क्लास 10 भूगोल

संसाधन

संसाधन: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये इस्तेमाल की जा सकती है, जिसे बनाने के लिए हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है; उसे संसाधन कहते हैं।

संसाधन के प्रकार:

संसाधन को विभिन्न आधारों पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है; जो नीचे दिये गये हैं:

  • उत्पत्ति के आधार पर: जैव और अजैव संसाधन
  • समाप्यता के आधार पर: नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य संसाधन
  • स्वामित्व के आधार पर: व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संसाधन
  • विकास के स्तर के आधार पर: संभावी, विकसित भंडार और संचित कोष



उत्पत्ति के आधार पर संसाधन के प्रकार

  • जैव संसाधन: जो संसाधन जैव मंडल से आते हैं उन्हें जैव संसाधन कहते हैं। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।
  • अजैव संसाधन: जो संसाधन निर्जीव पदार्थों से आते हैं उन्हें अजैव संसाधन कहते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।

समाप्यता के आधार पर संसाधन के प्रकार:

  • नवीकरण योग्य संसाधन: जिन संसाधनों को भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न किया जा सकता है उन्हें नवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, जीव जंतु, आदि।
  • अनवीकरण योग्य संसाधन: जिन संसाधनों को किसी भी प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न नहीं किया जा सकता है उन्हें अनवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: जीवाष्म ईंधन, धातु, आदि। इन संसाधनों के बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं इसलिए इनका नवीकरण नहीं किया जा सकता है। लेकिन इनमे से कुछ संसाधनों को पुन: चक्रीय किया जा सकता है, जैसे कि धातु। ठीक इसके विपरीत, जीवाष्म ईंधन को पुन: चक्रीय नहीं किया जा सकता है।

स्वामित्व के आधार पर संसाधनों के प्रकार:

  • व्यक्तिगत संसाधन: जो संसाधन निजी व्यक्तियों के अधीन होते हैं उन्हें व्यक्तिगत संसाधन कहते हैं। उदाहरण: किसी किसान की जमीन, घर, आदि।
  • सामुदायिक संसाधन: जो संसाधन किसी समुदाय या समाज के अधीन होते हैं उन्हें सामुदायिक संसाधन कहते हैं। उदाहरण: चारागाह, तालाब, पार्क, श्मशान, कब्रिस्तान, आदि।
  • राष्ट्रीय संसाधन: जो संसाधन किसी राष्ट्र के अधीन होते हैं उन्हें राष्ट्रीय संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सरकारी जमीन, सड़क, नहर, रेल, आदि।
  • अंतर्राष्ट्रीय संसाधन: जिन संसाधनों का नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहते हैं। किसी भी तट रेखा से 200 किमी के बाद का समुद्र किसी भी देश की सीमा के अंदर नहीं आता है। इस क्षेत्र का उपयोग करने से पहले किसी भी देश को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की अनुमति लेनी होती है।

विकास के स्तर के आधार पर संसाधन के प्रकार:

  • संभावी संसाधन: किसी भी देश या क्षेत्र में पाए जाने वाले वैसे संसाधन जिनका उपयोग नहीं किया गया है उन्हें संभावी संसाधन कहते हैं। गुजरात और राजस्थान में प्रचुर मात्रा में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा उपलब्ध है लेकिन अभी भी इनका उपयोग हम नहीं कर पा रहे हैं।
  • विकसित संसाधन: जिन संसाधनों का सर्वेक्षण हो चुका है और जिनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित हो चुकी है उन्हें विकसित संसाधन कहते हैं।
  • भंडार: वैसे संसाधन जो उपलब्ध हैं लेकिन उनका सही इस्तेमाल करने के लिए हमारे पास उचित टेकनॉलोजी नहीं है उन्हें भंडार कहते हैं। उदाहरण: जल का निर्माण ऑक्सीजन और हाइड्रिजन से होता है। हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के रूप में हो सकता है लेकिन उसके लिए हमारे पास उचित टेकनॉलोजी नहीं है।
  • संचित कोष: संचित कोष भी भंडार का हिस्सा है। इसके उपयोग के लिए टेक्नॉलोजी तो उपलब्ध है लेकिन अभी उसका इस्तेमाल सही ढंग से नहीं हो रहा है। उदाहरण: नदी के जल का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। लेकिन अभी भी यह काम सीमित पैमाने पर हो रहा है।

संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल

  • हमारे लिए संसाधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से कई समस्याएँ खड़ी हो गई हैं। कुछ उदाहरण नीचे दिये गये हैं।
  • जब संसाधन कुछ सीमित लोगों के हाथों में रहता है तो इससे दूसरे लोगों को तकलीफ होती है।
  • संसाधन के अंधाधुंध इस्तेमाल से पूरी दुनिया में कई समस्याएँ खड़ी हो गई हैं, जैसे कि ग्लोबल वार्मिंग, पारितंत्र पर खतरा, ओजोन लेयर में सुराख, आदि।
  • इसलिए सतत पोषणीय विकास के लिए संसाधन का समान रूप से वितरण जरूरी है।

सतत पोषणीय विकास

जब विकास इस तरह से हो कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और भविष्य की जरूरतों के साथ समझौता न हो तो इसे सतत पोषणीय विकास कहते हैं।

संसाधनों के सही इस्तेमाल और सतत पोषणीय विकास को ध्यान में रखते हुए 1992 में रियो डे जेनेरो में अर्थ समिट का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में एक सौ राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे और वे सब एजेंडा 21 के लिए सहमत हुए थे। इस एजेंडा में सतत पोषणीय विकास और संसाधन के सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इस एजेंडा में समान हितों, पारस्परिक जरूरतों और सम्मिलित जिम्मेदारियों के अनुसार विश्व सहयोग के द्वारा पर्यावरण की क्षति, गरीबी और रोगों से मुकाबला करने की बात की गई है।