जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

मोगली की ट्रेनिंग

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

इसके बाद मोगली की रोमांचक जिंदगी शुरु हो गई और शायद दस ग्यारह साल बीत गये। आप मोगली के जीवन के उस रोमांचक दौर की तरह तरह की कल्पनाएँ कर सकते हैं। यदि हर बात को लिखा जाए तो कई किताबें भर जाएंगी। इसलिए हम थोड़ा संक्षेप से ही काम चला लेंगे।

वह भेड़ियों के शावकों के साथ ही बड़ा हो रहा था। ये बात और थी कि जब तक वे शावक वयस्क भेड़िए बन चुके थे तब तक मोगली एक बच्चा ही था। उसके नए पिता ने उसे जंगल की हर बात सिखाई थी।

वह जंगल की हर बात और कायदे कानून से परिचित हो चुका था। वह घास की बारीक से बारीक सरसराहट को पहचानता था। वह रात की एक-एक हरकत को समझने लगा था। उल्लू के प्रत्येक सुर की जानकारी उसे हो चुकी थी। जब कोई चमगादड़ किसी डाल पर खरोंच मार रहा होता था तो मोगली उस आवाज को भी पकड़ लेता था। वह हर छोटी से छोटी मछली के तालाब में छलांग लगाने के तरीके को उतनी ही बारीकी से समझता था जैसे वर्षों से ऑफिस जाने वाला क्लर्क अपनी फाइलों को समझता है।

जब भी उसे अपनी ट्रेनिंग से फुरसत मिलती थी तो वह धूप सेंकने का मजा लेता और कुछ खाकर वहीं सो जाता था। जब भी उसका मन करता वो जंगल के तालाब में डुबकियां लगाता था। जब भी उसे शहद चखने की इच्छा होती वो झट से किसी पेड़ पर चढ़ जाता था ताकि मधुमक्खी के छत्ते तक पहुँच सके। बघीरा ने उसे पेड़ पर चढ़ने की अच्छी ट्रेनिंग दी थी। बलू से उसे पता चला था कि कंद मूल और शहद भी उतने ही स्वादिष्ट होते हैं जितना की ताजे शिकार का मांस।

शुरु-शुरु में जब बघीरा उसे पेड़ पर चढ़ना सिखा रहा था तो वह किसी स्लॉथ की तरह डाल पर चिपक कर चलता था। लेकिन जल्दी ही वह बड़े आराम से एक डाल से दूसरी डाल पर कूद लेता था। पेड़ों पर चढ़ने की उसकी दक्षता देखकर तो कोई बंदर भी शर्मा जाए।

उसने भेड़ियों की सभा में भी अपनी एक खास पहचान बना ली थी। वहीं पर मोगली ने ये सीखा था कि कि यदि किसी भेड़िये की आँखों में आँखें डालकर देर तक देखा जाए तो थोड़ी देर में भेड़िया अपनी आँखें नीची कर लेता है। अक्सर वह मजा लेने के लिए भेड़ियों की आँखों में आँखें डालकर यह खेल खेलता था।

कभी-कभी वह अपने साथी भेड़ियों के पंजों से कांटे भी निकाल देता था। आपको पता ही होगा कि जब किसी भेड़िये के पंजे में कांटा चुभ जाता है तो इससे असहनीय पीड़ा होती है।

कभी-कभी रात को वह पहाड़ी के नीचे के खेतों में जाया करता था और बड़े कौतूहल से झोपड़ी में रहने वाले लोगों को देखता था। लेकिन उसे इंसानों पर भरोसा नहीं था। एक बार बघीरा ने उसे एक बड़ा सा बक्सा दिखाया था जिसमें अपने आप गिरकर बंद होने वाला दरवाजा लगा हुआ था। वह बक्सा बड़ी ही बखूबी से झाड़ियों में छुपाया गया था। बघीरा ने बताया था कि कैसे इंसान उस बक्से में किसी शेर या बाघ तक को फंसा लेते हैं।

उसे बघीरा के साथ घने अंधेरे जंगल में जाना बहुत पसंद था। वह पूरे दिन बघीरा के साथ सोना पसंद करता था। रात में जब बघीरा बड़ी सफाई के साथ कोई शिकार पकड़ता था तो इसे देखकर मोगली बहुत खुश होता था। मोगली को भी शिकार करने में बड़ा मजा आता था। लेकिन जब वह थोड़ा समझदार हो गया तो बघीरा ने उसे बताया था कि कभी भी किसी मवेशी का शिकार नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए कि उसे दल में लाने के लिए एक भैंसे की कीमत देनी पड़ी थी।

बघीरा ने कहा था, ये पूरा जंगल तुम्हारा है। तुम हर उस जानवर का शिकार कर सकते हो जिसे मारने की शक्ति तुममे है। लेकिन यह मत भूलना कि तुम्हें पाने के लिए हमने एक भैंसे को मारा था। इसलिए तुम कभी भी किसी मवेशी को नहीं मारोगे।

मोगली ने बड़े लगन से इस बात का पालन किया था। वह उस स्वच्छंद लड़के की तरह सब कुछ सीख रहा था जिसपर हर कुछ सीखने के लिए कोई दवाब न हो। वैसा लड़का जिसे भोजन के अलावा दीन दुनिया की कोई परवाह न हो।


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