8 हिंदी बसंत

बाज और साँप

NCERT Solution

प्रश्न 1: लेखक ने इस कहानी का शीर्षक कहानी के दो पात्रों के आधार पर रखा है। लेखक ने इस कहानी के लिए बाज और साँप को ही क्यों चुना होगा? क्या यही कहानी किसी और पात्रों द्वारा भी कही जा सकती है? आपस में चर्चा कीजिए।

उत्तर: बाज और साँप एक दूसरे उतने ही विपरीत हैं जितने की उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव। बाज रफ्तार और स्वतंत्रता का प्रतीक है जबकि साँप मंथर गति का प्रतीक है जिसकी दुनिया में विस्तार नाम की चीज नहीं है। बाज एक नजर में सैंकड़ों मील तक नजर रख सकता है जबकि साँप का परिप्रेक्ष्य बहुत छोटा होता है। इसलिए लेखक ने शीर्षक के लिये इन्हें चुना होगा। ऐसी कहानी तितली और तिलचट्टे को लेकर भी बनाई जा सकती है।

प्रश्न 2: घायल होने के बाद भी बाज ने यह क्यों कहा, “मुझे कोई शिकायत नहीं है।“ विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर: बाज ने अपनी जिंदगी भरपूर जी थी। उसने लगभग पूरी दुनिया देखी हो। उसने सूर्य को बहुत नजदीक से देखा हो। वह पूरे आकाश पर राज करता रहा होगा। इसलिए उसे अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है।

प्रश्न 3: बाज जिंदगी भर आकाश में ही उड़ता रहा फिर भी घायल होने का बाद भी वह उड़ना क्यों चाहता था?

उत्तर: यहाँ पर उड़ने का मतलब उस असीम आजादी से है जिसका आनंद बाज जैसे पक्षी उठाते हैं। उनका दायरा काफी बड़ा होता है। वैसे जीव को अगर किसी अंधेरे कोटर में रहना पड़े तो उसका दम घुटने लगेगा। इसलिए घायल होने के बाद भी बाज उड़ना चाहता था।

प्रश्न 4: साँप उड़ने की इच्छा को मूर्खतापूर्ण मानता था। फिर उसने उड़ने की कोशिश क्यों की?

उत्तर: बाज के कथन से साँप का कौतूहल बढ़ गया होगा। इसलिए उसने उड़ने की कोशिश की थी।

प्रश्न 5: बाज के लिए लहरों ने गीत क्यों गाया था?

उत्तर: बाज एक बहादुर की तरह वीरगति को प्राप्त हुआ था। इसलिए लहरों ने उसके लिए गीत गाया था।

प्रश्न 6: घायल बाज को देखकर साँप खुश क्यों हुआ होगा?

उत्तर: घायल बाज को देखकर साँप को उससे किसी खतरे का अहसास नहीं हुआ होगा। इसलिए घायल बाज को देखकर साँप खुश हुआ होगा।



ध्वनि

इस कविता में वसंत ऋतु की शुरुआत में जो माहौल होता है उसकी चर्चा की गई है। कविता का शीर्षक उस मधुर संगीतमय वातावरण की तरफ इशारा करता है जो वसंत ऋतु के शुरु होने पर रहता है। अभी तो मधुर वसंत की शुरुआत ही हुई है। इसलिए अभी उसका अंत नहीं होने वाला। हर सुंदर चीज का अस्तित्व थोड़े ही समय के लिए रहता है। या कई बार ऐसा होता है कि उसकी सुंदरता निहारने में हम इतने मगन हो जाते हैं कि हमें लगता है जैसे समय जल्दी बीत गया हो। वसंत साल का सबसे सुन्दर मौसम होता है और खुशनुमा होने की वजह से लगता है जैसे बहुत थोड़े समय के लिए ठहरता है। कवि ने इसी भावना को चित्रित करने की कोशिश की है।

लाख की चूड़ियाँ

लेखक को बचपन से मामा के गाँव जाने में इसलिए सबसे ज्यादा मजा आता था क्योंकि वहां बदलू उसके लिए ढ़ेर सारी रंग बिरंगी लाख की गोलियाँ बना देता था। लेखक का बाल्य मन इन गोलियों पर मोहित हो चुका था। चूँकि बदलू लेखक के ननिहाल का था इसलिए उसे ‘बदलू मामा’ कहा जाना चाहिए। लेकिन गाँव के अन्य बच्चे उसे ‘बदलू काका’ कहते थे। उनकी देखा-देखी लेखक भी उसे ‘बदलू काका’ ही कहा करता था।

बस की यात्रा

बस के सारे पेंच ढ़ीले हो गए थे। इसलिये इंजन चलने से पूरी ही बस इंजन की तरह शोर मचा रही थी और काँप भी रही थी। शोर शराबे और बुरी तरह हिलने डुलने से ऐसा लग रहा था कि वे लोग बस में नहीं बल्कि इंजन में ही बैठे हों।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

फोन या एसएमएस क्षणिक सुख देते हैं। जैसे फास्ट फूड कभी भी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद नहीं दे सकते हैं, उसी तरह पत्र का स्थायित्व कभी भी फोन या एसएमएस द्वारा नहीं मिल सकता है। एक पत्र को बार बार पढ़ा जा सकता है। पुराने पत्र पुरानी यादों को ताजा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि फोन पर की हुई बात वर्तमान में ही समाप्त हो जाती है।

क्या निराश हुआ जाए

जीवन में जरूरी नहीं कि हर बात आपके अनुकूल हो। अच्छाइयां और बुराइयां जीवन के सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। लेखक धोखा खाने के बाद भी निराश नहीं हुआ है। इसकी वजह है लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक रुख। यदि हम निरर्थक बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो उससे हमारी नकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा मिलता है।

जब सिनेमा ने बोलना सीखा

जब किसी एक भाषा की फिल्म में दूसरी भाषा की आवाज डाली जाती है तो उसे डब करना कहते हैं। हर भाषा की अपनी बारीकियां होती हैं। चाहे कितना भी अच्छा डब करने वाला कलाकार हो और कितनी भी आधुनिकतम तकनीक इस्तेमाल हो, भाषा की बारीकियों का अंतर नहीं मिटाया जा सकता है।

कामचोर

जब बच्चों ने घर की पूरी दुर्दशा कर दी तो अम्मा ने ऐसा कहा, क्योंकि उनका सोचना था कि उन बच्चों से कोई काम नहीं हो सकता और वे बिलावजह गंदगी ही फैलायेंगे। उनके मायके जाने की धमकी से अब्बा भी हार मान गये और बच्चों को फिर से पुराने तरीके से रहने को कहा।