क्लास 5 हिंदी

चुनौती हिमालय की

यह एक यात्रा वृत्तांत है।

जवाहरलाल लद्दाख की यात्रा पर हैं। वे पर्वतारोहण करना चाहते हैं। स्थानीय कुली से जब पता चलता है कि अमरनाथ गुफा बस आठ मील दूर है तो जवाहरलाल वहाँ तक जाने के लिए फौरन तैयार हो जाते हैं। पहाड़ों पर आठ कदम उठाना भी भारी होता है फिर आठ मील का फासला तय करने में तो असंख्य मुश्किलें आती है।

सभी मुसीबतों से पार पाते हुए जवाहरलाल और उनकी टीम पर्वत को पार कर लेती है। उसके बाद नीचे उतरना और भी मुश्किल होता है। उसी प्रयास में जवाहरलाल एक खाई में गिरने लगते हैं। सुरक्षा रस्सी बंधी होने के कारण उनके भाई और अन्य लोग मिलकर उन्हें बचा लेते हैं।

कहाँ क्या है

प्रश्न 1: लेह लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश है। भारत के नक्शे में ढ़ूँढ़ो कि लद्दाख कहाँ है और तुम्हारा घर कहाँ है?

उत्तर: लद्दाख भारत के उत्तरी शिखर पर है। मेरा घर उत्तर भारत के केंद्र में है।

प्रश्न 2: अनुमान लगाओ कि तुम जहाँ रहते हो वहाँ से लद्दाख पहुँचने में कितने दिन लग सकते हैं और वहाँ किन किन जरियों से पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: दिल्ली से लद्दाख सड़क से जाने में 21 से 22 घंटे लगते हैं। दिल्ली से विमान भी उपलब्ध हैं और कोई डेढ़ घंटे की यात्रा है।

वाद विवाद

प्रश्न 1: बर्फ से ढ़के चट्टानी पहाड़ों के उदास और फीके लगने की क्या वजह हो सकती थी?

उत्तर: लद्दाख में कोई वनस्पति नहीं है। इसलिए कोई जीव भी दिखाई नहीं देता। ऐसा इसलिए है कि यह इलाका एक मरुस्थल है।

प्रश्न 2: बताओ, ये जगहें कब उदास और फीकी लगती हैं और यहाँ कब रौनक होती है? (घर, बाजार, स्कूल, खेल)

उत्तर: जब घर में मैं अकेला होता हूँ, जब किसी कारण से बाजार बंद रहता है. और जब स्कूल में कोई न हो, तो ये जगहें उदास लगती हैं। जब स्कूल मे सारे बच्चे हों तो फिर रौनक ही रौनक होती है।

प्रश्न 3: जवाहरलाल को इस कठिन यात्रा के लिए तैयार नहीं होना चाहिए।

तुम इससे सहमत हो तो भी तर्क दो, नहीं हो तो भी तर्क दो।

उत्तर: पर्वतारोहण का रोमांच कुछ अलग होता है। इसलिए मुझे लगता है कि जवाहरलाल को इस कठिन यात्रा के लिए बिल्क्उल तैयार होना चाहिए।

तुम्हारी समझ से

प्रश्न 1: इस वृत्तांत को पढ़ते पढ़ते तुम्हें भी अपनी कोई छोटी या लंबी यात्रा याद आ रही हो तो उसके बारे में लिखो।

उत्तर: एक बार स्कूल की तरफ से हमलोग असोला के जंगलों में घूमने गए थे। जंगल की सीमा तक हम स्कूल बस से पहुँचे। उसके बाद हमें पैदल ही चलना था। जंगल के भीतर पथरीला रास्ता था और बीच बीच में कँटीली झाड़ियों से आगे चलना बहुत मुश्किल होता था। टीचर ने बताया था कि हमें साँप और बिच्छू जैसे खतरनाक प्राणियों से सावधान रहना चाहिए। इसलिए हम एक एक कदम फूँक फूँककर रख रहे थे।

बीच बीच में कोई बंदर या कोई मैना तेजी से हमारे सामने से निकल जाती थी और वहाँ की शाँति में खलल पड़ जाती थी। कोई एक घंटा चलने के बाद हम बीच जंगल में बने एक कॉटेज में पहुँचे। यह कॉटेज वन विभाग ने बनवाया था। कॉटेज में खाने पीने की हर चीज मिल रही थी। वहाँ पर रुकने में बड़ा मजा आया।

प्रश्न 2: जवाहरलाल को अमरनाथ तक का सफर अधूरा क्यों छोड़ना पड़ा?

उत्तर: पर्वत को पार करने के तुरंत बाद जवाहरलाल एक खाई में गिरते गिरते बचे। आगे और भी गहरी खाइयाँ थीं। उस दुर्घटना के बाद उन लोगों ने वापस लौटने में भलाई समझी। इसलिए जवाहरलाल को अमरनाथ तक का सफर अधूरा छोड़ना पड़ा।

प्रश्न 3: जवाहरलाल, किशन और कुली सभी रस्सी से क्यों बँधे थे?

उत्तर: पर्वतारोही हमेशा टीम बनाकर चलते हैं ताकि एक दूसरी की मदद कर सकें। चढ़ाई करते समय या उतरते समय वे एक दूसरे से रस्सी से बँधे रहते है ताकि यदि कोई गलती से फिसल जाए या गिरने लगे तो उसकी जान बचाई जा सके।

प्रश्न 4: पाठ में नेहरू जी ने हिमालय से चुनौती महसूस की। कुछ लोग पर्वतारोहण क्यों करना चाहते हैं?

उत्तर: पर्वत पर चढ़ाई करना एक अत्यंत दुष्कर काम है। पर्वत पर चढ़ाई करते समय कई मुसीबतें आती हैं, जैसे पथरीले और बर्फीले रास्ते, अधिक ऊँचाई से होने वाली समस्या, आदि। इसलिए कुछ लोग इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं।

प्रश्न 5: ऐसे कौन से चुनौती भरे काम हैं जो तुम करना पसंद करोगे?

उत्तर: बंजी जम्पिंग, हैंग ग्लाइडिंग

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