नाटक में नाटक

मंगल सक्सेना

प्रश्न 1: बच्चों ने मंच की व्यवस्था किस प्रकार की?

उत्तर: बच्चों ने एक फालतू पड़े मैदान में घास और पौधे लगाए थे जिससे उसकी सुंदरता ठीक हो गई थी। उन्होंने उसी मैदान में अपना मंच बनाया था।

प्रश्न 2: परदे की आड़ में खड़े अन्य साथी राकेश की तुरत्बुद्धि की प्रशंसा क्यों कर रहे थे?

उत्तर: मंच पर पहुंचकर राकेश ने जो कुछ कहा था वह बिलकुल नाटक का ही अंश लग रहा था। इससे दर्शकों को ये महसूस नहीं हुआ कि कहीं कोई गड़बड़ हुई है। इसलिए बाकी साथियों ने राकेश की प्रशंसा की।

प्रश्न 3: नाटक के लिए रिहर्सल की जरूरत क्यों होती है?

उत्तर: कोई भी काम करना हो उसके लिए घंटों अभ्यास की जरूरत पड़ती है। खासकर ऐसे कामों में जहां दर्शकों के आगे कुछ करने की बात हो वहाँ रिहर्सल का महत्व और बढ़ जाता है। नाटक, संगीत और नृत्य जैसी विधाओं में दर्शक के सामने गलतियां सुधारने का मौका नहीं मिलता है। अच्छे प्रदर्शन और दर्शकों के भरपूर मनोरंजन के लिए पूर्वाभ्यास बहुत जरूरी होता है।

प्रश्न 4: सोचो ऐसा क्यों?

“राकेश को गुस्सा भी आ रहा था और रोना भी।“

(a) तुम्हारे विचार से राकेश को गुस्सा और रोना क्यों आ रहा होगा?

उत्तर: राकेश को अपने साथी कलाकारों की मूर्खता और तैयारी की कमी पर गुस्सा आ रहा था। उसे अपने मोहल्ले की इज्जत पर खतरा लग रहा था, इसलिए उसे रोना आ रहा था।

“राकेश मंच पर पहुँच गया। सब चुप हो गए, सकपका गए।“

(b) तुम्हारे विचार से राकेश जब मंच पर पहुँचा, बाकी सब कलाकार क्यों चुप हो गए होंगे?

उत्तर: जब राकेश मंच पर पहुँचा तो बाकी कलाकारों को डर हो गया होगा कि सबके सामने फ़टकार न लग जाये। इसलिए सब चुप हो गये, सकपका गए।

“दर्शक सब शांत थे, भौंचक्के थे।“

(c) दर्शक भौंचक्के क्यों हो गए थे?

उत्तर: दर्शकों की समझ में नहीं आ रहा था कि नाटक का डायरेक्टर मंच पर क्यों पहुँच गया था। उन्हें शायद नाटक में किसी रोचक मोड़ की प्रतीक्षा होने लगी थी। इसलिए दर्शक भौंचक्के हो गए थे।

“मैंने कहा था न कि रिहर्सल में भी यह मानकर चलो कि दर्शक सामने ही बैठे हैं।“

(d) राकेश ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तर: राकेश ने ऐसा दिखाने की कोशिश की उसका मंच पर आना भी नाटक का ही एक भाग था। इसलिए राकेश ने ऐसा कहा होगा।



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