वीर कुँवर सिंह

इस निबंध में वीर कुँवर सिंह के जीवन और स्वाधीनता संग्राम में उनकी अहम भूमिका के बारे में लिखा गया है। वीर कुँवर सिंह जगदीशपुर की एक रियासत के जमींदार थे। बचपन से ही पढ़ाई को छोड़कर उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती में अधिक मजा आता था। अपने पिता की मृत्यु के बाद कुँवर सिंह ने रियासत की बागडोर अपने हाथों में ले ली। तभी से उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम चलाना शुरु किया था। जब 1857 का स्वाधीनता संग्राम हुआ तो कुँवर सिंह भी उस लड़ाई में कूद पड़े। कुँवर सिंह ने बिहार और उत्तर प्रदेश के कई राजाओं के साथ गठबंधन तैयार किया ताकि अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दे सकें। उन्होंने आजमगढ़ पर विजय प्राप्त की। कुँवर सिंह ने अंत में जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया लेकिन उसके कुछ दिनों बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। कुँवर सिंह की बहादुरी के किस्से मशहूर हैं, क्योंकि अपनी अधिकतर लड़ाइयाँ उन्होंने लगभग अस्सी वर्ष की अवस्था में लड़ी। कुँवर सिंह ने सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे। कुँवर सिंह ने जनता की भलाई के लिए कई काम किये थे, जैसे सड़कें बनवाना, जलाशय खुदवाना, आदि।


निबंध से

प्रश्न 1: वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

उत्तर: वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की जो विशेषताएँ मुझे प्रभावित करती हैं, वे इस प्रकार हैं: बहादुरी, युद्ध नीति, अन्य राजाओं से गठजोड़ करने की नीति, दया भावना, अन्य धर्मों के लिए सम्मान और जन कल्याण।

प्रश्न 2: कुँवर सिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?

उत्तर: कुँवर सिंह को बचपन से ही घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती में मजा आता था। उस जमाने में लड़ाइयों में घोड़ों और तलवारों का इस्तेमाल होता था। साथ में शारीरिक ताकत की आवश्यकता भी पड़ती थी। इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनके बचपन के शौक ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी बनने में बहुत मदद की।

प्रश्न 3: सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी- पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: कुँवर सिंह की सेना में उच्च पदों पर मुसलमान भी थे। उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के त्योहार एक साथ मनाए जाते थे। उन्होंने विद्यालय के साथ मकतब भी बनवाए थे। इन बातों से पता चलता है कि सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी।


प्रश्न 4: पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?

उत्तर: पाठ में बताया गया है कि किस तरह कुँवर सिंह ने अपना बायाँ हाथ काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया था। इससे पता चलता है कि कुँवर सिंह एक साहसी व्यक्ति थे। कुँवर सिंह ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने की बजाय उनसे लोहा लेने का निश्चय किया था, जिससे उनके स्वाभिमान का पता चलता है। कुँवर सिंह के पास बहुत अधिक धन नहीं था फिर भी उन्होंने जनता की भलाई लिए जिला स्कूल खोलने के लिए अपनी जमीन दान में दी थी। इससे उनकी उदारता का परिचय मिलता है।

प्रश्न 5: आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद फरोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुँवर सिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?

उत्तर: सोनपुर मेले का उपयोग कुँवर सिंह ने अपने जैसी मानसिकता वाले लोगों से मिलने जुलने और अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए किया था।




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