कृतिका & संचयन

मधु कांकड़िया

साना साना हाथ जोड़ि

झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?

उत्तर: झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका पर जादू कर रहा था। लेखिका अपनी सुध बुध खो बैठी थीं। उनके बाहर भीतर सब कुछ जैसे शून्य हो गया था। उस खूबसूरती का अहसास उनकी इंद्रियों से परे था।

गंतोक को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया?

उत्तर: ऐसा कहा जाता है कि गंतोक के सभी लोग बहुत मेहनती होते हैं। वे मेहनत की जिंदगी जीते हैं और प्रकृति की गोद में जीवन के हर पहलू का आनंद उठाते हैं। प्रकृति के प्रचुर वरदान के कारण उनकी जिंदगी राजाओं जैसी है। इसलिए गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर कहा गया है।

कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?

उत्तर: बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग तरह तरह के अवसरों पर तरह तरह के रंगों की पताकाएँ फहराते हैं। जब शोक का समय होता है तो सफेद पताकाएँ फहराई जाती हैं। जब किसी शुभ कार्य की शुरुआत करनी होती है तो रंगीन पताकाएँ फहराई जाती हैं।


जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।

उत्तर: जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। जितेन ने बताया कि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहाँ रास्ते दुर्गम थे। वहाँ के बच्चों की जिंदगी आरामदेह कतई नहीं थी। स्कूल से आने के बाद बच्चे लकड़ियाँ लाने और मवेशी चराने में अपने परिवार की मदद करते थे। उसने उन्हें बौद्ध धर्म में फहराए जाने वाली पताकाओं के बारे में बताया और धर्म चक्र के बारे में भी बताया। उसने उस जगह के बारे में भी बताया जहाँ ‘गाइड’ फिल्म की शूटिंग हुई थी। उसने ये भी बताया की कटाओ में जाकर ताजा बर्फ देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर जितेन ने सिक्किम के बारे में कई रोचक बातें बताई।

लॉंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक सी क्यों दिखाई दी?

उत्तर: हिंदू धर्म में चक्र की बहुत महत्ता है। ऐसा ही कुछ लेखिका को सिक्किम में बौद्ध धर्म के बारे में भी देखने को मिला। इसलिए लॉंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक सी दिखाई दी।

जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?

उत्तर: जितेन नार्गे ने एक कुशल गाइड की भूमिका बखूबी निभाई है। एक कुशल गाइड को भ्रमण स्थल की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उसे वहाँ के भूगोल, इतिहास और संस्कृति के बारे में ऐसी बातें मालूम होनी चाहिए जिनसे पर्यटक का ज्ञान बढ़े। इसके अलावे पर्यटक को उस गाइड के साथ बात करने में सुकून महसूस हो। उस गाइड को एक दोस्त और हितैषी की तरह पेश आना चाहिए।

इस यात्रा वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: हिमालय अपने विशाल और विराट रूप में नजर आ रहा था। रास्ते संकरे और जलेबी की तरह टेढ़े-मेढ़े हो रहे थे। नीचे घाटियों में मकान इस तरह लग रहे थे जैसे छोटे-छोटे घरौंदे हों। बादल भी अब नीचे नजर आ रहे थे जैसे पाताल की ओर जा रहे हों।


प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

उत्तर: प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका जैसे कहीं खो गई थी। अन्य लोगों के विपरीत वे खामोशी से उस सौंदर्य का रसपान करना चाहती थी। वह गगनचुंबी पहाड़ों, दूधिया झरनों और हरियाली के सौंदर्य का एक-एक कतरा अपने में समा लेना चाहती थी।

प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए?

उत्तर: लेखिका जब प्रकृति की अलौकिक छटा का आनंद ले रही थी तभी एक दृश्य ने उसे झकझोर दिया। उसने देखा कि स्थानीय महिलाएँ अपने पीठ पर बच्चे लादे पत्थर तोड़ रही थीं। उस प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भूख, दैन्य और जिंदा रहने की लड़ाई को देखकर लेखिका का मन पसीज गया। बच्चे को पीठ पर लादे अपने काम में व्यस्त वे महिलाएँ दिखा रहीं थीं कि कैसे मातृत्व और श्रम को साथ-साथ निभाया जाता है।

सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।

उत्तर: सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में असंख्य लोगों का योगदान होता है। गाइड और ट्रैवल एजेंसियाँ तो सबसे आगे दिखती हैं। लेकिन इनके पीछे नेपथ्य में बहुत लोग काम कर रहे होते हैं। हजारों गुमनाम लोग इस काम में अपना जीवन बिता देते हैं ताकि किसी पर्यटन स्थल तक एक अच्छी सड़क बन जाए जिसके बिना कुछ स्थानों तक तो पहुँचा ही नहीं जा सकता। इनके अलावा स्थानीय दुकानदार, होटल चलाने वाले, आदि का भी अहम योगदान होता है।

“कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।“ इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?

