जाति, धर्म और लैंगिक मसले

NCERT Solution

प्रश्न 1. जीवन के उन विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव होता है या वे कमजोर स्थिति में होती हैं।

उत्तर: अभी भी महिलाओं को कई तरह के भेदभावों का सामना करना पड़ता है। इसके कुछ उदाहरण नीचे दिये गये हैं:


प्रश्न 2. विभिन्न तरह की सांप्रदायिक राजनीति का ब्यौरा दें और सबके साथ एक एक उदाहरण भी दें।

उत्तर: कुछ लोगों को लगता है कि उनका धर्म अन्य धर्मों की तुलना में श्रेयस्कर है। ऐसे लोग दूसरे धर्म के लोगों पर अपना वर्चस्व जमाने की कोशिश करते हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में असुरक्षा की भावना भर जाती है।

अक्सर संप्रदाय के नाम पर ध्रुवीकरण की कोशिश की जाती है। अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल भरने के लिये धार्मिक चिह्नों, धर्मगुरुओं और भावनात्मक अपीलों का इस्तेमाल होता है। कई बार सांप्रदायिकता इतना उग्र रूप ले लेती है कि सांप्रदायिक दंगे हो जाते हैं।

प्रश्न 3. बताइए कि भारत में किस तरह अभी भी जातिगत असमानताएँ जारी हैं।

उत्तर: आज भी भारत में जाति के आधार पर आर्थिक विसंगतियाँ देखने को मिलती हैं। ऊँची जाति के लोग अक्सर संपन्न होते हैं, पिछड़ी जाति के लोग बीच में आते हैं और दलित और आदिवासी अति गरीब होते हैं। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों में अति पिछड़ी जातियों का अनुपात अत्यधिक है।

प्रश्न 4. दो कारण बताएँ कि क्यों सिर्फ जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते।

उत्तर: अधिकतर निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार का चयन उस क्षेत्र के जातीय समीकरण के आधार पर तय होता है। लेकिन इस काम में राजनैतिक पार्टियों के बीच एक होड़ सी मच जाती है। इसके कारण आबादी बहुल वाली जाति के वोट कई पार्टियों में विभाजित हो जाते हैं। ऐसा कई बार होता है कि वर्तमान विधायक या सांसद अनुकूल जाति समीकरण के बावजूद चुनाव हार जाता है। इससे यह साबित होता है चुनावी नतीजे केवल जाति के आधार पर तय नहीं होते।

प्रश्न 5. भारत की विधायिकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या है?

उत्तर: संसद और विधान सभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत ही कम है। महिला विधायकों या सांसदों की संख्या 10% से अधिक नहीं है। लेकिन स्थानीय शासकीय निकायों में 33% आरक्षण के कारण महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार स्थानीय शासकीय निकायों लगभग 10 लाख महिलाएँ हैं।


प्रश्न 6. किन्हीं दो प्रावधानों का जिक्र करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाते हैं।

उत्तर: नीचे दिये गये प्रावधान भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाते हैं:

प्रश्न 7. जब हम लैंगिक विभाजन की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय होता है:

  1. स्त्री और पुरुष के बीच जैविक अंतर
  2. समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएँ
  3. बालक और बालिकाओं की संख्या का अनुपात
  4. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में महिलाओं को मतदान का अधिकार न मिलना

उत्तर: (b) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएँ

प्रश्न 8. भारत में यहाँ औरतों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है:

  1. लोकसभा
  2. विधानसभा
  3. मंत्रीमंडल
  4. पंचायती राज की संस्थाएँ

उत्तर: (d) पंचायती राज की संस्थाएँ


प्रश्न 9. सांप्रदायिक राजनीति के अर्थ संबंधी निम्नलिखित कथनों पर गौर करें। सांप्रदायिक राजनीति इस धारणा पर आधारित है कि:

  1. एक धर्म दूसरों से श्रेष्ठ है।
  2. विभिन्न धर्मों के लोग समान नागरिक के रूप में खुशी-खुशी साथ रह सकते हैं।
  3. एक धर्म के अनुयायी एक समुदाय बनाते हैं।
  4. एक धार्मिक समूह का प्रभुत्व बाकी सभी धर्मों पर कायम करने में शासन की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

इनमे से कौन से कथन सही या गलत हैं।

उत्तर: a - सही, b - गलत, c - सही, d - गलत

प्रश्न 10. भारतीय संविधान के बारे में इनमे से कौन सा कथन गलत है?

  1. यह धर्म के आधार पर भेदभाव की मनाही करता है।
  2. यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
  3. सभी लोगों को कोई भी धर्म मानने की आजादी देता है।
  4. किसी धार्मिक समुदाय में सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है।

उत्तर: यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।

प्रश्न 11. ..................पर आधारित सामाजिक विभाजन सिर्फ भारत में ही है।

उत्तर: जाति

प्रश्न 12. सूची 1 और सूची 2 का मेल कराएँ

सूची 1सूची 2
1. अधिकारों और अवसरों के मामले में स्त्री और पुरुष की बराबरी मानने वाला व्यक्ति(a) सांप्रदायिक
2. धर्म को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति(b) नारीवादी
3. जाति को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति(c) धर्मनिरपेक्ष
4. व्यक्तियों के बीच धार्मिक आस्था के आधार पर भेदभाव न करने वाला व्यक्ति(d) जातिवादी

उत्तर: 1 - b, 2 - a, 3 - d, 4 - c



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