उठ किसान ओ

त्रिलोचन

उठ किसान ओ, उठ किसान ओ
बादल घिर आये हैं
तेरे हरे-भरे सावन के
साथी ये आये हैं।

इस कविता में किसान से जग जाने का आह्वान किया गया है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि खेती के नए तरीके हमारे देश में इस्तेमाल होने लगे हैं, फिर भी बारिश का महत्व पहले की तरह ही है।

कवि किसान से उठ जाने को कहता है क्योंकि उसके हरे-भरे सावन के साथी बादल घिर घिर कर आये हैं। बादल अपने साथ वर्षा लायेंगे जिससे खेत लहलहाने लगेंगे।

आसमान भर गया देख तो
इधर देख तो, उधर देख तो
नाच रहे हैं उमड़, घुमर कर
काले बादल तनिक देख तो
तेरे प्राणों में भरने को
नए राग लाये हैं।

इधर उधर जहाँ भी देखो आसमान बादलों से घिर गया है। उमड़ते धुमड़ते काले बादलों की सुंदरता वाकई देखने लायक है। ये किसान के जीवन में नये राग का संचार करने आये हैं। जब मानसून शुरु होता है तो किसान के लिए एक फसल चक्र की अहम शुरुआत होती है। उस फसल की सफलता पर उसका पूरा भविष्य दांव पर लगा होता है।

यह संदेशा लेकर आयी
सरस मधुर, शीतल पुरवाई
तेरे लिए, अकेले तेरे
लिए, कहाँ से चल कर आयी
फिर वे परदेशी पाहुन
सुन, तेरे घर आये हैं।

ऐसा लगता है जैसे सरस, मधुर और शीतल पुरवैया हवा उस बादल रूपी पाहुन का संदेश लेकर आयी है। वो ये कह रही है कि देखो मैं सिर्फ तुम्हारे लिए कितनी दूर से चल कर आयी हूँ।

उड़ने वाले काले जलधर
नाच नाच कर गरज गरज कर
ओढ़ फुहारों की सित चादर
देख उतरते हैं धरती पर
छिपे खेत में, आंखमिचौली
सी करते आये हैं।

बादल खेतों में आंखमिचौली खेल रहे हैं। वे नाच-नाच कर और गरज-गरज कर अपना खेल खेल रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे बादलों ने फुहारों की सफेद चादर ओढ़ रखी हो।

हरा खेत जब लहराएगा
हरी पताका फहराएगा
छिपा हुआ बादल तब उसमे
रूप बदल कर मुस्काएगा
तेरे सपनों के ये मीठे
गीत आज छाये हैं।

किसान अब अच्छी फसल के सपने देख रहा है। वह देख रहा है कि कैसे उसके हरे खेत लहराएंगे और अपनी हरी पताकाएं फहराएंगे। उस समय बादल किस तरह मुस्कराता हुआ उन्हें देखेगा।

किसी किसान के लिए अच्छी बारिश से बड़ा वरदान कुछ नहीं हो सकता है। अच्छी फसल ही उसके घर में खुशहाली लाती है।



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