हाथी और चार दोस्त

किसी पेड़ पर एक गौरैया रहती थी। वह अपने घोंसले में अंडों से चूजों के निकलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। जब वह अंडों को से रही थी तभी उसका पति उसके लिए खाना लाने गया हुआ था। एक गुस्सैल हाथी वहीँ पास में तोड़-फोड़ कर रहा था। उसने पेड़ को जोर से हिलाया जिससे गौरैया का घोंसला टूट गया और अंडे फूट गए। गौरैया बहुत दुखी थी और जोर-जोर से रो रही थी। जब उसका पति वापस आया तो वह भी बहुत दुखी हुआ। दोनों उस हाथी से बदला लेने का मन बना चुके थे। वे अपने एक मित्र; जो कि एक कठफोड़वा था; के पास पहुंचे और उसे सारी बात बताई। वे हाथी से बदला लेने के लिए कठफोड़वा की मदद चाहते थे। उस कठफोड़वा के दो अन्य दोस्त थे; एक ततैया और एक मेंढक। उन्होंने मिलकर हाथी से बदला लेने की योजना बनाई।

woodpecker elephant

तय योजना पर सबसे पहले ततैये ने काम शुरू किया। उसने हाथी के कान में गाना गुनगुनाना शुरू किया। हाथी को उस संगीत में मजा आने लगा। जब हाथी संगीत में डूबा हुआ था, तो कठफोड़वा ने अगले चरण पर काम करना शुरू कर दिया। उसने हाथी की दोनों आँखें फोड़ दी। हाथी दर्द से कराहने लगा। उसके बाद मेंढक अपनी पलटन के साथ एक दलदल के पास गया और सब मिलकर टर्राने लगे। मेंढकों का टर्राना सुनकर हाथी को लगा कि पास में ही कोई तालाब है। वह उस आवाज की दिशा में गया और दलदल में फंस गया। इस तरह से हाथी धीरे-धीरे दलदल में फंस गया और मर गया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि एकता में काफी बल होता है।



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