क्लास 10 अर्थशास्त्र

विकास

अलग अलग लोगों के लिये विकास के अलग लक्ष्य होते हैं। जो बात किसी एक व्यक्ति के लिये विकास हो सकती है वह किसी दूसरे के लिये भी विकास हो यह जरूरी नहीं। उदाहरण के लिये किसी डैम का निर्माण एक उद्योगपति के लिये विकास हो सकता है लेकिन वही डैम उन लोगों के लिये विनाशकारी साबित होता है जिन्हें उस डैम के कैचमेंट एरिया से निष्कासित किया जाता है।

अलग अलग लोगों के लिये विकास की अलग अलग जरूरतें होती हैं। वे जरूरतें उस व्यक्ति की जिंदगी की परिस्थिति के अनुसार होती है। उदाहरण के लिये किसी दूर दराज के गाँव में रहने वाले आदमी के लिये पक्की सड़क का बनना विकास हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली या मुम्बई में रहने वाले किसी आदमी के लिये मेट्रो रेल या एक्सप्रेसवे का बनना विकास हो सकता है।

इस तरह से विकास के ऐसे लक्ष्य की जरूरत पड़ती है जिससे अधिक से अधिक लोगों को फायदा पहुँच सके।




विकास के लक्ष्य:

प्रति व्यक्ति आय: किसी देश की कुल आय को वहाँ की जनसंख्या से भाग देने पर जो राशि मिलती है उसे प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। वर्ष 2006 की विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सालाना आय 28,000 रुपये है।

सकल राष्ट्रीय उत्पाद: किसी देश में उत्पादित कुल आय को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं।

सकल घरेलू उत्पाद: किसी देश में उत्पादित कुल आय में से निर्यात से होने वाली आय को घटाने के बाद जो बचता है उसे सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

शिशु मृत्यु दर: प्रति 1000 जन्म में एक साल की उम्र से पहले मरने वाले बच्चों की संख्या को शिशु मृत्यु दर कहते हैं। यह आँकड़ा जितना कम हो विकास के दृष्टिकोण से उतना ही अच्छा माना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण पैमाना है क्योंकि इससे किसी देश में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता का पता चलता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में शिशु मृत्यु दर 30.15 है।


पुरुष और महिला का अनुपात: प्रति हजार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं। यदि यह आँकड़ा कम होता है तो यह समाज में महिलाओं के खिलाफ प्रचलित मानसिकता को दर्शाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों की तुलना में 940 महिलाओं की है।

जन्म के समय संभावित आयु: कोई वयस्क अधिकतम जिस आयु तक जीता है उसे संभावित आयु कहते हैं। इस आँकड़े से किसी देश में जीवन के स्तर का पता चलता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में पुरुषों की संभावित आयु 67 साल है और महिलाओं की संभावित आयु 72 साल है।

साक्षरता दर: साक्षर लोगों की संख्या विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक है। शिक्षा में बड़ी ताकत होती है क्योंकि शिक्षित व्यक्ति के लिये नए अवसर खुल जाते हैं। भारत के संदर्भ में ऐसा अक्सर देखा जाता है कि एक निर्धन परिवार से आने वाला लड़का आईआईटी में प्रवेश पा जाता है। एक बार आईआईटी में प्रवेश का मतलब होता है उस लड़के और उसके परिवार के लिये सुनहरा भविष्य। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर 74% है।

आधारभूत संरचना: सड़कें, रेल, विमान पत्तन, पत्तन और विद्युत उत्पादन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की जान होते हैं। अच्छी आधारभूत संरचना से आर्थिक गतिविधियाँ बेहतर हो जाती हैं जिससे हर तरफ समृद्धि आती है।


विकास के जरूरी लक्ष्यों का मिश्रण:

ऊपर दी गई लिस्ट को परिपूर्ण नहीं माना जा सकता है लेकिन इस लिस्ट में दिये गये लक्ष्य अन्य लक्ष्यों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हैं।

राज्यप्रति व्यक्ति आय (2003)शिशु मृत्यु दर (2003)साक्षरता दर (2001)कक्षा 1 से 4 तक निवल उपस्थिति अनुपात (1995 – 96)
पंजाब26000497081
केरल22800119191
बिहार5700604741

इस टेबल में दिये गये आँकड़े विकास के कुछ रोचक पहलुओं को दिखाते हैं। ये आँकड़े विकास के अलग अलग पहलुओं के बीच के रिश्ते को दिखाते हैं। यदि आप प्रति व्यक्ति आय की तुलना करें तो पंजाब सबसे धनी राज्य है और बिहार सबसे निर्धन। सबसे धनी राज्य होने के बावज्रूद पंजाब में शिशु मृत्यु दर केरल की तुलना में बहुत अधिक है। पंजाब की तुलना में कक्षा 1 से 4 तक निवल उपस्थिति अनुपात भी अच्छा है। लेकिन मानव विकास सूचक के हर पहलू पर बिहार इन सबसे पिछड़ा हुआ नजर आता है।