क्लास 10 भूगोल

खनिज संसाधन

खनिज: खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप पदार्थ है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।

खनिजों के प्रकार

खनिज तीन प्रकार के होते हैं; धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिज।

  • धात्विक खनिज:
    • लौह धातु: लौह अयस्क, मैगनीज, निकेल, कोबाल्ट, आदि।
    • अलौह धातु: तांबा, लेड, टिन, बॉक्साइट, आदि।
    • बहुमूल्य खनिज: सोना, चाँदी, प्लैटिनम, आदि।
  • अधात्विक खनिज: अभ्रक, लवण, पोटाश, सल्फर, ग्रेनाइट, चूना पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर, आदि।
  • ऊर्जा खनिज: कोल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।

खनिज के भंडार:

आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में: इन शैलों में छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बड़े जमाव परत के रूप में पाये जाते हैं। इन शैलों में खनिजों का निर्माण तब होता है जब खनिज पिघली हुई अवस्था या गैसीय अवस्था में होता है। ऐसे में खनिज दरारों से होकर भूमि की ऊपरी सतह तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: टिन, जस्ता, लेड, आदि।

अवसादी चट्टानों में: इन चट्टानों में खनिज परतों में पाये जाते है। उदाहरण: कोयला, लौह अयस्क, जिप्सम, पोटाश लवण और सोडियम लवण, आदि।

धरातलीय चट्टानों के अपघटन के द्वारा: जब चट्टानों के घुलनशील अवयवों का अपरदन हो जाता है तो बचे हुए अपशिष्ट में खनिज रह जाता है। बॉक्साइट का निर्माण इसी तरह से होता है।

जलोढ़ जमाव के रूप में: इस तरह से बने हुए खनिज रेतीली घाटी की तली में और पहाड़ियों के आधार में पाये जाते हैं। ऐसे में वो खनिज मिलते हैं जिनका अपरदन जल द्वारा नहीं होता है। उदाहरण: सोना, चाँदी, टिन, प्लैटिनम, आदि।

महासागर के जल में: समुद्र में पाये जाने वाले ज्यादातर खनिज इतने विरल होते हैं कि ये आर्थिक महत्व के नहीं होते हैं लेकिन समुद्र के जल से साधारण नमक, मैग्नीशियम और ब्रोमीन निकाला जाता है।


लौह अयस्क

अच्छी क्वालिटी के लौह अयस्क में लोहे की अच्छी मात्रा होती है। मैग्नेटाइट को सबसे अच्छी क्वालिटी का लौह अयस्क माना जाता है। इसमें 70% लोहा होता है। अपने उत्तम चुम्बकीय गुण के कारण यह लोहा विद्युत उद्योग के लिये अच्छा माना जाता है। हेमाटाइट को मुख्य औद्योगिक लौह अयस्क माना जाता है। हेमाटाइट में 50 से 60% लोहा होता है।

Iron ore in India
Fig: Iron Ore in India

भारत में लौह अयस्क के मुख्य बेल्ट

उड़ीसा झारखंड बेल्ट: उड़ीसा के मयूरभंज और केंदुझर जिले की बादामपहाड़ की खानों में हाई ग्रेड का हेमाटाइट अयस्क मिलता है। झारखंड के सिंहभूम जिले के गुआ और नोआमुंडी की खानों में भी हेमाटाइट अयस्क मिलता है।

दुर्ग बस्तर चंद्रपुर बेल्ट: यह बेल्ट छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पड़ता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की बैलादिला पहाड़ियों में हाई ग्रेड का हेमाटाइट अयस्क मिलता है। इन पहाड़ियों में सुपर हाई ग्रेड हेमाटाइट अयस्क के 14 भंडार हैं। इन खानों के लोहे को विशाखापत्तनम के बंदरगाह से जापान और दक्षिण कोरिया तक निर्यात किया जाता है।

