बुद्ध चरित

NCERT Solution

आरंभिक जीवन

प्रश्न 1: सिद्धार्थ के बारे में महर्षि असित की क्या भविष्यवाणी थी? संक्षेप में बताइए।

उत्तर: महर्षि असित ने भविष्यवाणी की कि सिद्धार्थ सन्यासी बन जायेगा। वह राज-पाट, घर-गृहस्थी, आदि का त्याग कर के बुद्ध बन जायेगा।

प्रश्न 2: आप कैसे कह सकते हैं कि बालक सिद्धार्थ विशेष मेधावी था?

उत्तर: जिन विद्याओं को सीखने में साधारण बालकों को वर्षों लग जाते हैं, उन विधाओं में सिद्धार्थ शीघ्र ही पारंगत हो गया। इसलिए यह कह सकते हैं कि बालक सिद्धार्थ विशेष मेधावी था।

प्रश्न 3: महाराज शुद्धोदन सिद्धार्थ की सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए क्यों विशेष प्रयत्नशील रहते थे?

उत्तर: महाराज शुद्धोदन नहीं चाहते थे कि सिद्धार्थ सन्यासी बन जाये। वह चाहते थे कि उनके बाद सिद्धार्थ राज-पाट संभाले और गृहस्थ का धर्म निभाए। इसलिए वे सिद्धार्थ की सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए विशेष रूप से प्रयत्नशील रहते थे।

प्रश्न 4: राजकुमार सिद्धार्थ के मन में संवेग की उत्पत्ति के क्या कारण थे?

उत्तर: राजकुमार सिद्धार्थ ने किसी वृद्ध, किसी रोगी और किसी मृत व्यक्ति को देखा तो उन्हें जीवन का यथार्थ समझ में आ गया। यही उनके मन में संवेग की उत्पत्ति का कारण था।

अभिनिष्क्रमण

प्रश्न 1: सिद्धार्थ को निर्वाण के विषय में पहली प्रेरणा किस प्रकार मिली?

उत्तर: जब सिद्धार्थ अपने मन की बेचैनी दूर करने के लिए वन भ्रमण के लिए जा रहे थे तो उन्हें ताजे जुते हुए खेतों में दिखा कि कई पादप और जंतुओं की मृत्यु हो गई थी। इससे सिद्धार्थ का मन और भी अशांत हो गया। फिर जब वे एक जगह ध्यानमग्न थे तो उन्हें एक भिक्षुक दिखाई दिया। उस भिक्षुक ने यह बताया कि किस तरह वह माया-मोह से मुक्त होकर धर्म के मार्ग पर चल रहा था। भिक्षुक की बातों को सुनकर सिद्धार्थ को निर्वाण के विषय में पहली प्रेरणा मिली।

प्रश्न 2: राजकुमार ने तपोवन न जाने के लिए राजा के समक्ष क्या-क्या शर्तें रखीं?

उत्तर: राजकुमार ने तपोवन न जाने के लिए राजा के सामने निम्नलिखित शर्तें रखीं:

प्रश्न 3: छंदक कौन था? सिद्धार्थ ने उसे नींद से क्यों जगाया?

उत्तर: छंदक अस्तबल में घोड़ों की देखभाल करता था। सिद्धार्थ जब सबकुछ त्याग कर जाना चाहते थे तो उन्हें शीघ्र ही बहुत दूर चले जाने के लिए एक उत्तम घोड़े की जरूरत थी। इसलिए सिद्धार्थ ने छंदक को जगाया।

प्रश्न 4: सिद्धार्थ से अलग होने पर छंदक और कंथक की दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: सिद्धार्थ से अलग होने पर छंदक और कंथक की दशा अत्यंत खराब हो गई। दोनों की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके एक एक कदम भारी पड़ रहे थे। आते समय जिस दूरी को तय करने में उन्हें एक ही रात लगा था वापस जाते समय उसी दूरी को तय करने में उन्हें आठ दिन लग गये।

प्रश्न 5: तपोवन में सिद्धार्थ ने तपस्वियों को क्या करने के लिए कहा?

उत्तर: तपोवन में सिद्धार्थ ने तपस्वियों से कहा कि स्वर्ग में सुख की अभिलाषा में इस लोक में अपने आप को कष्ट देना धर्म का सही मार्ग नहीं है। सिद्धार्थ ने कहा कि धर्म का लक्ष्य स्वर्ग न होकर मोक्ष होना चाहिए।

प्रश्न 6: वन से लौटने के संबंध में राजमंत्री के तर्क सुनकर सिद्धार्थ ने क्या कहा?

