क्लास 9 हिंदी कृतिका

किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

शमशेर बहादुर सिंह

NCERT Solution

Question 1: वह ऐसी कौन सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया?

उत्तर: हो सकता है कि लेखक के घर वालों ने उन्हें दो टूक शब्दों में यह कह दिया होगा कि अब वे कमाना शुरु कर दें और घर वालों के भरोसे न रहें। या हो सकता है कि किसी ने लेखक की भारी बेइज्जती की हो।


Question 2: लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफसोस क्यों रहा होगा?

उत्तर: लेखक को इस बात का अफसोस रहा होगा कि वह अपनी मातृभाषा में क्यों नहीं लिखते थे। हो सकता है कि किसी की पकड़ कई भाषाओं पर हो सकती है। लेकिन मातृभाषा में जो रस मिलता है वह शायद ही किसी अन्य भाषा में मिले।

Question 3: अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए ‘नोट’ में क्या लिखा होगा?

उत्तर: उस नोट में बच्चन ने लेखक को इलाहाबाद आने के लिए कहा होगा।


Question 4: लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है?

उत्तर: लेखक ने बच्चन के अंदर के कवि और व्यक्ति को उभारा है। एक कवि या साहित्यकार के रूप में बच्चन अपने आप में बेजोड़ थे। वे हमेशा नई विधाओं पर शोध करते थे। एक व्यक्ति के रूप में बच्चन बहुत ही मिलनसार और प्रभावशाली व्यक्ति थे। वे हमेशा दूसरों की हर संभव मदद करते थे। वे नये लेखकों को भरपूर मौका दिलवाते थे।

Question 5: बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?

उत्तर: लेखक के ससुराल वालों ने उन्हें दवा की दुकान पर काम पर रख लिया ताकि वे कुछ कमाने लगें। लेखक के गुरु शारदाचरण जी ने उन्हें अपने पेंटिंग स्कूल में मौका दिया था। इस तरह से बच्चन के अलावा अन्य लोगों ने भी लेखक की मदद की थी।


Question 6: लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।

उत्तर: लेखक शुरु में पेंटर बनना चाहता था। इसके अलावा वह अंग्रेजी और उर्दू में लिखा करता था। उसके बाद उसने देहरादून में एक दवा की दुकान पर काम करना शुरु किया। फिर इलाहाबाद जाने के बाद बच्चन के साथ कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेने लगा। उस बीच उन्हें अनुवाद के भी कुछ काम मिलने लगे। उनकी कवितायें उस जमाने की नामी गिरामी पत्रिकाओं में भी छपने लगीं।

Question 7: लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।

उत्तर: लेखक ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों को झेला है। उनकी पत्नी का स्वर्गवास कम उम्र में ही हो गया। दिल्ली प्रवास का दौर आर्थिक तंगी में बीता। देहरादून में उन्हें अपनी रुचि के विपरीत काम करना पड़ा। इलाहाबाद में भी काफी दिन उन्हें संघर्ष में ही बिताने पड़े।