अपूर्व अनुभव

तेत्सुको कुरियानागी

इस कहानी को तेत्सुको कुरियानागी ने लिखा है। उन्होने इस कहानी में बड़ी ही सरलता से बहुत बड़े मुद्दे के बारे में बात की है। तोमोए नामक स्थान पर हर बच्चे का अपना एक पेड़ होता है जिसपर वह चढ़कर अपने आस-पास की दुनिया को एक अलग नजरिये से देखता है। आज भी ग्रामीण इलाकों के बच्चों को इस तरह पेड़ पर चढ़कर खेलने के मौके मिलते हैं। इस कहानी में तोत्तो-चान नाम की एक लड़की है जिसका दोस्त यासुकी-चान पोलियो से ग्रसित है। पोलियो से ग्रसित होने के कारण यासुकी-चान ठीक से चल फिर नहीं पाता है। लेकिन तोत्तो-चान को लगता है कि यासुकि चान को भी पेड़ पर चढ़कर उस सुख को महसूस करना चाहिए। जिस बच्चे के लिए चलना-फिरना भी दुश्वार हो उसके लिए पेड़ पर चढ़ने के बारे में सोचना भी दुष्कर है। लेकिन तोत्तो-चान एक तिपाई सीढ़ी लाती है और यासुकी-चान की हर संभव मदद करती है ताकि वह पेड़ पर चढ़ पाये। काफी मेहनत के बाद आखिर में यासुकी-चान पेड़ पर चढ़ने में सफल हो जाता है। पेड़ पर चढ़ने के बाद दोनों काफी देर तक इधर उधर की बातें करते हैं।


पाठ से

प्रश्न 1: यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने के लिए तोत्तो-चान ने अथक प्रयास क्यों किया? लिखिए।

उत्तर: तोत्तो-चान को लगता है कि यासुकी-चान को भी हर वह खेल खेलने का हक है तो सामान्य बच्चे खेलते हैं। तोत्तो-चान को यह भी लगता है कि उसे हर हाल में अपने दोस्त की मदद करनी चाहिए। अपने दोस्त को पेड़ पर चढ़ने के रोमांच का अनुभव कराने के उद्देश्य से तोत्तो-चान ने अथक प्रयास किया।

प्रश्न 2: दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोत्तो-चान और यासुकी-चान को अपूर्व अनुभव मिला, इन दोनों के अपूर्व अनुभव कुछ अलग-अलग थे। दोनों में क्या अंतर रहे? लिखिए।

उत्तर: तोत्तो-चान तो रोज पेड़ पर चढ़ती थी। इसलिए उसके लिए पेड़ पर चढ़ना कोई बड़ी बात नहीं थी। उसे तो इस बात से खुशी मिल रही थी कि उसके प्रयासों के कारण यासुकी-चान पेड़ पर चढ़ पाया था। यासुकी-चान के लिये वह पेड़ पर चढ़ने का पहला और आखिरी मौका था। उसे तो लग रहा होगा कि वह सातवें आसमान पर पहुँच चुका है। उसके लिए पेड़ पर चढ़ना एक अनोखा अनुभव है।

प्रश्न 3: पाठ में खोजकर देखिए-कब सूरज का ताप यासुकी-चान और तोत्तो-चान पर पड़ रहा था, वे दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे और कब बादल का एक टुकड़ा उन्हें छाया देकर कड़कती धूप से बचाने लगा था। आपके अनुसार इस प्रकार परिस्थिति के बदलने का कारण क्या हो सकता है?

उत्तर: जब यासुकी-चान पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, और जब तोत्तो-चान उसकी तरह तरह से मदद कर रही थी तब तेज धूप से दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे। जब यासुकी-चान उस दोशाखा पर चढ़ गया तब एक बादल के टुकड़े ने उन्हें छाया प्रदान की। बादल हवा के कारण घूमते रहते हैं। इससे कहीं धूप तो कहीं छाया होती है।


प्रश्न 4: ‘यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह ............अंतिम मौका था।‘ इस अधूरे कथन को पूरा कीजिए और लिखकर बताइए कि लेखिका ने ऐसा क्यों लिखा होगा?

उत्तर: ‘यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका था।‘ यासुकी-चान पोलियो से ग्रसित है। उसके लिए तो एक-एक कदम चलना ही बहुत मुश्किल काम है। इसलिए उसके लिए पेड़ पर चढ़ने के बारे में सोचना भी दुश्वार है। इसलिए लेखिका ने ऐसा लिखा है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1: अपनी माँ से झूठ बोलते समय तोत्तो-चान की नजरे नीची क्यों थीं?

उत्तर: अक्सर जब कोई झूठ बोलता है तो वह आँखों में आँखें डालकर बात नहीं कर सकता। लोग अक्सर झूठ बोलते समय नजरें चुराते हैं। तोत्तो-चान भी अपनी माँ से झूठ बोलते समय यही कर रही थी।

प्रश्न 2: यासुकी-चान जैसे शारीरिक चुनौतियों से गुजरने वाले व्यक्तियों के लिए चढ़ने उतरने की सुविधाएँ हर जगह नहीं होतीं। लेकिन कुछ जगहों पर ऐसी सुविधाएँ दिखाई देती हैं। उन सुविधावाली जगहों की सूची बनाइए।

उत्तर: दिल्ली में मेट्रो रेल के स्टेशन और प्लेटफॉर्म पर पहुँचने के लिए रैंप और लिफ्ट बने हुए हैं।




Copyright © excellup 2014