उत्तर: सिद्धार्थ ने कहा कि माया और मोह किसी स्वप्न की तरह क्षणभंगुर होते हैं। इसलिए वह मोक्ष की तलाश में घर से निकल चुके हैं। उन्हें अपने पिता को दुख पहुँचाने का अफसोस तो था लेकिन अब वे अपने मार्ग से अडिग हैं और आगे बढ़ने की मंशा रखते हैं। इसलिए सिद्धार्थ ने वापस कपिलवस्तु जाने से मना कर दिया।

प्रश्न 7: बिंबसार ने सिद्धार्थ की सहायता के लिए क्या प्रस्ताव रखा?

उत्तर: बिंबसार ने सिद्धार्थ को वह सभी संसाधन देने का प्रस्ताव दिया ताकि सिद्धार्थ पुरुषार्थ करें और राजधर्म निभाएँ। बिंबसार का मानना था कि हर आश्रम के लिए निर्धारित आयु बनी होती है, इसलिए सिद्धार्थ को अपनी आयु के अनुसार पहले गृहस्थाश्रम का पालन करना चाहिए और फिर उचित समय आने पर सन्यास लेना चाहिए।

ज्ञान प्राप्ति

प्रश्न 1: अराड मुनि ने अविद्या किसे कहा है?

उत्तर: अराड मुनि के अनुसार आलस्य, जन्म-मृत्यु, काम, क्रोध और विषाद को अविद्या कहते हैं।

प्रश्न 2: कठोर तपस्या में लगे सिद्धार्थ ने किस कारण भोजन करने का निर्णय लिया?

उत्तर: सिद्धार्थ को लगा कि दुर्बल व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिल सकता। उन्हें लगा कि भूख मिटने से ही मानसिक शक्ति मिल सकती है। स्थिर और प्रसन्न मन से ही समाधि मिल सकती है और समाधि से ही ध्यान योग सिद्ध हो सकता है। इसलिए सिद्धार्थ ने भोजन करना का निर्णय लिया।

प्रश्न 3: मार कौन था? वह बुद्ध को क्यों डरा रहा था?

उत्तर: कामदेव को मार के नाम से भी जाना जाता है। उसे लग रहा था कि बुद्ध सारे संसार को मोक्ष का मार्ग दिखा देंगे, जिससे मार की सत्ता छिन जायेगी। इसलिए वह बुद्ध को डरा रहा था।

प्रश्न 4: सिद्धार्थ के बुद्धत्व प्राप्त करने पर प्रकृति में किस प्रकार की हलचल दिखाई पड़ी?

उत्तर: सिद्धार्थ के बुद्धत्व प्राप्त करने पर सारी दिशाएँ सिद्धों से दीप्त हो गईं। आकाश में दुंदुभि बजने लगी। बिन बादल के ही बरसात होने लगी। मंद-मद पवन बहने लगी। पेड़ों से फल-फूलों की बारिश होने लगी। स्वर्ग से पुष्प-वर्षा होने लगी। इस तरह से हर होर खुशी का वातावरण भर गया।

धर्मचक्र प्रवर्तण

प्रश्न 1: बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद सिद्धार्थ ने प्रथम उपदेश कहाँ और किन्हें दिया?

उत्तर: बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद सिद्धार्थ ने पहला उपदेश वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ में दिया था। भूतकाल में पाँच भिक्षुओं ने बुद्ध को तप-भ्रष्ट मानकर उनका साथ छोड़ दिया था। वे पाँचों भिक्षु अब सारनाथ में रहते थे। बुद्ध ने अपना पहला उपदेश उन्हीं पाँच भिक्षुओं को दिया।

प्रश्न 2: अष्टांग योग की प्रमुख बातों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: अष्टांग योग की प्रमुख बाते हैं: सही दृष्टि, सही संकल्प, सही वाणी, सही आचरण, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति और सही समाधि।

प्रश्न 3: भवान बुद्ध काशी से राजगृह क्यों आए?

