जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

मोगली का फैसला

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

बघीरा ने कहा, नहीं मेरे बच्चे, तुम घबड़ाओ नहीं। तुम्हारे आँसू इस बात की गवाही दे रहे हैं कि तुम सचमुच में एक इंसान हो क्योंकि इंसान ही तो आँसू बहा पाते हैं। भूल जाओ इस जंगल को। इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो। ये इसी काबिल हैं कि आपस में लड़कर मर जाएँ। जाओ, एक नई जिंदगी तुम्हारा इंतजार कर रही है। मोगली वहाँ बैठ कर काफी देर तक रोया। उसके बाद उसका मन हल्का लग रहा था।

फिर वह उठा और बोला, अब मैं अपने लोगों के बीच चला जाऊँगा। लेकिन इसके पहले मैं अपनी माँ से विदा लेना चाहता हूँ। मोगली अपनी गुफा में गया और अपने भेड़िये माँ बाप से मिला। वह उनके गले लग कर काफी देर तक रोता रहा। उसके भाई भी साथ में रोते रहे।

मोगली ने कहा, तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे?

उसके भाइयों ने कहा, हम तुम्हें तब तक नहीं भूलेंगे जब तक हमारी सूँघने की शक्ति जिंदा रहेगी। तुम रोज घाटी में आना। हम वहीं तुमसे मिलने आया करेंगे। रात होने पर हम तुम्हारे साथ खेतों में खेलने आयेंगे।

भेड़िये के पिता ने कहा, इसके पहले कि मैं और तुम्हारी माँ बूढ़े हो जाएँ, हमसे मिलने जरूर आना मेरे बच्चे।

भेड़िये की माँ ने कहा, मेरा दिल ही जानता है कि मैंने तुम्हें हमेशा अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यार किया है। जल्दी आना।

मोगली ने कहा, मैँ जरूर आऊँगा। लेकिन मैं जब भी आऊँगा तो मेरे साथ शेर खान की खाल होगी जिसे मैं सभा वाली शिला पर बिछाऊँगा। मुझे भूल मत जाना। इस जंगल से भी कहना कि मुझे भूल न जाए।

सुबह होने ही वाली थी। मोगली अकेला ही पहाड़ियों से नीचे घाटी में निकल पड़ा था। वह उन अजीब से प्राणियों से मिलने जा रहा था जिन्हें सब इंसान कहते हैं।


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