पानी और धूप

सुभद्रा कुमारी चौहान

अभी अभी थी धूप, बरसने
लगा कहाँ से यह पानी
किसने फोड़ घड़े बादल के
की है इतनी शैतानी।

इस कविता में सुभद्रा कुमारी चौहान ने ऐसे मौसम का वर्णन किया है जब घने बादल आ जाते हैं, बिजली चमकने लगती है और फिर तेज वर्षा होने लगती है। इस कविता में माँ बेटी के बीच संवाद चल रहा है। छोटी बच्ची पूछती है कि अभी तो तेज धूप थी फिर किसने शरारत में बादल के घड़े फोड़ दिये जिससे पानी बरसने लगा।

सूरज ने क्यों बंद कर दिया
अपने घर का दरवाजा
उसकी माँ ने भी क्या उसको
बुला लिया कहकर आजा।

बच्ची पूछती है कि सूरज ने अपने घर का दरवाजा क्यों बंद कर दिया। ऐसा लगता है कि सूरज की माँ ने उसे वापस घर बुला लिया है।


जोर-जोर से गरज रहे हैं
बादल हैं किसके काका
किसको डाँट रहे है, किसने
कहना नहीं सुना माँ का।

बादल काका जोर-जोर से गरज कर किसको डाँट रहे हैं। लगता है किसी बच्चे ने अपनी माँ का कहना नहीं सुना है।

बिजली के आँगन में अम्माँ
चलती है कितनी तलवार
कैसी चमक रही है फिर भी
क्यों खाली जाते हैं वार।

बच्ची पूछती है कि बिजली के आँगन में इतनी तलवारें क्यों चल रही हैं। बच्ची को आश्चर्य हो रहा है कि इतनी तलवारें चल रही हैं फिर भी उनके वार खाली क्यों जा रहे हैं।

क्या अब तक तलवार चलाना
माँ वे सीख नहीं पाए
इसीलिए क्या आज सीखने
आसमान पर हैं आए।

लगता है कि बिजली के बच्चे अब तक तलवार चलाना नहीं सीख पाए हैं। इसलिए वे आज अभ्यास के लिए आसमान पर आए हैं।

एक बार भी माँ यदि मुझको
बिजली के घर जाने दो
उसके बच्चों को तलवार
चलाना सिखला आने दो।

बच्ची कहती है कि माँ उसे बिजली के घर जाने की अनुमति दे दे ताकि वह बिजली के बच्चों को तलवार चलाना सिखा दे।

खुश होकर तब बिजली देगी
मुझे चमकती सी तलवार
तब माँ कोई कर न सकेगा
अपने ऊपर अत्याचार

बच्ची को यह आशा है कि बिजली खुश होकर उसे चमकती तलवार दे देगी। उसके बाद बच्ची और उसके परिवार उसके समाज पर कोई अत्याचार नहीं कर पाएगा।

पुलिसमैन अपने काका को
फिर न पकड़ने आएँगे।
देखेंगे तलवार दूर से ही
वे सब डर जाएँगे।

जब बच्ची को तलवार मिल जाएगी तो पुलिस वाले उसके काका को पकड़ने नहीं आएंगे क्योंकि तलवार देखकर वे दूर से ही डर जाएँगे।

अगर चाहती हो माँ काका
जाएँ अब न जेलखाना
तो फिर बिजली के घर मुझको
तुम जल्दी से पहुँचाना।

बच्ची कहती है कि यदि माँ यह चाहती है कि काका कभी जेल न जाएँ तो वह बच्ची को जल्दी से बिजली के घर पहुँचा दे।

काका जेल न जाएँगे अब
तुझे मँगा दूँगी तलवार
पर बिजली के घर जाने का
अब मत करना कभी विचार

यह सुनकर माँ कहती है कि वह उसे तलवार जरूर दिला देंगी ताकि काका फिर से जेल न जाएँ। लेकिन माँ बच्ची से कहती है कि वह बिजली के घर जाने का विचार अपने दिमाग से निकाल दे।

इस तरह से इस सरल सी लगने वाली कविता के माध्यम से सुभद्रा कुमारी चौहान ने उस काल का चित्र उतारा है जब हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन हुआ करता था। उस समय अंग्रेजी सरकार यहाँ के लोगों पर तरह तरह के जुल्म करती थी। उस जुल्म की सहज प्रक्रिया के रूप में कई बच्चों का मन भी क्रांतिकारी भावनाओं से भर जाता था।


कविता के अनुसार

प्रश्न 1: सूरज को उसकी माँ ने क्यों बुला लिया?

उत्तर: जब बच्चों को खेलते खेलते बहुत देर हो जाती या फिर शाम हो जाती तो उनकी माँ उन्हें घर बुला लेती हैं। ऐसे ही सूरज की माँ ने उसे बुला लिया होगा।

प्रश्न 2: बादल काका जोर-जोर से क्यों डाँट रहे हैं?

उत्तर: लगता है किसी ने अपनी माँ का कहना नहीं माना है। बादल काका इसलिए जोर-जोर से डाँट रहे हैं।

प्रश्न 3: बिजली के बच्चों के वार खाली क्यों जा रहे हैं?

उत्तर: बिजली के बच्चे अभी तलवारबाजी में अनाड़ी हैं। इसलिए उनके वार खाली जा रहे हैं।

प्रश्न 4: लड़की बिजली के घर क्यों जाना चाहती है?

उत्तर: लड़की को लगता है के बिजली के बच्चे तलवार चलाना नहीं जानते और वह उन्हें तलवार चलाना सिखा सकती है। इसलिए वह बिजली के घर जाना चाहती है। लड़की को यह उम्मीद है कि फिर खुश होकर बिजली उसे एक तलवार देगी जिससे वह अपने देश की रक्षा कर पाएगी।

प्रश्न 5: बिजली के घर में तलवर चलाना कौन सीख रहा है?

उत्तर: बिजली के बच्चे




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