गुड़िया

कुंवर नारायण

मेले से लाया हूँ इसको
छोटी सी प्यारी गुड़िया
बेच रही थी इसे भीड़ में बैठी नुक्कड़ पर बुढ़िया

इस कविता में खिलौनों के प्रति एक बच्चे के स्नेह और उसकी भावना को दिखाया गया है। बच्चा कहता है कि वह मेले से एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया लाया जिसे मेले में नुक्कड़ पर बैठकर एक बूढ़ी औरत बेच रही थी।

मोल भाव करके लाया हूँ
ठोक बजाकर देख लिया
आँखें खोल मूँद सकती है
यह कहती है पिया पिया

बच्चे ने अपनी उम्र के हिसाब से गुड़िया खरीदते समय मोल भाव भी किया है और गुड़िया की पूरी जाँच पड़ताल भी की है। गुड़िया आँखें झपका सकती है और पिया-पिया बोल सकती है।

आप चाहे कोई बड़ा सामान खरीदें या छोटा, आप पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उसे लेते हैं। हमारी ये स्वाभाविक आदत होती है कि हम कम से कम दामों में अच्छी से अच्छी चीज लेना चाहते हैं।

जड़ी सितारों से इसकी है
चुनरी लाल रंग वाली
बड़ी भली है इसकी आँखेंमतवाली काली काली

यहाँ पर गुड़िया की रूप रेखा का वर्णन किया गया है। गुड़िया की चुनरी सितारों से जड़ी है। उसकी काली मतवाली आँखें बड़ी सुंदर लग रही हैं।

ऊपर से है बड़ी सलोनी
अंदर गुदड़ी है तो क्या?
ओ गुड़िया तू इस पल मेरे
शिशुमन पर विजयी माया।

बच्चे को पता है कि गुड़िया बेकार की चीजों से बनी है लेकिन फिर भी वह गुड़िया की सुंदरता से प्रभावित है। किसी भी नये खिलौने की तरह गुड़िया ने बच्चे का मन जीत लिया है।

रखूँगा मैं तुझे खिलौनों
की अपनी अलमारी में
कागज के फूलों की नन्ही
रंगारंग फुलवारी में
नए-नए कपड़े गहनों से
तुझको रोज सजाऊंगा
खेल खिलौनों की दुनिया में
तुझको परी बनाऊँगा।

इन पंक्तियों में बच्चा गुड़िया के साज संभाल की योजना बना रहा है। वह इसे अपनी खिलौनों की अलमारी में रखेगा। उसने अलमारी में कागज के रंगीन फूलों की फुलवारी भी बना रखी है। वह रोज नये कपड़ों और गहनों से गुड़िया को सजाना चाहता है। वह गुड़िया को अपनी खिलौनों की दुनिया की परी बनाना चाहता है।



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