क्लास 10 इतिहास

एक ग्लोबल विश्व

दुनिया के विभिन्न देश व्यापार और विचारों तथा संस्कृति के आदान प्रदान के कारण एक दूसरे से आपस में जुड़े हुए हैं। आधुनिक युग में आपसी संपर्क तेजी से बढ़ा है लेकिन सिंधु घाटी की सभ्यता के युग में भी विभिन्न देशों के बीच आपसी संपर्क हुआ करता था।

सिल्क रूट

चीन को पश्चिमी देशों और अन्य देशों से जोड़ने वाला व्यापार मार्ग सिल्क रूट कहलाता है। उस जमाने में कई सिल्क रूट थे। सिल्क रूट ईसा युग की शुरुआत के पहले से ही अस्तित्व में था और पंद्रहवीं सदी तक बरकरार था।

इस सिल्क रूट से होकर चीन के बर्तन दूसरे देशों तक जाते थे। इसी प्रकार यूरोप से एशिया तक सोना और चाँदी इसी सिल्क रूट से आते थे।

सिल्क रूट के रास्ते ही ईसाई, इस्लाम और बौद्ध धर्म दुनिया के विभिन्न भागों में पहुँच पाए थे।

भोजन की यात्रा

नूडल चीन की देन है जो वहाँ से दुनिया के दूसरे भागों तक पहुँचा। भारत में हम इसके देशी संस्करण सेवियों को वर्षों से इस्तेमाल करते हैं। इसी नूडल का इटैलियन रूप है स्पैगेटी।




आज के कई आम खाद्य पदार्थ; जैसे आलू, मिर्च टमाटर, मक्का, सोया, मूँगफली और शकरकंद यूरोप में तब आए जब क्रिस्टोफर कोलंबस ने गलती से अमेरिकी महाद्वीपों को खोज निकाला।

आलू के आने से यूरोप के लोगों की जिंदगी में भारी बदलाव आए। आलू के आने के बाद ही यूरोप के लोग इस स्थिति में आ पाए कि बेहतर खाना खा सकें और अधिक दिन तक जी सकें। आयरलैंड के किसान आलू पर इतने निर्भर हो चुके थे कि 1840 के दशक के मध्य में किसी बीमारी से आलू की फसल तबाह हो गई तो कई लाख लोग भूख से मर गए। उस अकाल को आइरिस अकाल के नाम से जाना जाता है।

बीमारी, व्यापार और फतह

सोलहवीं सदी में यूरोप के नाविकों ने एशिया और अमेरिका के देशों के लिए समुद्री मार्ग खोज लिया था। नए समुद्री मार्ग की खोज ने न सिर्फ व्यापार को फैलाने में मदद की बल्कि विश्व के अन्य भागों में यूरोप की फतह की नींव भी रखी।

अमेरिका के पास खनिजों का अकूत भंडार था और इस महाद्वीप में अनाज भी प्रचुर मात्रा में था। अमेरिका के अनाज और खनिजों ने दुनिया के अन्य भाग के लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल दिया।

सोलहवीं सदी के मध्य तक पुर्तगाल और स्पेन द्वारा अमेरिकी उपनिवेशों की अहम शुरुआत हो चुकी थी। लेकिन यूरोपियन की यह जीत किसी हथियार के कारण नहीं बल्कि एक बीमारी के कारण संभव हो पाई थी। यूरोप के लोगों पर चेचक का आक्रमण पहले ही हो चुका था इसलिए उन्होंने इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधन क्षमता विकसित कर ली थी। लेकिन अमेरिका तब तक दुनिया के अन्य भागों से अलग थलग था इसलिए अमेरिकियों के शरीर में इस बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरोधन क्षमता नहीं थी। जब यूरोप के लोग वहाँ पहुँचे तो वे अपने साथ चेचक के जीवाणु भी ले गए। इस का परिणाम यह हुआ कि चेचक ने अमेरिका के कुछ भागों की पूरी आबादी साफ कर दी। इस तरह यूरोपियन आसानी से अमेरिका पर जीत हासिल कर पाए।

उन्नीसवीं सदी तक यूरोप में कई समस्याएँ थीं; जैसे गरीबी, बीमारी और धार्मिक टकराव। धर्म के खिलाफ बोलने वाले कई लोग सजा के डर से अमेरिका भाग गए थे। उन्होंने अमेरिका में मिलने वाले अवसरों का भरपूर इस्तेमाल किया और इससे उनकी काफी तरक्की हुई।

अठारहवीं सदी तक भारत और चीन दुनिया के सबसे धनी देश हुआ करते थे। लेकिन पंद्रहवीं सदी से ही चीन ने बाहरी संपर्क पर अंकुश लगाना शुरु किया था और दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग थलग हो गया था। चीन के घटते प्रभाव और अमेरिका के बढ़ते प्रभाव के कारण विश्व के व्यापार का केंद्रबिंदु यूरोप की तरफ शिफ्ट कर रहा था।


उन्नीसवीं शताब्दी (1815 – 1914)

उन्नीसवीं सदी में दुनिया तेजी से बदल रही थी। इस अवधि में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी के क्षेत्र में बड़े जटिल बदलाव हुए। उन बदलावों की वजह से विभिन्न देशों के रिश्तों के समीकरण में अभूतपूर्व बदलाव आए।

