class 10 hindi sparsh premchand bade bhai saheb ncert solution

प्रेमचंद

बड़े भाई साहब

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक से दो पंक्तियों में दीजिए:

कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?

उत्तर: कथा नायक की रुचि सिर्फ खेलकूद और ऊधम मचाने में थी।

बड़े भाई साहेब छोटे से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?

उत्तर: बड़े भाई साहेब छोटे के कहीं से लौटने पर हमेशा पूछते, “कहाँ थे?”


दूसरी बार पास होने के बाद छोटे के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर: दूसरी बार पास होने के बाद छोटे भाई के मन में बड़े भाई के लिए इज्जत बढ़ गई थी।

बड़े भाई साहेब छोटे से उम्र में कितने बड़े थे और वे किस कक्षा में पढ़ते थे?

उत्तर: बड़े भाई साहेब उम्र में पाँच साल बड़े थे। कहानी की शुरुआत में छोटे से तीन कक्षा आगे पढ़ते थे।

बड़े भाई साहेब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?

उत्तर: बड़े भाई साहेब दिमाग को आराम देने के लिए किताब पर कुछ तस्वीरें खींचा करते थे और कभी शब्दों के अजीबोगरीब मेल बनाया करते थे।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर २५ – ३० शब्दों में दीजिए:

छोटे भाई ने पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?

उत्तर: छोटे भाई ने टाइम टेबल बनाने में हर विषय के लिए उपयुक्त समय देने की योजना बनाई और सोचा की पढ़ाई के प्रति गंभीर हो जाएगा। लेकिन खेलकूद की ललक ने उसे टाइम टेबल का पालन नहीं करने दिया।

एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहेब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर: भाई साहेब ने छोटे भाई को घमंड न करने की सलाह दी और बताया कि कैसे कड़ी मेहनत ही लगातार सफलता दिला सकती है। बड़े भाई ये नहीं चाहते थे कि सफलता के नशे में कहीं छोटा भाई अपना समय न बर्बाद कर दे।

बड़े भाई साहेब को अपनी मन की इक्षाएँ क्यों दबानी पड़ती थी?

उत्तर: बड़े भाई साहेब ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते थे जिससे छोटे भाई को गलत सीख मिले। वह अपने छोटे भाई के लिए सही व्यवहार की मिसाल रखना चाहते थे। वहाँ पर वो ही छोटे भाई के अभिभावक और सच्चे मित्र थे।

बड़े भाई साहेब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?

उत्तर: बड़े भाई साहेब छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की सलाह देते थे। वे ये नहीं चाहते थे कि छोटा भाई अपने मुख्य उद्देश्य से भटक जाए।

छोटे भाई ने बड़े भाई साहेब के नर्म व्यवहार का क्या फायदा उठाया?

उत्तर: छोटे भाई ने बड़े भाई की नजर बचाकर खेलकूद में ज्यादा समय लगाना शुरु किया। हालाँकि अब दोनों भाइयों एक ही दर्जे का अंतर था लेकिन फिर भी छोटा भाई बड़े भाई की इज्जत करता था। इसलिए वह जो भी शरारत करता था, अपने बड़े भाई की नजर बचाकर ही करता था।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ५० – ६० शब्दों में दीजिए:

बड़े भाई की डाँट फटकार अगर न मिलती तो क्या छोटा भाई अपनी कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर: हालाँकि छोटा भाई मेधावी लगता है, लेकिन बड़ों की नसीहत तो हर किसी के लिए जरूरी होती है। बड़े भाई साहेब की डाँट फटकार कहीं न कहीं उसे रास्ते से विचलित न होने में मदद करती है।

बड़े भाई साहेब पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर तरीके पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?

उत्तर: शिक्षा पद्धति का सबसे बड़ा दोष है कि छात्रों से किताबी बातें कंठस्थ करने की उम्मीद की जाती है। इसमें कहीं न कहीं मौलिक विचारों को दबाया जाता है। कुछ बातें जानना जरूरी है, लेकिन क्यों जरूरी है यह बात छात्रों को नहीं बताई जाती है। हर कोई छोटे भाई की तरह मेधावी नहीं हो सकता है। मध्यम दर्जे के छात्रों के लिए अध्यापकों को अपने पढ़ाने की शैली में बदलाव की आवश्यकता है।

बड़े भाई साहेब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

उत्तर: बड़े भाई साहेब के अनुसार किताबी ज्ञान जीवन की समझ पाने के लिए काफी नहीं है। जीवन के अच्छे और बुरे अनुभव इस ज्ञान को पुख्ता करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। बड़े भाई ने अपने बुजुर्गों को गौर से देखा और समझा है। वह उनके व्यावहारिक ज्ञान से बहुत प्रभावित है। व्यावहारिक ज्ञान एक तरह से किताबी ज्ञान के पूरक की तरह काम करता है।

छोटे भाई के मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?

