class 10 hindi sparsh sitaram seksaria diary ka ek panna ncert exercise solution

सीताराम सेकसरिया

डायरी का एक पन्ना

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए:

कलकत्तावासियों के लिए २६ जनवरी १९३९ का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?

उत्तर: २६ जनवरी १९३९ को कलकत्तावासी महात्मा गाँधी द्वारा घोषित आजादी की दूसरी सालगिरह मना रहे थे। इसलिए वह दिन उनके लिए महत्वपूर्ण था।

सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?

उत्तर: सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।


विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर: विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू को पुलिस ने पकड़ लिया तथा और लोगों को मारा और भगा दिया।

लोग अपने अपने मकानों तथा सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर क्या संकेत देना चाहते थे?

उत्तर: लोग अपने-अपने मकानों तथा सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर आजादी की भावना का संकेत देना चाहते थे।

पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?

उत्तर: पुलिस बड़े पार्कों तथा मैदानों को घेरकर ज्यादा लोगों के जमाव को रोकना चाहती थी, जिससे माहौल नियंत्रण में रहे।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर २५ – ३० शब्दों में लिखिए:

२६ जनवरी १९३९ को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई थी?

उत्तर: २६ जनवरी १९३९ को अमर बनाने के लिए मुख्य कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक लोगों को जुटाने की पूरी तैयारी की थी। इसके साथ ही जन-जन तक आजादी की भावना को पहुँचाने की कोशिश की थी। हर गली और हर मोहल्ले में जबरदस्त सजावट की गई थी। हर तरफ का माहौल जोश से भरा हुआ लगता था।

‘आज जो बात थी वह निराली थी’ किस बात से पता चल रहा है कि आज का दिन निराला था? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लोगों की तैयारी और उनका जोश देखते ही बनता था। एक तरफ पुलिस की पूरी कोशिश थी कि स्थिति उनके काबू में रहे, तो दूसरी ओर लोगों का जुनून पुलिस की कोशिश के आगे भारी पड़ रहा था। हर पार्क तथा मैदान में भारी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। जोश भरा माहौल बता रहा था कि वह दिन वाकई निराला था।

पुलिस कमिश्नर के नोटिस और काउंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?

उत्तर: पुलिस कमिश्नर की नोटिस सभा और आजादी के जश्न को रोकने के लिए थी। दूसरी तरफ काउंसिल की नोटिस लोगों का आह्वान कर रही थी कि वे भारी संख्या में आकर आजादी का उत्सव मनाएँ। दोनों नोटिस एक दूसरे के विरोधाभाषी थे।

धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

उत्तर: धर्मतल्ले के मोड़ पर पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ लिया तथा लाठी भी चलाई। कुछ लोग आगे बढ़ने में कामयाब हो गये। इस तरह वहाँ पर आकर जुलूस टूट गया।

डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देखभाल तो कर ही रहे थे, उनकी फोटो भी उतरवा रहे थी। फोटो उतारने की क्या वजह हो सकती है?

उत्तर: फोटो उतरवाने का एक ही मकसद हो सकता है। प्रेस में घायलों की फोटो जाने से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के स्वाधीनता संग्राम को प्रचार मिल सकता था। इसके साथ ही सरकार द्वारा अपनाई गई बर्बरता को भी दिखाया जा सकता था।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ५० – ६० शब्दों में लिखिए:

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

उत्तर: सुभाष बाबू के जुलूस में सुभाष बाबू को तो शुरु में ही पकड़ लिया गया था। उसके बाद स्त्रियों ने पूरी तरह से जुलूस को आगे बढ़ाने का जिम्मा ले लिया था। धर्मतल्ले के मोड़ पर ५० – ६० स्त्रियों ने धरना दे दिया। आखिर में करीब १०५ स्त्रियाँ पकड़ी गईं। जिस तरह से स्त्रियों ने जुलूस के तितर बितर होने के बाद भी मामले को आगे बढ़ाया उससे साफ जाहिर होता है कि स्त्रियों ने बखूबी उस दिन अपना योगदान दिया था।

जुलूस के लालबाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

उत्तर: लालबाजार आने पर ज्यादातर लोगों पर लाठियाँ चलाई गई। अधिकाँश लोगों को पकड़ लिया गया। बहुत से लोग घायल हुए। इस तरह से वहाँ पर जाकर जुलूस समाप्त हो गया।

“जब से कानून भंग का काम शुरु हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए एक ओपन लड़ाई थी”। यहाँ पर कौन से और किसके कानून के भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर: प्रस्तुत कथन में अंग्रेजों द्वारा लगाए गए प्रतिरोध को भंग करने की बात की गई है। पाठ में जिस तरह से आजादी के जोश का चित्रण हुआ है उससे स्पष्ट होता है कि उस माहौल में कानून भंग करना उचित था।

बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉक-अप में रखा गया, बहुत सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपाके विचार में ये सब अपूर्व क्यों है?

उत्तर: जैसा कि आखिरी पारा में वर्णन किया गया है, इसके पहले कलकत्ता में इतने बड़े पैमाने पर आजादी की लड़ाई में लोगों ने शिरकत नहीं की थी। उस दिन जनसमूह का बड़ा सैलाब कलकत्ता की बुरी छवि को कुछ हद तक धोने में कामयाब होता दिख रहा था। इसलिए लेखक को वह दिन अपूर्व लग रहा था।


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए:

आज जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।

उत्तर: उस सभा के पहले कलकत्ता में पहले कभी लोगों ने इतना बढ़ चढ़ कर स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा नहिं लिया था। इस कारण से कुछ लोग हमेशा कलकत्ता पर यह आरोप लगाते थे कि वहाँ के लोग गुलामी को ही पसंद करते हैं। लेकिन उस दिन जो कुछ हुआ उससे कलकत्ता के नाम पर लगा दाग धुलने में बहुत सहायता मिली होगी।

खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।

उत्तर: पुलिस और प्रशासन के मना करने के बावजूद लोगों ने उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। नौकरी जाने की परवाह किये बिना कई सरकारी मुलाजिमों ने भी अपनी शिरकत की इसलिए कहा गया है कि खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।



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