9 हिंदी स्पर्श

अग्नि पथ

हरिवंश राय बच्चन

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत!
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

जीवन में जब कठिन समय आता है तो ही किसी की असली परीक्षा होती है। ऐसे समय में हो सकता है कि मदद के लिए कई हाथ आगे आएँ लेकिन कभी भी किसी की मदद नहीं लेनी चाहिए और अपने रास्ते पर बढ़ते रहना चाहिए।


तू न थकेगा कभी!
तू न थमेगा कभी!
तू न मुड़ेगा कभी! कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ!
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

जब कठिन रास्ते पर चलना हो तो मनुष्य को एक प्रतिज्ञा करनी चाहिए। वह कभी नहीं थकेगा, कभी नहीं रुकेगा और कभी पीछे नहीं मुड़ेगा।

यह महान दृश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

जब कोई किसी कठिन रास्ते से होते हुए अपनी मंजिल की ओर अग्रसर होता है तो एक महान दृश्य देखने को मिलता है। ऐसे में मनुष्य अपने आँसू, पसीने और खून से लथपथ आगे बढ़ता रहता है और मंजिल को पा लेता है।


NCERT Solution

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

Question 1: कवि ने ‘अग्नि पथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है?

उत्तर: जीवन में जब कठिनाई का दौर चलता है तभी किसी की असली परीक्षा होती है। ऐसे ही दौर को कवि ने अग्नि पथ के रूप में देखा है।

Question 2: ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: इन शब्दों का बार बार प्रयोग करके कवि कई ऐसी भावनाओं को उजागर करता है जो जीत के लिए जरूरी होती हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति और लाख गिरने के बावजूद किसी से मदद की गुहार न करना ही ऐसे समय में सफलता की कुंजी होती है।

Question 3: ‘एक पत्र छाँह भी माँग मत’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: हो सकता है कि कठिन दौर में आपकी मदद के लिए कई लोग आगे आएँ। लेकिन ऐसे में किसी से भी मदद नहीं माँगना चाहिए और अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए।


निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए:

Question 1: तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी

उत्तर: जब कठिन रास्ते पर चलना हो तो मनुष्य को एक प्रतिज्ञा करनी चाहिए। वह कभी नहीं थकेगा, कभी नहीं रुकेगा और कभी पीछे नहीं मुड़ेगा।

Question 2: चल रहा मनुष्य है, अश्रु, स्वेद, रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ

उत्तर: जब कोई किसी कठिन रास्ते से होते हुए अपनी मंजिल की ओर अग्रसर होता है तो एक महान दृश्य देखने को मिलता है। ऐसे में मनुष्य अपने आँसू, पसीने और खून से लथपथ आगे बढ़ता रहता है और मंजिल को पा लेता है।

Question 3: इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब कठिन दौर आता है तभी मनुष्य की असली परीक्षा होती है। ऐसे में उसे किसी से मदद नहीं माँगनी चाहिए। ऐसे समय में उसे न तो थमना चाहिए, न ही रुकना चाहिए और न ही पीछे मुड़ना चाहिए। इस प्रयास में हो सकता है कि मनुष्य अपने खून-पसीने से नहा जाए लेकिन उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति ही उसको उसकी मंजिल तक पहुँचा सकती है।