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महादेवी वर्मा

मधुर मधुर मेरे दीपक जल (अभ्यास)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रस्तुत कविता में ‘दीपक’ और ‘प्रियतम’ किसके प्रतीक हैं?

उत्तर: इस कविता में दीपक स्वयं का प्रतीक है और प्रियतम उस लक्ष्य का जिसतक कोई मनुष्य पहुँचना चाहता है।

दीपक से किस बात का आग्रह किया जा रहा है और क्यों?

उत्तर: दीपक से इस बात का आग्रह किया जा रहा है कि वह हर पल और हर दिन जलता रहे। यहाँ पर जलने की प्रक्रिया को हम अपने कर्मों की तरह देख सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन कर्म करना पड़ता है। एक पुरानी कहावत है कि कोई भी बड़ा काम एक ही दिन में नहीं होता बल्कि उसमें वर्षों लग जाते हैं।

‘विश्व शलभ’ दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?

उत्तर: पतंगा दीपक के साथ इसलिए जल जाना चाहता है कि वह दीपक में समा जाए। यहाँ पर दीपक का मतलब है ईश्वर।


आपकी दृष्टि में ‘मधुर मधुर मेरे दीपक जल’ कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है:
(क) शब्दों की आवृत्ति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर।

उत्तर: इस कविता का सौंदर्य दोनों बातों में है। कवयित्री ने कई शब्दों को बार बार दोहराकर कविता की लयबद्धता को बनाए रखा है। इसके साथ ही कई गूढ़ विषयों को अनेक तरह के प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से चित्रित किया है। यही एक सफल छायावाद कविता की पहचान होती है।

कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं?

उत्तर: कवयित्री अपने प्रियतम का पथ आलोकित करना चाह रही हैं। यहाँ पर प्रियतम के कई मतलब हो सकते हैं। ईश्वर या कोई ऐसा जो आपके करीब हो। कुछ लोगों के लिए पूरा संसार भी प्रिय हो सकता है।

कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन क्यों प्रतीत होते हैं?

उत्तर: आकाश के तारों के पास अपनी रोशनी तो है लेकिन वह इस दुनिया के किसी काम की नहीं है। तारों की रोशनी से किसी का कोई भला नहीं हो पाता है। इसलिए कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन लगते हैं।

पतंगा अपने क्षोभ को किस प्रकार व्यक्त कर रहा है?

उत्तर: पतंगा जब दीपक की लौ से टकरा नहीं पाता है तो वह भन्नाकर अपना क्षोभ व्यक्त कर रहा है।


कवयित्री ने दीपक को हर बार अलग-अलग तरह से ‘मधुर मधुर, पुलक पुलक, सिहर सिहर और बिहँस बिहँस’ कर जलने को क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आग में बड़ी ताकत होती है। जब तक हम उसपर नियंत्रण रखते हैं तब तक वह हमारे बड़े काम आती है। जो आग घर का चूल्हा जलाकर लोगों का पेट पालती है वही यदि नियंत्रण से बाहर हो जाए तो कई घरों को जला देती है। इस कविता में कवयित्री ने आग को प्यार से और हौले से जलने को कहा है ताकि उसके अनुकूल परिणाम मिल सकें।

नीचे दी गई काव्य पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
जलते नभ में देख असंख्यक,
स्नेहहीन नित कितने दीपक;
जलमय सागर का उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल।
विहँस विहँस मेरे दीपक जल।

  1. स्नेहहीन दीपक से क्या तात्पर्य है?

    उत्तर: यहाँ पर तारों को स्नेहहीन दीपक कहा गया है क्योंकि वे संसार को कोई लाभ नहीं पहुँचा पाते हैं।
  2. सागर को ‘जलमय’ कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है?

    उत्तर: जल की ठंडक आग की तपिश के ठीक विपरीत होती है। यहाँ पर कवयित्री ने उस जलमय सागर का उदाहरण इसलिए लिया है ताकि वे बता सकें कि कोई चाहे तो अदम्य इच्छाशक्ति से दूसरों का भला कर सकता है; चाहे उसके पास इसकी सामर्थ्य भी न हो।
  3. बादलों की क्या विशेषता बताई गई है?

    उत्तर: बादलों में बिजली होती है।
  4. कवयित्री दीपक को ‘बिहँस बिहँस’ जलने के लिए क्यों कह रही हैं?

    उत्तर: कवयित्री शायद ये कहना चाहती हैं की अनमने भाव से किया हुआ परोपकार कभी भी परोपकार नहीं हो सकता। आप यदि अपनी स्वेच्छा से किसी का भला करते हैं तभी इससे सभी का भला हो सकता है।

क्या मीराबाई और ‘आधुनिक मीरा’ महादेवी वर्मा इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने के लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं, उनमें कुछ समानता या अंतर प्रतीत होता है? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर: मीराबाई अपने आराध्य से मिलने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती हैं। उसी तरह महादेवी वर्मा भी अपने आराध्य से मिलने के लिए जल जाने को भी तैयार हैं। इसलिए यह कहा जाता है कि दोनों में काफी समानता है।


निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए:

दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित
तेरे जीवन का अणु गल गल।

उत्तर: दीपक को खुश होकर ऐसे जलना चाहिए जिससे उसका एक एक अणु गलकर उसके मुलायम शरीर को विलुप्त कर दे। इसमें अनंत रोशनी वैसे ही निकलनी चाहिए जैसे सूरज पूरे संसार में सबेरा लाता है। अंधेरा कई तरह का हो सकता है। अज्ञान का अंधेरा उन्हीं में से एक है। इसे दूर करने के लिए बहुत शक्तिशाली दीपक की जरूरत है।

युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल
प्रियतम का पथ आलोकित कर।

उत्तर: मन का दीपक मधुर होकर यदि हर घड़ी, हर दिन करके युगों तक जले तो हर किसी के रास्ते को प्रकाशित कर सकता है।

मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन

उत्तर: जिस तरह से मोम जलकर पिघल जाता है उसी तरह से आपका सबकुछ पिघल जाना चाहिए। इसका मतलब है कि आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जो काम कर रहे हैं उसमें पूरी तरह से खो जाएँ।



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