संघर्ष के कारण मैं तुनकमिजाज हो गया

धनराज पिल्लै

यह एक साक्षात्कार का संपादित अंश है जिसे विनीता पांडे ने लिया था। इस साक्षात्कार में धनराज पिल्लै के निजी जीवन के बारे में जानने की कोशिश की गई है। धनराज पिल्लै भारत के मशहूर हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं। इस साक्षात्कार में बताया गया है कि धनराज पिल्लै का बचपन गरीबी में बीता था। उनके पास अपनी हॉकी स्टिक खरीदने तक के पैसे नहीं थे। जब धनराज पिल्लै ने मुम्बई में हॉकी खेलना शुरु किया तो बड़ी जल्दी उनकी धाक जम गई। फिर जब ऑलविन एशिया कप की कैंप के लिए उनका चयन हुआ तो उनके हॉकी करैयर की सही शुरुआत हुई। धनराज पिल्लै तुनकमिजाज किस्म के व्यक्ति हैं लेकिन अपनी गलतियों पर क्षमा माँगने में उन्हें देर नहीं लगती है। धनराज पिल्लै बड़ी सरलता से अपनी कमजोरियों को बता देते हैं, जिससे पता चलता है कि सफलता का शिखर छूने के बाद भी वे जमीन से जुड़े हुए हैं।


साक्षात्कार से

प्रश्न 1: साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है?

उत्तर: धनराज पिल्लै एक तुनकमिजाज व्यक्ति हैं लेकिन अपनी गलतियों पर क्षमा माँगने में उन्हें देर नहीं लगती है। वे बहुत जुझारु किस्म के व्यक्ति हैं। सफलता का शिखर छूने के बावजूद वे जमीन से जुड़े हुए हैं।

प्रश्न 2: धनराज पिल्लै ने जमीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बचपन में धनराज पिल्लै मणिपुर में हॉकी खेलते थे। उनके पास हॉकी स्टिक न होने के कारण उनकी बारी तब आती थी जब कोई दूसरा खिलाड़ी उन्हें अपनी हॉकी स्टिक देता था। फिर उनके बड़े भाई की पुरानी स्टिक मिलने से उन्हें काफी तसल्ली मिली। अपने भाई के साथ 1985 में मुम्बई आने के बाद उनकी हॉकी के खेल में और निखार आया। राष्ट्रीय खेलों के लिए जब वे दिल्ली पहुँचे तो पहली बार एस्टो टर्फ पर खेलने का मौका मिला। उसके बाद उन्होंने एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ीं। फिर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी।

प्रश्न 3: ‘मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है’ – धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?

उत्तर: जब सफलता किसी के सिर चढ़ने लगती है तो उस व्यक्ति के लिए बहुत बुरा होता है। उसके अंदर घमंड भर जाता है और फिर वह बरबादी के कगार पर पहुँच जाता है। इसलिए सफलता को विनम्रता से सँभालने की जरूरत होती है।


साक्षात्कार से आगे

प्रश्न 1: ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।

उत्तर: ध्यानचंद हॉकी के एक महान खिलाड़ी थे जिन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व कई महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धाओं में किया था। कहा जाता है कि एक बार जब गेंद ध्यानचंद के पास आती थी तो लगता था कि उनकी हॉकी स्टिक में कोई चुम्बक लगा हुआ है जिसकी वजह से दूसरा खिलाड़ी उनसे गेंद नहीं छीन पाता था। वे बड़ी कलात्मकता से सभी बाधाओं को पार कर गोल कर देते थे। इसलिए ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

प्रश्न 2: किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?

उत्तर: भारत की हॉकी टीम ने 1920 से लेकर 1950 के दशक तक अपने खेल से पूरे विश्व को मंत्रमुग्ध कर दिया था और सफलता के नये नये कीर्तिमान गढ़े थे। इसलिए हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

प्रश्न 3: आप समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में छपे हुए साक्षात्कार पढ़ें और अपनी रुचि से किसी व्यक्ति को चुनें, उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर कुछ प्रश्न तैयार करें और साक्षात्कार करें।

उत्तर: आप किसी खिलाड़ी से उसके बचपन के बारे में पूछ सकते हैं। आप उसके संघर्ष के दिनों के बारे में पूछ सकते हैं। आप यह पूछ सकते हैं कि सफल होने के बाद उनके जीवन में क्या क्या बदलाव आये।




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