8 हिंदी बसंत

जहाँ पहिया है

NCERT Solution

प्रश्न 1: आपके विचार से लेखक 'जंजीरों' द्वारा किन समस्याओं की ओर इशारा कर रहा है? क्या आप लेखक की इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

उत्तर: हमारा समाज पितृ-प्रधान समाज है जहाँ महिलाओं पर कई पाबंदियाँ लगाई जाती हैं। लेखक ने 'जंजीरों' द्वारा उन्हीं पाबंदियों की ओर इशारा किया है। लेखक का अवलोकन बिलकुल सटीक है। आज भी कई स्थान ऐसे हैं जहाँ महिलाओं को पढ़ने से रोका जाता है। कन्याओं की भ्रूण हत्या की जाती है। लड़कियों को यदि पढ़ाया भी जाता है तो केवल इसलिए कि उनकी शादी किसी खाते पीते घर में हो जाये।

प्रश्न 2: 'साइकिल आंदोलन' से पुडुकोट्टई की महिलाओं के जीवन में कौन कौन से बदलाव आए हैं?

उत्तर: साइकिल आंदोलन ने पुडुकोट्टई की महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। महिलाएँ अब पहले से अधिक स्वतंत्र हो गई हैं। कहीं आने जाने के लिए अब वे घर के पुरुषों की मोहताज नहीं हैं। अब उनके पास खाली समय भी बच पाता है क्योंकि साइकिल के इस्तेमाल से कहीं आने जाने में समय की बचत होती है।

प्रश्न 3: शुरुआत में पुरुषों ने इस आंदोलन का विरोध किया परंतु आर. साइकिल्स के मालिक ने इसका समर्थन किया, क्यों?

उत्तर: आर. साइकिल्स के मालिक ने इस आंदोलन का समर्थन इसलिए किया कि इसके कारण उसके दुकान की बिक्री बढ़ गई। उसकी बिक्री और मुनाफे में कई गुना का इजाफा हुआ।

प्रश्न 4: प्रारंभ में इस आंदोलन को चलाने में कौन कौन सी बाधा आई?

उत्तर: प्रारंभ में लोगों ने साइकिल चलाने वाली महिलाओं पर फब्तियाँ कसीं। उनपर अभद्र टीका टिप्पणी की।

प्रश्न 5: आपके विचार से लेखक ने इस पाठ का नाम 'जहाँ पहिया है' क्यों रखा होगा? अपने मन से इस पाठ का कोई दूसरा शीर्षक सुझाइए। अपने दिए हुए शीर्षक के पक्ष में तर्क दीजिए।

उत्तर: पहिया गतिशीलता का सूचक माना जाता है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भी चक्र है जो प्रगति का सूचक है। इस कहानी में साइकिल के कारण होने वाली प्रगति के बारे में बताया गया है। इसलिए लेखक इस पाठ के शीर्षक में पहिये का इस्तेमाल किया है। मेरे हिसाब से इस पाठ का एक और शीर्षक हो सकता है 'साइकिल से स्वतंत्रता' क्योंकि साइकिल चलाना सीखने से महिलाओं को एक नई आजादी मिली है।

प्रश्न 6: साइकिल चलाना ग्रामीण महिलाओं के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? समूह बनाकर चर्चा कीजिए।

उत्तर: आज भी ग्रामीण महिलाओं को कई प्रकार की बंदिशों में रहना पड़ता है। आज शहरों में महिलाएँ लगभग हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। हमारे देश में महिलाएँ ऊँचे पदों पर आसीन हो चुकी हैं; जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, आदि। लेकिन गाँवों की महिलाओं के लिए अभी यह सब किसी सपने जैसा ही है। साइकिल चलाने से महिलाएँ काफी हद तक स्वतंत्र हो जाती हैं और उनमें एक प्रकार की गतिशीलता आ जाती है। इसलिए साइकिल चलाना ग्रामीण महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 7: साइकिल को विनम्र सवारी क्यों कहा गया है?

