दादी माँ

शिव प्रसाद सिंह

सारांश

इस कहानी में लेखक ने अपनी दादी के बारे में लिखा है। लेखक की दादी ममता की मूरत थीं। दादी हमेशा जरूरतमंदों की मदद करती थीं। दादी को कई बीमारियों के घरेलू इलाज का अच्छा ज्ञान था जिसका लाभ गाँव के हर किसी को मिलता था। दादी जीवन के कई उतार चढ़ाव देख चुकी थीं, इसलिए उन्हें यह पता था कि परिवार को कठिन परिस्थितियों से कैसे निकाला जाए। दादी को दुनियादारी की अच्छी समझ थी।

कहानी से

प्रश्न 1: लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की और किन-किन बातों की याद आ जाती है?

उत्तर: लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की कई अन्य बातें याद आती हैं। लेखक को याद आता है कि किस तरह दादी ने एक गरीब महिला की (उसकी बेटी की शादी के समय) मदद की थी। लेखक को याद आता है कि किस तरह गाँव के बच्चे बाढ़ के जाने के बाद पानी में कूद कूद कर नहाया करते थे। लेखक को याद आता है कि कैसे दादी ने उसे महिलाओं के संगीत के समय छुपाकर उसी कमरे में सुला दिया था।


प्रश्न 2: दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी?

उत्तर: दादा की मृत्यु के बाद कुछ मित्रों और रिश्तेदारों ने उसके परिवार के साथ धोखा किया। कई लोगों ने उधार में लिया हुआ पैसा समय पर नहीं लौटाया। दादा के श्राद्ध में लेखक के पिता ने अत्यधिक व्यय किया था। इन कारणों से दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।

प्रश्न 3: दादी माँ के स्वभाव का कौन सा पक्ष आपको सबसे अच्छा लगता है और क्यों?

उत्तर: मुझे दादी माँ की सरलता और सहजता सबसे अच्छी लगती है। लगता है कि दादी के पास हर समस्या का समाधान चुटकियों में मिल जाता है। कोई बीमार हो, किसी को पैसे की जरूरत हो या फिर कोई और संकट आन पड़ा हो, दादी बड़े आराम से इन सबसे निपटने को तैयार लगती हैं।

कहानी से आगे

प्रश्न 1: आपने इस कहानी में महीनों के नाम पढ़ए, जैसे – क्वार, आषाढ़, माघ। इन महीनों में मौसम कैसा रहता है, लिखिए।

उत्तर: क्वार के महीने में तेज धूप निकलती है और नमी बहुत रहती है। इस महीने में पसीना सूखने का नाम ही नहीं लेता है। आषाढ़ में तेज बारिश होती है। माघ के महीने में जाड़ा पड़ता है।

प्रश्न 2: ‘अपने-अपने मौसम की अपनी-अपनी बातें होती हैं’ – लेखक के इस कथन के अनुसार यह बताइए कि किस मौसम में कौन-कौन सी चीजें विशेष रूप से मिलती हैं?

उत्तर: वर्षा ऋतु की शुरुआत होते ही रसीले आम बाजार में बिकने लगते हैं। यही वह मौसम होता है जब हम लीची और जामुन का आनंद लेते हैं। जब जाड़ा ठीक से पड़ने लगता है तो नये कटे हुए धान का चिउड़ा और गुड़ का स्वाद लेने का मौका मिलता है। जाड़े का मौसम समाप्त होने के बाद लोग गुड़ और तिल की पट्टी खाना पसंद करते हैं।


अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1: इस कहानी में कई बार ऋण लेने की बात आपने पढ़ी। अनुमान लगाइए, किन-किन पारिवारिक परिस्थितियों में गाँव के लोगों को ऋण लेना पड़ता होगा और यह उन्हें कहाँ से मिलता होगा? बड़ों से बातचीत कर इस विषय में लिखिए।

उत्तर: लोगों को शादी विवाह, मुंडन, श्राद्ध आदि के आयोजन के लिए ऋण की जरूरत पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है कि ऐसे आयोजनों में खर्च बहुत बढ़ जाता है। गाँवों में लोग अक्सर अपने मित्र या रिश्तेदार से ऋण लेते हैं। कई बार लोगों को गाँव के सेठ-साहूकार या फिर जमींदार से भी ऋण लेना पड़ता है।

प्रश्न 2: घर पर होनेवाले उत्सवों / समारोहों में बच्चे क्या-क्या करते हैं? अपने और अपने मित्रों के अनुभवों के आधार पर लिखिए।

उत्तर: घर पर होनेवाले समारोहों में बच्चे अक्सर ऊधम मचाते हैं। पिछले वर्ष अपने मामा की शादी में मैं अपने ननिहाल गया था। मेरी उम्र के बच्चों के साथ मिलकर एक दिन तो मैं खेतों का चक्कर लगाता रहा। शादी में आये कई रिश्तेदारों ने मुझे रुपये दिये थे। इसलिए मैं बार बार लेमनचूस और टॉफी खरीदने निकल जाया करता था। शाम में कई बच्चे मिलकर हलवाई का काम देखने में मग्न थे। जब मंडप को सजाया जाना था तो हम सबने कागज की रंग बिरंगी तिलंगियाँ बनाई।




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