बेल्लारी चित्रदुर्ग चिकमगलूर बेल्ट: यह बेल्ट कर्णाटक में पड़ता है। पश्चिमी घाट में स्थित कुद्रेमुख की खानें शत प्रतिशत निर्यात के लिए उत्पादन करती है। यहाँ का लौह अयस्क स्लरी के रूप में पाइपलाइन के द्वारा मंगलोर के निकट के बंदरगाह तक भेजा जाता है।

महाराष्ट्र गोवा बेल्ट: इस बेल्ट में गोवा राज्य और महाराष्ट्र का रत्नागिरी जिला आता है। यहाँ के खानों के अयस्क अच्छी क्वालिटी के नहीं हैं। इन अयस्कों को मारमागाओ पोर्ट से निर्यात किया जाता है।


मैगनीज

मैगनीज का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील और फेरो-मैगनीज अयस्क के निर्माण में होता है। इसका इस्तेमाल ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक और पेंट बनाने में भी होता है।

manganese ore in different states of India
Fig: Manganese Ore in India

तांबा

तांबे का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक और रसायन उद्योग में होता है। मध्यप्रदेश की बालाघाट की खानों में भारत का 52% तांबा निकलता है। 48% शेअर के साथ राजास्थान तांबे का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। तांबे का उत्पादन झारखंड के सिंहभूम जिले में भी होता है।

अलमुनियम

अलमुनियम हल्का लेकिन मजबूत होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल कई चीजों को बनाने में होता है। बॉक्साइट के मुख्य भंडार अमरकंटक के पठार, मैकाल पहाड़ी और बिलासपुर कटनी के पठारी क्षेत्रों में हैं। बॉक्साइट का मुख्य उत्पादक उड़ीसा है जहाँ 45% बॉक्साइट का उत्पादन होता है। उड़ीसा में बॉक्साइट के मुख्य भंडार पंचपतमाली और कोरापुट जिले में हैं।

अभ्रक

अभ्रक एक ऐसा खनिज है जो पतली प्लेटों के कई लेयर से बना होता है। अभ्रक की शीट इतनी पतली हो सकती है कि कुछ सेंटिमीटर में ही हजारों शीटें आ सकती हैं। अभ्रक के पास उच्च डाई-इलेक्ट्रिक शक्ति, निम्न ऊर्जा ह्रास फैक्टर, इंसुलेशन प्रोपर्टी और हाई वोल्टेज से रेसिस्टेंस की शक्ति होती है। इसलिए अभ्रक को इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है।

अभ्रक के भंडार छोटानागपुर पठार के उत्तरी किनारों पर पाये जाते हैं झारखंड का कोडरमा गया हजारीबाग बेल्ट अभ्रक का मुख्य उत्पादक है। अभ्रक के अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक हैं राजस्थान का अजमेर और आंध्र प्रदेश का नेल्लोर।

खनन के दुष्प्रभाव

खनन एक घातक उद्योग है और यह बात मजदूरों और आस पास रहने वाले लोगों दोनों के लिए लागू होती है। खनिकों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है जहाँ नैसर्गिक रोशनी भी नहीं मिलती। खानों में हमेशा खान की छत गिरने, पानी भरने और आग लगने का खतरा रहता है। खान के आस पास के इलाकों में धूल की भारी समस्या होती है। खान से निकलने वाली स्लरी से सड़कों और खेतों को नुकसान पहुँचता है। इन इलाकों में घर और कपड़े ज्यादा जल्दी गंदे हो जाते हैं। खनिकों को सांस की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। खान वाले क्षेत्रों में सांस की बीमारी के केस अधिक होते हैं।

खनिजों का संरक्षण

खनिजों के बनने में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। जिस तेजी से हम खनिजों का इस्तेमाल कर रहे हैं उसकी तुलना में खनिजों का पुनर्रभरण की प्रक्रिया अत्यंत धीमी होती है। इसलिए खनिज संसाधन सीमित हैं और अनवीकरण योग्य हैं। इसलिए खनिजों का संरक्षन महत्वपूर्ण हो जाता है।