उत्तर: जब आपके पास से कोई मोटरसाइकिल या मोटरकार फर्राटे से निकल जाती है तो हो सकता है कि आप भयभीत हो जायें। इंजन वाली गाड़ियाँ प्रदूषण भी फैलाती हैं। लेकिन साइकिल तो बड़े ही आराम से चलती है और पर्यावरण हितैषी होती है। इसलिए साइकिल को विनम्र सवारी कहा गया है।



ध्वनि

इस कविता में वसंत ऋतु की शुरुआत में जो माहौल होता है उसकी चर्चा की गई है। कविता का शीर्षक उस मधुर संगीतमय वातावरण की तरफ इशारा करता है जो वसंत ऋतु के शुरु होने पर रहता है। अभी तो मधुर वसंत की शुरुआत ही हुई है। इसलिए अभी उसका अंत नहीं होने वाला। हर सुंदर चीज का अस्तित्व थोड़े ही समय के लिए रहता है। या कई बार ऐसा होता है कि उसकी सुंदरता निहारने में हम इतने मगन हो जाते हैं कि हमें लगता है जैसे समय जल्दी बीत गया हो। वसंत साल का सबसे सुन्दर मौसम होता है और खुशनुमा होने की वजह से लगता है जैसे बहुत थोड़े समय के लिए ठहरता है। कवि ने इसी भावना को चित्रित करने की कोशिश की है।

लाख की चूड़ियाँ

लेखक को बचपन से मामा के गाँव जाने में इसलिए सबसे ज्यादा मजा आता था क्योंकि वहां बदलू उसके लिए ढ़ेर सारी रंग बिरंगी लाख की गोलियाँ बना देता था। लेखक का बाल्य मन इन गोलियों पर मोहित हो चुका था। चूँकि बदलू लेखक के ननिहाल का था इसलिए उसे ‘बदलू मामा’ कहा जाना चाहिए। लेकिन गाँव के अन्य बच्चे उसे ‘बदलू काका’ कहते थे। उनकी देखा-देखी लेखक भी उसे ‘बदलू काका’ ही कहा करता था।

बस की यात्रा

बस के सारे पेंच ढ़ीले हो गए थे। इसलिये इंजन चलने से पूरी ही बस इंजन की तरह शोर मचा रही थी और काँप भी रही थी। शोर शराबे और बुरी तरह हिलने डुलने से ऐसा लग रहा था कि वे लोग बस में नहीं बल्कि इंजन में ही बैठे हों।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

फोन या एसएमएस क्षणिक सुख देते हैं। जैसे फास्ट फूड कभी भी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद नहीं दे सकते हैं, उसी तरह पत्र का स्थायित्व कभी भी फोन या एसएमएस द्वारा नहीं मिल सकता है। एक पत्र को बार बार पढ़ा जा सकता है। पुराने पत्र पुरानी यादों को ताजा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि फोन पर की हुई बात वर्तमान में ही समाप्त हो जाती है।

क्या निराश हुआ जाए

जीवन में जरूरी नहीं कि हर बात आपके अनुकूल हो। अच्छाइयां और बुराइयां जीवन के सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। लेखक धोखा खाने के बाद भी निराश नहीं हुआ है। इसकी वजह है लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक रुख। यदि हम निरर्थक बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो उससे हमारी नकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा मिलता है।

जब सिनेमा ने बोलना सीखा

जब किसी एक भाषा की फिल्म में दूसरी भाषा की आवाज डाली जाती है तो उसे डब करना कहते हैं। हर भाषा की अपनी बारीकियां होती हैं। चाहे कितना भी अच्छा डब करने वाला कलाकार हो और कितनी भी आधुनिकतम तकनीक इस्तेमाल हो, भाषा की बारीकियों का अंतर नहीं मिटाया जा सकता है।

कामचोर

जब बच्चों ने घर की पूरी दुर्दशा कर दी तो अम्मा ने ऐसा कहा, क्योंकि उनका सोचना था कि उन बच्चों से कोई काम नहीं हो सकता और वे बिलावजह गंदगी ही फैलायेंगे। उनके मायके जाने की धमकी से अब्बा भी हार मान गये और बच्चों को फिर से पुराने तरीके से रहने को कहा।