विश्वेश्वरैया

आर के मूर्ति

इस लेख में महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के बचपन के जीवन की कुछ रोचक बातें बताई गई हैं। बचपन से ही विश्वेश्वरैया जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे। प्रकृति और उसमें होने वाली परिघटनाओं के बारे में उनकी जिज्ञासा शांत ही नहीं होती थी। बचपन से ही उन्हें किसी की गरीबी देखकर बुरा लगता था और वह हर बात का समाधान निकालना चाहते थे। जब तक वह किशोरावस्था में पहुँचे तब तक उन्होंने हर समस्या का समाधान निकालना सीख चुके थे। इसी क्षमता ने उन्हें एक व्यावहारिक और सफल व्यक्ति बनाया।


पाठ से

प्रश्न 1: अपने घर के बरामदे में खड़े होकर छ: वर्षीय विश्वेश्वरैया ने क्या देखा?

उत्तर: छ: वर्षीय विश्वेश्वरैया अपने घर के बरामदे में खड़े होकर बारिश का दृश्य देख रहा था। उसने बारिश से धुली हुई पत्तियों की सुंदरता को देखा। साथ में उसने जल के बहाव से उत्पन्न होने वाली शक्ति को भी देखा। उसने देखा कि जल में इतनी शक्ति होती है कि किसी भी वस्तु को अपने साथ बहा ले जाये। फिर जब विश्वेश्वरैया ने एक गरीब बुढ़िया को देखा तो उसके मन यह सवाल उठा कि कोई गरीब क्यों होता है।

प्रश्न 2: तुम्हें विश्वेश्वरैया की कौन सी बात सबसे अच्छी लगी? क्यों?

उत्तर: मुझे विश्वेश्वरैया की जो बात सबसे अच्छी लगी वह है किसी भी समस्या का समाधान ढ़ूँढ़ने की प्रतिभा। यदि हम अपने ज्ञान का सही इस्तेमाल न करें तो हमारा ज्ञान किसी काम का नहीं है। समाधान ढ़ूँढ़ने के क्रम में कोई भी व्यक्ति अपने अर्जित ज्ञान का इस्तेमाल करता है जिससे सबकी भलाई होती है।

प्रश्न 3: विश्वेश्वरैया के मन में कौन-कौन से सवाल उठते थे?

उत्तर: विश्वेश्वरैया के मन में अनेक सवाल उठते थे। वह प्रकृति की शक्ति के बारे में जानना चाहते थे। वह ऊर्जा और उसे इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में जानना चाहते थे। वह गरीबी के कारणों और उसके निदान के बारे में जानना चाहते थे।


सवाल

विश्वेश्वरैया अपने मन में उठे सवालों का जवाब अपने अध्यापकों और बड़ों से जानने की कोशिश करते थे। क्या तुम अध्यापकों से पाठ्य पुस्तकों के सवालों के अतिरिक्त भी कुछ सवाल पूछते हो? कुछ सवालों को लिखो जो तुमने अपने अध्यापकों से पूछे हों।

उत्तर: मेरे मन में भी तरह-तरह के सवाल उठते हैं। इनमें से कुछ नीचे दिये गये हैं।

वाक्य बनाओ

नीचे पाठ में से चुनकर कुछ शब्द दिए गए हैं। तुम इनका प्रयोग अपने ढ़ंग के वाक्य बनाने में करो।

हरे-भरे, उमड़-घुमड़, एक-दूसरे, धीरे-धीरे, टप-टप, फटी-पुरानी

उत्तर:




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