class 10 aatmkathya jayshankar prasad ncert exercise solution

जयशंकर प्रसाद

आत्मकथ्य (अभ्यास)

कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?

उत्तर: कवि को लगता है कि उनका जीवन इतना भी महान नहीं है कि उसके बारे में लिखा जाये। उन्हें लगता है कि इतने बड़े संसार के इतने लंबे इतिहास में वे किसी छोटे से कण के समान हैं जिसके बारे में कुछ भी कहना अतिशयोक्ति होगी। उन्हें लगता है कि अभी उन्हें जीवन में बहुत कुछ हासिल करना है इसलिए ऐसा उचित समय नहीं आया है कि आत्मकथा लिखी जाए।


आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है?

उत्तर: कवि को लगता है कि अभी भी वे अपनी मंजिल पर नहीं पहुँचे हैं। यह मंजिल कुछ भी हो सकती है; जैसे कि कविता के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ पाना। इस पंक्ति से कवि के बारे में यह कहा जा सकता है कि उन्हें इस बात का जरा भी गुमान नहीं था कि वे इतने बड़े कवि हैं।

स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?

उत्तर: हर किसी के जीवन में कोई न कोई ऐसा आता है जो पूरे जीवन के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन में बड़ा महत्व होता है। ऐसी प्रेरणा का स्रोत जीवन को एक लक्ष्य देता है, और जीवन को किसी सार्थक कार्य में लगाने के लिए आत्मबल देता है।


भाव स्पष्ट कीजिए:

मिला कहाँ वह सुख जिसका स्वप्न देखकर मैं जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर के भाग गया।

उत्तर: उन्होंने जितना कुछ पाने की हसरत पाल रखी थी, उन्हें उतना कभी नहीं मिला। इसलिए उनके पास ऐसा कुछ भी नहीं कि जीवन की सफलताओं या उपलब्धियों की उज्ज्वल गाथाएँ बता सकें।

जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिणी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

उत्तर: कभी कोई ऐसा भी था जिसके चेहरे को देखकर कवि को प्रेरणा मिलती थी। जैसे एक नई सुबह किसी मनुष्य को हर दिन अपने कर्म को करने के लिए उद्धत करती है, वैसे ही कवि की प्रेरणा उन्हें उनके लक्ष्य की ओर चलते रहने के लिए उद्धत करती थी।


‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ – कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: कवि के पास कुछ अच्छी और कुछ बुरी यादें हैं। लेकिन कवि को लगता है कि उन्होंने अभी तक ऐसा कुछ प्राप्त नहीं कर लिया कि अपने बारे में ढ़िंढ़ोरा पीटने लगें।

‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर: इस कविता में कवि ने खड़ी हिंदी का प्रयोग किया है। यह छायावाद की शैली में लिखी गई कविता है। इसलिए इस कविता में प्रतीकों का प्रचुर प्रयोग हुआ है। जीवन में होने वाले स्वप्नों और यथार्थों के बीच के द्वंद्व को कवि ने कई प्रतीकों द्वारा बताकर इस कविता को रोचक बनाया है। इस कविता से आप सीधा अर्थ निकाल नहीं सकते बल्कि आपको हर पंक्ति में छिपे हुए अर्थ को ढ़ूँढ़ना पड़ेगा।

कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?

उत्तर: कवि ने एक नायिका के रूप में अपने जीवन के स्वप्न को अभिव्यक्त किया है। वह नायिका जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थी।



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