अर्थशास्त्री मानते हैं कि आर्थिक आदान प्रदान तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं:

  • व्यापार का आदान प्रदान
  • श्रम का आदान प्रदान
  • पूँजी का आदान प्रदान

वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण

यूरोप में भोजन के उत्पादन और उपभोग का बदलता स्वरूप: पारंपरिक तौर से हर देश भोजन के मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहता है। लेकिन यूरोप में आत्मनिर्भर होने का मतलब था लोगों के लिए घटिया क्वालिटी का भोजन मिलना।

अठाहरवीं सदी में यूरोप की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई। इसके कारण भोजन की माँग में भी भारी इजाफा हुआ। जमींदारों के दबाव के कारण सरकार ने मक्के के आयात पर कड़े नियंत्रण लगा दिए थे। इससे ब्रिटेन में भोजन की कीमतें और बढ़ गईं। इसके बाद उद्योगपतियों और शहरी लोगों ने सरकार को कॉर्न लॉ समाप्त करने के लिए बाधित कर दिया।

कॉर्न लॉ हटने के प्रभाव:

कॉर्न लॉ के हटने का मतलब था कि ब्रिटेन में जिस भाव पर भोजन का उत्पादन होता था उससे कहीं सस्ते दर पर उसे आयात किया जा सकता था। ब्रिटेन के किसानों द्वारा उगाए जाने वाले अनाज इस स्थिति में नहीं थे कि सस्ते आयात के आगे टिक सकें।

खेती की जमीन का एक बड़ा हिस्सा खाली छोड़ दिया गया और लोग भारी संख्या में बेरोजगार हो गए। लोग एक बड़ी संख्या में काम कि तलाश में शहरों की ओर पलायन करने लगे। कई लोग विदेशों की तरफ भी पलायन कर गए।

गिरते दामों की वजह से ब्रिटेन में खाने पीने की चीजों की माँग बढ़ने लगी। साथ में औद्योगीकरण से लोगों की आमदनी भी बढ़ने लगी। इसके परिणामस्वरूप ब्रिटेन को और भोजन आयात करने की जरूरत पड़ने लगी। इस माँग को पूरा करने के लिए पूर्वी यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया में जमीन का एक बड़ा भाग साफ किया जाने लगा।

अनाज को बंदरगाहों तक सही समय पर पहुँचाना भी जरूरी हो गया था। इसके लिए रेल लाइनें बिछाई गईं ताकि खेत से अनाज को सीधा बंदरगाहों तक पहुँचाया जा सके। खेत पर काम करने के लिए आसपास नई आबादी बसाने की जरूरत भी महसूस हुई। इन सब जरूरतों को पूरा करने के लिए लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों से इन भागों तक पूँजी भी आने लगी।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में मजदूरों की कमी पड़ रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए भारी संख्या में लोग पलायन करके वहाँ पहुँचने लगे। उन्नीसवीं सदी में लगभग पाँच करोड़ लोग यूरोप से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पहुँच चुके थे। इस दौरान पूरी दुनिया के विभिन्न भागों से लगभग 15 करोड़ लोगों का पलायन हुआ। 1890 का दशक आते-आते कृषी क्षेत्र में एक वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण हो चुका था। इसके साथ श्रम के प्रवाह, पूँजी के प्रवाह और तकनीकी बदलाव के क्षेत्र में बड़े ही जटिल परिवर्तन हुए।


तकनीक की भूमिका

इस दौरान विश्व की अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण में टेकनॉलोजी ने एक अहम भूमिका निभाई। इस युग के कुछ मुख्य तकनीकी खोज हैं रेलवे, स्टीम शिप और टेलिग्राफ। रेलवे ने बंदरगाहों और आंतरिक भूभागों को आपस में जोड़ दिया। स्टीम शिप के कारण माल को भारी मात्रा में अतलांतिक के पार ले जाना आसान हो गया। टेलीग्राफ की मदद से संचार व्यवस्था में तेजी आई और इससे आर्थिक लेन देन बेहतर रूप से होने लगे।

मीट का व्यापार: मीट का व्यापार इस बात का बहुत अच्छा उदाहरण है कि नई टेक्नॉलोजी से किस तरह आम आदमी का जीवन बेहतर हो जाता है। 1870 के दशक तक जानवरों को जिंदा ही अमेरिका से यूरोप ले जाया जाता था। जिंदा जानवरों को जहाज से ले जाने में कई परेशानियाँ होती थीं। वे ज्यादा जगह लेते थे और कई जानवर रास्ते में बीमार हो जाते थे या मर भी जाते थे। इसके कारण यूरोप के ज्यादातर लोगों के लिए मीट एक विलासिता की वस्तु ही थी।

रेफ्रिजरेशन टेक्नॉलोजी ने तस्वीर बदल दी। अब जानवरों को अमेरिका में हलाल किया जा सकता था और प्रोसेस्ड मीट को यूरोप ले जाया जा सकता था। इससे शिप में उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल संभव हो पाया। इससे यूरोप में मीट अधिक मात्रा में उपलब्ध होने लगा और कीमतें गिर गईं। अब आम आदमी भी नियमित रूप से मीट खा सकता था।

लोगों का पेट भरा होने के कारण देश में सामाजिक शाँति आ गई। अब ब्रिटेन के लोग देश की उपनिवेशी महात्वाकाँछा को गले उतारने को तैयार लगने लगे।