जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

बघीरा का बीता हुआ कल

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

मोगली ने जवाब दिया, वो आदमी ही क्या जो अपने भाइयों को छोड़कर चला जाए। मैं इसी जंगल में पैदा हुआ हूँ और बड़ा हुआ हूँ। शायद ही कोई भेड़िया होगा जिसके पाँव से मैंने काँटे नहीं निकाले होंगे। वे सभी मेरे भाई ही तो हैं। और मैंने हमेशा जंगल के कानून का पालन किया है।

बघीरा ने अपने शरीर को पूरी लम्बाई में फैला लिया और आँखें आधी मूंद ली। उसने कहा, जरा मेरी दाढ़ी के नीचे हाथ लगाकर देखना।

जब मोगली ने बघीरा की दाढ़ी के अंदर हाथ फेरा तो वहाँ उसने पाया कि एक जगह पर बाल बिलकुल भी नहीं थे।

जंगल में कोई नहीं जानता है कि मेरे शरीर पर यह निशान है। पता है, यह निशान चमड़े के मजबूत मोटे पट्टे से बना है। इस तरह के पट्टे से इंसान जंगली जानवरों को अपने कब्जे में कर लेता है। मेरा जनम इंसानों के बीच हुआ था। वहीं पर एक पिंजरे में मेरी माँ की मौत हुई थी। उसे उदयपुर के राजा के महल में रखा गया था। इसी की वजह से मैंने तुम्हें दल में शामिल करवाने के लिए उचित कीमत दी थी। मैंने कभी भी जंगल को नहीं देखा था। लोग मुझे पिंजरे में बंद रखते थे। वहाँ मुझे भरपूर खाना मिलता था लेकिन आजादी नहीं थी। लेकिन मुझे लगता था कि किसी भी स्वाभिमानी तेंदुए को इंसान के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए। एक दिन मौका पाकर मैंने पिंजरे को तोड़ दिया और वहाँ से भाग लिया। चूँकि मैंने इंसानों के तौर तरीके सीखे थे इसलिए इस जंगल में मैं शेर खान से भी अधिक खतरनाक साबित हुआ। क्या तुम्हें ऐसा नहीं लगता है?

मोगली ने कहा, तुम सही कहते हो। मोगली को छोड़कर सारा जंगल बघीरा से डरता है।

बघीरा ने बड़े प्यार से मोगली को सहलाते हुए कहा, जिस तरह से मैं अपने जंगल में चला आया उसी तरह से तुम्हें भी इंसानों के बीच जाना चाहिए। आखिरकार तुम एक आदमी के बच्चे हो। इसके पहले कि कोई तुम्हें भेड़ियों की सभा में मार डाले, तुम्हें अपने भाई बंधुओं के बीच चले जाना चाहिए।

मोगली ने पूछा, लेकिन कोई मुझे मारना क्यों चाहेगा?

बघीरा ने कहा, मेरी आँखों में देखो। इसपर मोगली बघीरा की आँखों में देखने लगा। थोड़ी ही देर में बघीरा ने अपनी आँखें दूसरी तरफ मोड़ ली।

बघीरा बेचैनी से पत्तियों में अपना पंजा फिराते हुए बोला, यही असली कारण है। मैं तो मनुष्यों में पला बढ़ा हूँ फिर भी तुम्हारी आँखों से आँखें नहीं मिला पाता। लेकिन मेरे प्यारे बच्चे, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। लेकिन दूसरे जानवरों को यह बात कतई पसंद नहीं कि वे तुमसे आँखें नहीं मिला पाते हैं। तुम तो एक इंसान होने के नाते बहुत समझदार हो। तुम्हारी इंसानियत के कारण ही तुमने कई भेड़ियो के पैर से काँटे निकाले हैं।

मोगली उदास हो गया और उसकी भौहें तन गईं। उसने ठंडी सांसें छोड़ते हुए कहा, ये सब मुझे नहीं पता है।


Copyright © excellup 2014