Class 10 Hindi Sparsh

रवीन्द्र केलेकर

पतझर में टूटी पत्तियाँ

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए:

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

उत्तर: शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती, लेकिन गिन्नी के सोने में ताँबा मिला होता है। शुद्ध सोने की तुलना में गिन्नी का सोना अधिक मजबूत और उपयोगी होता है।

प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर: जो लोग शुद्ध आदर्श में थोड़ी व्यावहारिकता मिलाकर काम चलाते हैं, उन्हें प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट कहते हैं।

पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या हैं?

उत्तर: शुद्ध आदर्श वैसा आचार विचार है जिसने इसका पालन करने वालों का उत्थान तो किया ही है साथ में अन्य लोगों का भी उत्थान किया है।

लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

उत्तर: जापानियों ने अमेरिका से प्रतिस्पर्धा के चक्कर में अपने दिमाग को और तेज दौड़ाना शुरु कर दिया ताकि जापान हर मामले में अमेरिका से आगे निकल सके। इसलिए लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात कही है।

जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

उत्तर: टी सेरेमनी

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

उत्तर: जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है वहाँ गजब की शांति होती है। माहौल इतना शांत होता है कि पानी के खलबलाने की आवाज भी सुनाई देती है।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर २५ – ३० शब्दों में लिखिए:

शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

उत्तर: शुद्ध सोना बहुत कीमती होता है। ताँबे के साथ मिलकर यह ताँबे के महत्व को बढ़ा देता है। जबकी दूसरी ओर ताँबा सोने की कीमत को घटा देता है। शुद्ध आदर्श जब व्यावहारिकता के साथ मिलता है तो इससे व्यावहारिकता की कीमत बढ़ जाती है। लेकिन व्यावहारिकता का ठीक उलटा प्रभाव पड़ता है। इसलिए शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से की गई है।

चाजीन ने कौन सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढ़ंग से पूरी की?

उत्तर: चाजीन ने बड़े अदब से मेहमानों का स्वागत किया और उन्हें बैठने की जगह दिखाई। फिर उसने अंगीठी जलाई और उसपर चायदानी रखी। इसके बाद उसने बरतनों को चमकाया। यह सारी क्रियाएँ उसने गरिमापूर्ण ढ़ंग से पूरी की।

‘टी सेरेमनी’ में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

उत्तर: टी सेरेमनी में शांति का अत्यधिक महत्व होता है। इसलिए वहाँ पर एक बार में तीन से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाता है।

चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

उत्तर: चाय पीने के बाद लेखक को अपार शांति महसूस हुई। उसे लगा कि उसके दिमाग की रफ्तार बंद हो चुकी थी। उसके मन में और आस पास सब कुछ शून्य सा हो गया था।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ५० – ६० शब्दों में लिखिए:

गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: गांधीजी ने अफ्रीका में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को इकट्ठा किया था। जब वे भारत आए थे तब तक स्वाधीनता संग्राम की लहर पूरे भारत में नहीं फैल पाई थी। गांधीजी के अथक प्रयासों के कारण पूरे भारत की जनता उनके साथ हो गई थी। असहयोग आंदोलन और नमक आंदोलन की अपार सफलता से पता चलता है कि उनमें नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी।

आपके विचार से कौन से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आदर्शों के मूल्य शाश्वत हैं। आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली जिंदगी में अधिकतर लोगों को ऐसा लगने लगा हि की आज आदर्श बेमानी हो गए हैं और व्यावहारिकता ही जीत की तरफ ले जाती है। लेकिन जो लोग वाकई सफलता के शिखर पर पहुँचे हैं, उनके उदाहरण से हम देख सकते हैं कि आदर्श का आज भी उतना ही महत्व है जितना पहले था।

अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब:

  • शुद्ध आदर्श से आपको हानि लाभ हुआ हो।

    उत्तर: एक बार मैंने फुटपाथ पर बैठे एक भूखे बच्चे को अपना टिफिन दे दिया था। उस दिन मुझे भूखा रहना पड़ा लेकिन अंदर से एक असीम सी संतुष्टि का अहसास हुआ। मुझे लगा कि मुझे अपना भोजन दूसरे को देकार लाभ ही हुआ।
  • शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ।

    उत्तर: मुझे हमेशा से पसंद है कि जब मैं नई क्लास में जाऊँ तो मेरे लिए नई किताबें खरीदी जाएं। लेकिन कक्षा 9 में प्रवेश के समय मुझे एक मित्र की पुरानी किताबें आधे दाम पर मिल गईं। मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा, लेकिन बचत करने के खयाल से मैंने उसकी सारी किताबें खरीद लीं। इससे मुझे फायदा हुआ।

‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: गांधीजी ताँबे में सोना मिलाने वाले इंसान थे। इससे वे ताँबे की कीमत बढ़ा देते थे। वे व्यावहारिकता में आदर्शों को मिलाते थे। इसे समझने के लिए हम नमक आंदोलन का उदाहरण ले सकते हैं। आंदोलन का उद्देश्य था अंग्रजों को यहाँ की जनता की ताकत दिखाना। नमक एक मामूली सी चीज है लेकिन इसे हिंदुस्तान का हर आदमी रोज इस्तेमाल करता है। इससे हिंदुस्तान का हर अमीर गरीब प्रभावित होता है। नमक जैसी मामूली चीज को गांधीजी ने अपना हथियार बना लिया। जो अंग्रेज पहले गांधीजी के नमक आंदोलन की योजना पर हँस रहे थे, वे उस आंदोलन की सफलता को देखकर गांधीजी का लोहा मान गए थे।

‘गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है?

उत्तर: जीवन में आदर्शवादिता और व्यावहारिकता दोनों का महत्व है। लेकिन प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट की तरह हमें व्यावहारिकता में आदर्शवादिता मिलाने से बचना चाहिए। इसकी जगह हमें गांधीजी की तरह व्यावहारिकता में आदर्शवादिता मिलाने की सीख लेनी चाहिए।

लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर: लेखक के मित्र ने भागदौड़ भरी जिंदगी को मानसिक रोग का कारण बताया। यह बात सही है कि लोग आजकल चल नहीं रहे हैं, बल्कि भाग रहे हैं। आप किसी भी शहर की सड़कों पर सुबह 9 बजे नजर डालिए तो पता लगेगा कि हर कोई कहीं न कहीं भाग रहा है। लोग अत्यधिक तनाव में होने की वजह से बात बात पर झल्लाने लगते हैं। रोज-रोज की उत्तरजीविता के दवाब के कारण मानसिक रोग का खतरा बढ़ गया है।

लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लेखक का कहना है की हमारा भूतकाल सत्य नहीं है, क्योंकि वह बीत चुका है। भागे हुए साँप की लकीर पर लाठी पीटने से कोई फायदा नहीं होता है। लेखक का कहना है कि भविष्य तो अनिश्चित है, इसलिए उसके बारे में तनाव पालने से भी कोई लाभ नहीं होता है। वर्तमान में जीना सीखने से ही सही सुख मिलता है। वर्तमान पर हम बहुत हद तक नियंत्रण कर सकते हैं और वर्तमान के सुख दुख की पूरी-पूरी अनुभूति भी कर सकते हैं।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए:

समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

उत्तर: आदर्शवादी लोग कभी भी अपने बारे में नहीं सोचते हैं। वे हमेशा दूसरों को ऊपर उठाने की कोशिश करते हैं। इस प्रक्रिया में उनका कद भी ऊँचा हो जाता है और पूरे समाज को दीर्घकालीन लाभ होता है। व्यावहारिक लोग तो केवल अपने मतलब की बात करते हैं, जिससे समाज का कोई भला नहीं होता। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुअ है।

जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब ‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों’ के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।

उत्तर: लोगों की आदत होती है कि क्षणिक सफलता के मद में वे प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों की सराहना करने लगते हैं। इस प्रशंसा के मद में चूर होकर, प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट धीरे-धीरे आदर्शों से दूर होने लगते हैं। एक समय आता है जब केवल उनकी व्यावहारिक बुद्धि ही दिखती है।

हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बल्कि बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

उत्तर: यह टिप्पणी आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के बारे में है। आप किसी भी शहर की सड़कों पर सुबह 9 बजे नजर डालिए तो पता लगेगा कि हर कोई कहीं न कहीं भाग रहा है। लोग अत्यधिक तनाव में होने की वजह से बात बात पर झल्लाने लगते हैं।

सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढ़ंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।

उत्तर: यह पंक्ति चाजीन द्वारा चाय तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में है। चाजीन हर काम को एक तयशुदा विधि से बड़ी दक्षता के साथ कर रहा था। उसके हर क्रियाकलाप में इतना अच्छा तालमेल था कि लगता था कि मधुर संगीत बज रहा हो। यहाँ पर लेखक ने राग जयजयवंती का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि यह राग कुछ मुश्किल रागों में से है जिसपर महारत हासिल करने में संगीतकार को वर्षों लग जाते हैं।