भोर और बरखा

मीरा बाई

जागो बंसीवारे ललना, जागो मोरे प्यारे।
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे।
गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे।
उठो लाल जी, भोर भयो है, सुर-नर ठाढ़े द्वारे।
ग्वा-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै।
माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै।

इस कविता में मीरा ने सुबह का वर्णन किया है जब यशोदा मैया कृष्ण को जगाने की कोशिश कर रही हैं। यशोदा कह रही हैं कि रात बीत चुकी है, सुबह हो गई है और घर-घर के दरवाजे खुल चुके हैं। गोपियाँ दही मथने लगी हैं जिसके कारण उनकी चूड़ियों की झनकार सुनाई दे रही है। वह फिर कहती हैं कि दरवाजे पर सुर और नर खड़े हैं, और कृष्ण के ग्वाल-बाल मित्र जय-जय करते हुए कोलाहल कर रहे हैं। ग्वाले गायों को चराने जाने की तैयारी में अपने-अपने हाथों में मक्खन-रोटी ले चुके हैं। मीरा कहती हैं कि भगवान कृष्ण अपने शरण में आने वाले हर किसी पर उपकार करते हैं।


बरसे बदरिया सावन की, सावन की, मन-भावन की।
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।
उमड़-घुमड़ चहुंदिस से आया, दामिन दमकै झर लावन की।
नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आनंद मंगल गावन की।

इस कविता में मीरा ने वर्षा ऋतु का वर्णन किया है। सावन में जब बादलों से बारिश होने लगती है तो मौसम सुहाना हो जाता है। सावन के आते ही मीरा के मन में उमंग उठने लगते हैं जैसा कि कृष्ण के आने की सूचना से होता है। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़ कर आते हैं और बिजली चमक चमक कर बारिश के आने की सूचना देती है। ऐसे में रिमझिम बारिश होने लगती है और सुहानी ठंडी हवा चलने लगती है। ऐसे में मीरा का मन होता है कि अपने प्रभु की आराधना में मंगल गान शुरु कर दें।


कविता से

प्रश्न 1: ‘बंसीवरे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं?

उत्तर: यशोदा कृष्ण को जगाने का प्रयास करती हैं। वह बताती हैं कि भोर हो चुकी है और घर-घर के दरवाजे खुल चुके हैं। गोपियाँ दही मथने लगी हैं। ग्वाल बाल इंतजार कर रहे हैं और अपने हाथों में मक्खन-रोटी ले चुके हैं।

प्रश्न 2: नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए:

‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गौवन के रखवारे।‘

उत्तर: ग्वाल-बाल सारा दिन गायों को चराने के लिए घर से बाहर रहेंगे। ऐसे में दिन में उन्हें भोजन की जरूरत पड़ेगी। इसलिए उन्होंने मक्खन-रोटी अपने हाथों में ले ली है।

प्रश्न 3: पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: ब्रज में सुबह होते ही हर घर के दरवाजे खुल जाते हैं। गोपियाँ सुबह-सुबह ही मक्खन निकालना शुरु कर देती हैं। चारों तरफ से ग्वाल-बाल का कोलाहल सुनाई देने लगता है। वे दिन में खाने के लिए मक्खन-रोटी ले लेते हैं।

प्रश्न 4: मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा?

उत्तर: सावन आने पर मीरा को लगता है कि कृष्ण के आगमन की सूचना आई है। इसलिए मीरा को सावन मनभावन लगने लगता है।

प्रश्न 5: पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: सावन में बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़ कर आते हैं। बिजली चमकने लगती है और रिमिझिम बारिश शुरु हो जाती है। ऐसे में ठंडी और सुहानी हवा बहने लगती है।

कुछ करने को

कृष्ण को ‘गिरधर’ क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कौन सी कथा है? पता कीजिए और कक्षा में बताइए।

उत्तर: ब्रज के ग्वाले भगवान इंद्र की पूजा करते हैं। लेकिन कृष्ण का मानना है कि उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि गोवर्धन पर्वत से ब्रज के लोगों को ढ़ेर सारे संसाधन प्राप्त होते हैं। कृष्ण की बात मानकर जब ब्रज के निवासी गोवर्धन की पूजा करते हैं तो यह देखकर इन्द्र नाराज हो जाते हैं। गुस्से में वे ब्रज पर तेज बारिश के रूप में प्रलय लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कृष्ण अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को हवा में उठा लेते हैं और ब्रज के निवासियों से उसके नीचे आश्रय लेने की सलाह देते हैं। इस तरह से ब्रज के निवासी उस प्रलयंकारी बारिश से बच जाते हैं। यह देखकर इंद्र का घमंड चूर-चूर हो जाता है और वह कृष्ण से क्षमा मांगते हैं। गोवर्धन पर्वत को उठाने के कारण कृष्ण का नाम गिरधर पड़ा।




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