जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

भेड़ियों का झुंड

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

शेर खान के जाने के बाद भेड़ियों की माँ धम्म से अपने बच्चों के पास बैठ गई। वह बुरी तरह से हाँफ रही थी। भेड़ियों के पिता ने गंभीरता से कहा, शेर खान सच ही बोल रहा है। इस बच्चे को हमें दल के पास ले जाना होगा। क्या फिर भी तुम उसे अपने पास रखोगी?

भेड़िये की माँ ने जवाब दिया, क्या मतलब है? यह बच्चा जिस हाल में हमारे पास आया था और तनिक भी नहीं डरा। उसने मेरे एक बच्चे को किनारे कर के अपने लिए जगह भी बना ली। वह लंगड़ा कसाई इसे मारकर वाइनगंगा की ओर भाग जाता। उसका बदला लेने के लिए गाँववाले हमारी बुरी हालत कर देते। इसे मैं जरूर रखूंगी। देखो कैसा पिल्लू जैसा दिखता है। ओ! कितना प्यारा है। इसे मैं मोगली के नाम से बुलाउँगी। समय आने पर यह शेर खान का शिकार करेगा और उससे बदला लेगा।

लेकिन इसपर दल क्या कहेगा?

जंगल का कानून कहता है कि जब कोई भेड़िया शादी करेगा तो उसे अपने दल से अलग रहना होगा। लेकिन जब भी उसके बच्चे चलने-फिरने लायक हो जाएंगे तो तो उसे उन्हें दल की सभा में लेकर आना होगा। इससे दल के दूसरे सदस्य उन्हें आसानी से जान लेंगे। दल की सभा हर महीने में एक बार पूरनमासी की रात को होती है। उस रस्म के बाद शावक कहीं भी जाने के लिए आजाद होते हैं। लेकिन जब तक वे अपना पहला शिकार ना मार लें तब तक कोई भी वयस्क भेड़िया यदि उन्हें मारता है तो उसे सजा मिलेगी। हत्यारे को पकड़े जाने पर मौत की सजा होती है और शायद ऐसा ही उचित भी है।

भेड़ियों के पिता ने उस दिन का इंतजार किया जब उसके बच्चे थोड़ा बहुत दौड़ने लगे। उसके बाद वह मोगली, अन्य शावकों और उनकी माँ को लेकर दल की सभा में गया। सभा एक पहाड़ी की चोटी पर होती थी। उस जगह पर बहुत सारे पत्थर और शिलाएँ थीं जहाँ आसानी से सैंकड़ो भेड़िये छुप सकते थे। वहाँ पर दल का नेता जिसका नाम अकेला था, बड़ी शान से अपने आसन पर पसरा हुआ था। उसके पास विभिन्न आकार और प्रकार के लगभग चालीस भेड़िये बैठे थे। उनमें कुछ धूसर रंग के अनुभवी भेड़िए थे जो अकेले ही एक हिरण को मारने की क्षमता रखते थे। कुछ तीन साल के काले रंग वाले युवा भेड़िये थे जो ऐसा करने का दंभ भरते थे। अकेला पिछले एक साल से उनका नेतृत्व कर रहा था और वह इस काम को अच्छे ढ़ंग से निभा रहा था। वह जब ज वान था तो एक बार किसी शिकारी के फंदे में फँस चुका था और एक बार इंसानों से बुरी तरह पिट चुका था। इसलिए उसे मनुष्यों के रीति रिवाजों की अच्छी समझ थी। उस पहाड़ी पर हल्की फुल्की कानाफूसी ही चल रही थी, अन्यथा सन्नाटा ही था। छोटे-छोटे शावक बीच में एक दूसरे पर उलट पुलट रहे थे क्योंकि उनके चारों ओर उनकी माँओं ने सुरक्षा का घेरा बना रखा था। कभी-कभी कोई वयस्क भेड़िया दबे पांव किसी शावक के पास जाकर उसका निरीक्षण करता था और दबे पांव वापस आकर अपनी जगह पर बैठ जाता था। कभी-कभी कोई माँ अपने शावक को दूर ले जाकर चाँदनी में देख लेती थी; शायद यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी ने उसे नुकसान न पहुँचा दिया हो। अकेला अपनी जगह पर बैठे-बैठे आवाज लगाता था, जंगल के कानून को मानो और मजे करो। जवाब में शावकों की माँएं दोहराती थीं, जंगल के कानून को मानो और मजे करो।


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