी बारिश का महत्व पहले की तरह ही है।

एक खिलाड़ी की कुछ यादें

लेखक ने एक बार लाहौर में ध्यानचंद को हॉकी खेलते देखा था। ध्यानचंद की दक्षता ने लेखक को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लेखक के शब्दों में एक महान खिलाड़ी आपको अपने खेल की ओर आकर्षित करता है। उस खिलाड़ी की महानता आपके लिए एक प्रेरणाश्रोत का काम करती है।

सस्ते का चक्कर

अजय के अन्य दोस्तों ने कहा कि नरेंद्र की आदतें अच्छी नहीं है। वह चटोर लड़का है। अजय को उसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि नरेंद्र बहुत ही बदनाम लड़का था।

वल्ली अम्माई

बस में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना ज्यादातर लोगों को पसंद आता है। वल्ली को भी खिड़की के पास वाली सीट मिल गयी थी। खिड़की के बाहर का दृश्य वल्ली को बहुत सुंदर लग रहा था। सड़क की एक ओर नहर थी। नहर के पीछे ताड़ के पेड़ थे।

अन्याय के खिलाफ

श्री राम राजू भी एक कोया आदिवासी था। उसने हाई स्कूल तक की पढ़ाई थी। वह 18 साल की उम्र में साधू बन गया था। उसके ज्ञान के कारण लोग उसे अपना नेता मानने लगे थे। जब अंग्रेजों ने कोया आदिवासियों का राशन रोक दिया तो उनपर कहर टूट पड़ा। श्री राम राजू ने अपने लोगों की तकलीफ का अंत करने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।

केशव शंकर पिल्लई

शुरु में पिल्लई जगह-जगह प्रदर्शनी लगाकर अपना संग्रह लोगों को दिखाते थे। लेकिन जब उनका संग्रह बहुत बड़ा हो गया तो उन्हें कहीं भी लाने ले जाने में कठिनाई होने लगी। उनके टूटने का भी खतरा बढ़ने लगा। इसलिए पिल्लई ने एक स्थाई संग्रहालय बनाने की योजना बनाई। इसके अलावा देश विदेश के लोगों ने इस काम में उनका पूरा सहयोग किया।