उत्तर: किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में हर नागरिक की भूमिका होती है। उदाहरण के लिए एक बहुमंजिला इमारत को लीजिए। इस तरह की इमारत की कल्पना के लिए आर्किटेक्ट और इंजीनियर की जरूरत होती है। लेकिन उसे मूर्तरूप देने के लिए हजारों मजदूर और सैंकड़ों राजमिस्त्री को काम करना होता है। मकान बन जाने के बाद उसे रहने लायक बनाने के लिए बढ़ई, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कई कारीगर काम करते हैं। ठीक इसी तरह से देश की प्रगति में हर मजदूर, हर क्लर्क, हर छोटा-बड़ा व्यवसायी, हर शिक्षक, आदि का योगदान होता है।


आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए?

उत्तर: आज की पीढ़ी प्रकृति का दोहन कर रही है। प्रतिदिन सड़क पर लाखों की संख्या में नई गाड़ियाँ आ जाती हैं, जिसका मतलब होता है पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती हुई खपत। इससे वायु प्रदूषण होता है। जल की कीमत को बहुत कम ही लोग पहचानते हैं और ज्यादातर लोग जल की बरबादी करने में माहिर होते हैं। आज नए शहर बसाने और नई फैक्ट्रियाँ लगाने के लिए जंगल के जंगल साफ किए जा रहे हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।
इसे रोकने के लिए हम सबको अपना योगदान देना होगा। हमें सार्वजनिक यातायात के साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना होगा। जल को बचाने के लिए मुहिम छेड़नी होगी। प्लास्टिक के उपयोग में कमी लानी होगी। बिजली बचाने के नए नए उपाय खोजने होंगे।

प्रदूषण के कारण स्नोफॉल में कमी का जिक्र किया गया है? प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए हैं, लिखें।

उत्तर: प्रदूषण के कुछ दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं:

  • अल्प्वृष्टि से सूखा पड़ रहा है।
  • अतिवृष्टि से बाढ़ आ रही है।
  • पहाड़ों पर भूस्खलन हो रहे हैं।
  • ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है।
  • मौसम में अजीबोगरीब परिवर्तन हो रहे हैं।
  • प्राकृतिक विनाश अधिक भयानक हो रहे हैं।

‘कटाओ’ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए।

उत्तर: ‘कटाओ’ पर किसी भी दुकान का न होना इस बात की ओर संकेत करता है कि न तो वहाँ अधिक जनसंख्या है न ही वहाँ पर्यटक आते हैं। यदि अधिक पर्यटक आने लगेंगे तो फिर कई दुकानें खुलेंगी। पर्यटक के जाने के बाद वहाँ पर गंदगी फैलेगी और पर्यावरण को नुकसान पहुँचेगा। अभी वहाँ का पर्यावरण अनछुआ है। इसलिए यह स्थिति कटाओ के लिए वरदान है।

प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है?

उत्तर: प्रकृति ने जल संचय के लिए अनूठी व्यवस्था की है। वर्षा ऋतु में बारिश का पानी पहाड़ों के ऊपर जम जाता है और इस तरह जल का संचय हो जाता है। फिर जब गर्मी में लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने लगते हैं तो यही बर्फ पिघलकर लोगों को आवश्यक पानी मुहैया कराता है।

देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?

उत्तर: देश की सीमा पर बैठे फौजी अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करते हैं। मौसम की मार इसमें अहम होती है। यदि वे हिमालय के आसपास तैनात होते हैं तो उन्हें भीषण सर्दी का सामना करना पड़ता है। यदि वे राजस्थान के इलाके में होते हैं तो उन्हें भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। उनके प्रति हमारा उत्तरदायित्व ये बनता है कि हम सही समय पर अपने टैक्स जमा करें ताकि उन फौजियों के लिए जरूरी संसाधन जुटाए जा सकें।