उत्तर: जब छोटे भाई को यह पता चला कि बड़े भाई ने उसकी देखभाल कितने ढ़ंग से की, उसके लिए कितनी कुर्बानिआं दी, अपनी सभी इच्छाओं पर नियंत्रण रखा ताकि छोटा भाई गुमराह न हो जाए, तब छोटे भाई को अपने भाई के बड़प्पन का अहसास हुआ। इससे छोटे भाई के मन में बड़े भाई के लिए श्रद्धा उत्पन्न हुई।

बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: बड़े भाई में हर चीज को नाप तौल कर करने की आदत है। वे सभी नियम और कानून का पालन करते हैं। वे अपने छोटे भाई की हमेशा तरक्की चाहते हैं। कहीं कहीं पर ऐसा लगता है जैसे वे अपनी उम्र से कुछ ज्यादा ही बड़े हैं। शायद छोटे भाई की जिम्मेदारी ने उनका लड़कपन छीन लिया है। आखिर उस हॉस्टल में अपने भाई के सब कुछ वो ही तो हैं।


निम्नलिखित के आश्य स्पष्ट कीजिए:

इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास।

उत्तर: यह कथन कहीं न कहीं हमारी आज की अंकों की दौड़ की मानसिकता पर आघात करती है। हर कोई 90% से ज्यादा लाने के चक्कर में रहता है। जरूरी नहीं कि जिसने ज्यादा नंबर लाए हों वह जीवन की दौड़ में भी आगे रहेगा। आज के जमाने में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ मामूली शिक्षा दीक्षा वाला आदमी सफलता के शिखर पर पहुँचा है। एक सच्चा इंसान बनने के लिए असली ज्ञान और विकास ज्यादा जरूरी होता है।

फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेलकूद का तिरस्कार नहीं कर पाता था।

उत्तर: इस वाक्य में बड़ी ही चरम सीमा के उदाहरण का प्रयोग किया है। लेखक चरम उदाहरण का प्रयोग करके पाठक का पूरा ध्यान घटना पर केंद्रित करने की कोशिश की है। मौत उस निश्चित अंत की तरफ इशारा करता है जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है। छोटे भाई के लिए बड़े भाई की फटकार सुनना उसी भयानक विपत्ति की तरह हुआ करता था। वह हमेशा उस विपत्ति के आमने सामने होता था। लेकिन जैसे मरते समय भी मनुष्य माया मोह के बंधन नहीं तोड़ पाता है उसी तरह छोता भाई खेल कूद का मोह नहीं छोड़ पाता था।

बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?

उत्तर: बड़े भाई साहेब को सही नींव डालने की चिंता हमेशा खाए रहती थी। इसलिए वे हमेशा ही किसी विषय की गहराई में जाने की कोशिश करते थे। शायद इस कोशिश में वे ज्यादा उलझ जाते थे और मूल विषय को नहीं पकड़ पाते थे। फिर भी उनका कथन सोलह आने सही था। चाहे किसी मकान का निर्माण हो या आपके जीवन का, नींव हमेशा ही मजबूत होनी चाहिए क्योंकि मजबूत नींव पर ही कोई भी संरचना ज्यादा टिकाऊ होती है।

आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला जा रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।

उत्तर: इन पंक्तियों में उस घटना का वर्णन है जब छोटा भाई कटी पतंग लूटने के लिए भागता है। अधिकतर वयस्कों को किसी बच्चे की ये हरकत किसी अर्थहीन क्रियाकलाप की तरह लगेगी। लेकिन प्रेमचंद ने उस मामूली सी घटना का भी बड़े रोचक ढ़ंग से चित्रण किया है। कोई भी बच्चा जब पतंग लूटने के लिए भागता है तो उसकी आँखें अपलक आसमान की ओर होती हैं। कटी हुई पतंग दिशाहीन लहराती है और धीरे धीरे जमीन की तरफ गिरती है। डोर कट जाने से पतंग के सारे बंधन टूट जाते हैं। यह वैसा ही होता है जैसे आत्मा का शरीर से निकलने के बाद होता है। लेखक को ऐसा लगता है जैसे आत्मा फिर स्वर्ग से निकलकर पूरी विरक्ति से नया जीवन ग्रहण करने जा रही हो और उसे अब अपने पिछले जीवन से कोई सरोकार नहीं है। पतंग भी इसी तरह से अपने नए मालिक की तरफ चली जाती है, इस बात से बेखबर कि हो सकता है नया मालिक फाड़कर उसका अस्तित्व ही मिटा दे।



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