उत्तर: भगवान बुद्ध को याद आया कि उन्हें बिंबसार के पास जाकर धर्मोपदेश देना था। इसलिए वे काशी से राजगृह गये।

प्रश्न 4: प्रसेनजित ने भगवान बुद्ध से क्या निवेदन किया?

उत्तर: प्रसेनजित ने भगवान बुद्ध से श्रावस्ती में कुछ दिन ठहरने को कहा और उनसे उपदेश सुनने की इच्छा व्यक्त की।

प्रश्न 5: तथागत ने कर्म के बारे में शुद्धोदन को क्या समझाया?

उत्तर: तथागत ने शुद्धोदन से कहा कि यह रारा संसार कर्म से बँधा हुआ है। इसलिए कर्म के स्वभाव, कारण, फल और कर्म के आश्रय को समझना चाहिए। कर्म ही है जो मृत्यु के बाद भी मनुष्य का अनुगमन करता है।

प्रश्न 6: आम्रपाली कौन थी? तथागत ने उसे क्या समझाया?

उत्तर: आम्रपाली वैशाली की नगरबधू थी। तथागत ने आम्रपाली को समझाया कि उसका मन शुद्ध होने के कारण उसका आशय पवित्र था। आम्रपाली का मन धर्म की ओर लगता था। बुद्ध ने यह भी बताया कि धर्म का नाश कोई नहीं कर सकता है।

महापरिनिर्वाण

प्रश्न 1: मार ने बुद्ध को क्या याद दिलाया? उत्तर में बुद्ध ने क्या कहा?

उत्तर: जब सिद्धार्थ ने बुद्धत्व प्राप्त किया था तो मार ने उनसे कहा था कि वे निर्वाण प्राप्त कर लें। तब भगवान बुद्ध ने कहा था कि जब तक वे पीड़ित और पापियों का उद्धार नहीं कर लेंगे तब तक निर्वाण प्राप्त नहीं करेंगे। मार ने बुद्ध को याद दिलाया कि अब वे बहुत लोगों को मुक्त कर चुके हैं या उन्हें मुक्ति के मार्ग पर प्रशस्त कर चुके हैं, इसलिए बुद्ध को निर्वाण ले लेना चाहिए। उत्तर में बुद्ध ने कहा कि उस दिन से तीसरे महीने में वे निर्वाण प्राप्त कर लेंगे।

प्रश्न 2: आनंद कौन था? उसे क्या जानकर आघात लगा?

उत्तर: बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य का नाम आनंद था। बुद्ध के निर्वाण का समाचार जानकर उसे आघात लगा।

प्रश्न 3: तथागत ने परिनिर्वाण से पूर्व मल्लों को क्या समझाया?

उत्तर: तथागत ने बताया कि रोग ठीक करने के लिए वैद्य का दर्शन काफी नहीं बल्कि औषधि की आवश्यकता होती है। उसी तरह धर्म को प्राप्त करने के लिए बुद्ध के दर्शन की बजाय धर्म को ठीक से समझने की जरूरत है।

प्रश्न 4: अपने अंतिम उपदेश में बुद्ध ने अपने शिष्यों से क्या कहा?

उत्तर: अपने अंतिम उपदेश में बुद्ध ने प्रतिमोक्ष का अर्थ समझाया। उन्होंने शिष्यों से कहा कि प्रतिमोक्ष के राह पर चलने से ही मोक्ष मिल सकता है।

प्रश्न 5: मल्लों और पड़ोसी राजाओं के बीच युद्ध की संभावना क्यों उत्पन्न हो गई? यह संघर्ष कैसे टल गया?

उत्तर: बुद्ध के शरीर के अवशेषों को मल्ल अपने पास ही रखना चाहते थे। पड़ोसी राजा चाहते थे कि उन्हें भी उन ‘धातुओं’ में से कुछ हिस्सा मिले। इसलिए मल्लों और पड़ोसी राजाओं के बीच युद्ध की संभावना उत्पन्न हो गई। उसके बाद द्रोण नामक एक ब्राह्मण ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की और युद्ध को टाला जा सका।

प्रश्न 6: भगवान बुद्ध के उपदेशों को संग्रह करने का भार किसे सौंपा गया और क्यों?

उत्तर: आनंद सदैव बुद्ध के साथ रहे थे। उन्होंने बुद्ध के सभी उपदेशों को सुना था। इसलिए भगवान बुद्ध के उपदेशों को संग्रह करने का भार आनंद को सौंपा गया।



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