मूर्ख गदहा

एक शेर अपने सेवक सियार के साथ रहता था। शेर शिकार करता था और उसमे से बचा खुचा खाकर सियार अपना जीवन यापन करता था। उसके बदले में सियार उस शेर को तरह तरह की सेवाएं देता था। एक दिन एक हाथी के साथ हुई लड़ाई में वह शेर बुरी तरह घायल हो गया। इसके बाद शेर इतना कमजोर हो गया कि शिकार भी नहीं कर पाता था। परिणामस्वरूप, सियार को भी भूखमरी का सामना करना पड़ा।

एक दिन सियार को जोरों की भूख लग रही थी। उसने शेर से कहा कि कोई शिकार करे। शेर ने जवाब दिया, “मुझमे अब इतनी ताकत नहीं की किसी जानवर का पीछा कर सकूँ। यदि तुम किसी जानवर को अपनी बातों में उलझाकर मेरी गुफा के पास ले आओ तो मैं उसे मार सकता हूँ।”

donkey with jackal

सियार किसी मूर्ख जानवर की खोज में निकल पड़ा जिसे आसानी से गुफा तक लाया जा सके। कुछ देर चलने के बाद उसे एक खेत में एक गदहा चरता हुआ मिला। उसने गदहे से सहानुभूति दिखाई और पूछा कि गदहा इतना कमजोर क्यों है। गदहे ने बताया कि उसका मालिक; एक धोबी; बड़ा ही क्रूर है। वह हमेशा यातना देता है और ठीक से खाने भी नहीं देता। सियार ने गदहे से कहा कि वह एक ऐसी जगह के बारे में जानता है जहाँ हरी-हरी घास है और तीन गदही भी हैं। ऐसा सुनकर वह गदहा तुरंत ही उस सियार के संग चलने को तैयार हो गया।

जैसे ही वे उस गुफा के पास पहुंचे, शेर गदहे पर टूट पड़ा। गदहा किसी तरह से अपनी जान बचाकर भागा। गदहे के भाग जाने पर सियार ने शेर का मजाक उड़ाया। थोड़ी देर बहस लड़ाने के बाद, सियार फिर से गदहे को लिवा लाने को तैयार हो गया।

जब गदहे ने दोबारा उस सियार को आते देखा तो उसपर बहुत गुस्सा हुआ। लेकिन सियार ने कहा, “जिसे तुमने शेर समझ लिया था, वह तो गदही है। तुम जैसे आकर्षक गदहे को देखकर वह अपने आप को रोक नहीं पाई और तुमपर टूट पड़ी।” गदहे अपनी मूर्खता के लिए प्रसिद्द होते हैं। वह गदहा सियार की बातों में आ गया और फिर से उसके संग चला गया। इस बार शेर ने कोई गलती नहीं की और सियार के साथ जमकर पार्टी की।

इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि सही बुद्धि लगाने से दोबारा भी मौक़ा मिलता है।



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