8 हिंदी दूर्वा

गुड़िया

कुंवर नारायण

मेले से लाया हूँ इसको
छोटी सी प्यारी गुड़िया
बेच रही थी इसे भीड़ में बैठी नुक्कड़ पर बुढ़िया

इस कविता में खिलौनों के प्रति एक बच्चे के स्नेह और उसकी भावना को दिखाया गया है। बच्चा कहता है कि वह मेले से एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया लाया जिसे मेले में नुक्कड़ पर बैठकर एक बूढ़ी औरत बेच रही थी।

मोल भाव करके लाया हूँ
ठोक बजाकर देख लिया
आँखें खोल मूँद सकती है
यह कहती है पिया पिया

बच्चे ने अपनी उम्र के हिसाब से गुड़िया खरीदते समय मोल भाव भी किया है और गुड़िया की पूरी जाँच पड़ताल भी की है। गुड़िया आँखें झपका सकती है और पिया-पिया बोल सकती है।

आप चाहे कोई बड़ा सामान खरीदें या छोटा, आप पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उसे लेते हैं। हमारी ये स्वाभाविक आदत होती है कि हम कम से कम दामों में अच्छी से अच्छी चीज लेना चाहते हैं।

जड़ी सितारों से इसकी है
चुनरी लाल रंग वाली
बड़ी भली है इसकी आँखेंमतवाली काली काली

यहाँ पर गुड़िया की रूप रेखा का वर्णन किया गया है। गुड़िया की चुनरी सितारों से जड़ी है। उसकी काली मतवाली आँखें बड़ी सुंदर लग रही हैं।

ऊपर से है बड़ी सलोनी
अंदर गुदड़ी है तो क्या?
ओ गुड़िया तू इस पल मेरे
शिशुमन पर विजयी माया।

बच्चे को पता है कि गुड़िया बेकार की चीजों से बनी है लेकिन फिर भी वह गुड़िया की सुंदरता से प्रभावित है। किसी भी नये खिलौने की तरह गुड़िया ने बच्चे का मन जीत लिया है।

रखूँगा मैं तुझे खिलौनों
की अपनी अलमारी में
कागज के फूलों की नन्ही
रंगारंग फुलवारी में
नए-नए कपड़े गहनों से
तुझको रोज सजाऊंगा
खेल खिलौनों की दुनिया में
तुझको परी बनाऊँगा।

इन पंक्तियों में बच्चा गुड़िया के साज संभाल की योजना बना रहा है। वह इसे अपनी खिलौनों की अलमारी में रखेगा। उसने अलमारी में कागज के रंगीन फूलों की फुलवारी भी बना रखी है। वह रोज नये कपड़ों और गहनों से गुड़िया को सजाना चाहता है। वह गुड़िया को अपनी खिलौनों की दुनिया की परी बनाना चाहता है।



दो गौरैया

माँ यह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए, इसलिए वे पिताजी की मदद नहीं कर रहीं थीं। वो हंस इसलिए रहीं थीं कि उन्हें पता था कि पिताजी अंदर से एक दयालू इंसान हैं। वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे चिड़ियों को ज्यादा हानि पहुँचे। वो शायद ये भी जानती थीं कि थोड़े प्रयास के बाद पिताजी हार मानकर शांत बैठ जाएंगे।

सागर यात्रा

समुद्र का पानी खारा होने की वजह से ना तो पीने लायक होता है ना ही नहाने लायक। ज्यादा खारेपन की वजह से साबुन भी उसमें बेअसर हो जाता है। इसलिए समुद्र के पानी से ना तो हम नहा सकते हैं, ना ही कपड़े धो सकते हैं। इसलिए लेखक और उसके साथियों को समुद्र यात्रा में पानी की समस्या हुई।

उठ किसान ओ

इस कविता में किसान से जग जाने का आह्वान किया गया है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि खेती के नए तरीके हमारे देश में इस्तेमाल होने लगे हैं, फिर भी बारिश का महत्व पहले की तरह ही है।

एक खिलाड़ी की कुछ यादें

लेखक ने एक बार लाहौर में ध्यानचंद को हॉकी खेलते देखा था। ध्यानचंद की दक्षता ने लेखक को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लेखक के शब्दों में एक महान खिलाड़ी आपको अपने खेल की ओर आकर्षित करता है। उस खिलाड़ी की महानता आपके लिए एक प्रेरणाश्रोत का काम करती है।

सस्ते का चक्कर

अजय के अन्य दोस्तों ने कहा कि नरेंद्र की आदतें अच्छी नहीं है। वह चटोर लड़का है। अजय को उसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि नरेंद्र बहुत ही बदनाम लड़का था।

वल्ली अम्माई

बस में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना ज्यादातर लोगों को पसंद आता है। वल्ली को भी खिड़की के पास वाली सीट मिल गयी थी। खिड़की के बाहर का दृश्य वल्ली को बहुत सुंदर लग रहा था। सड़क की एक ओर नहर थी। नहर के पीछे ताड़ के पेड़ थे।

अन्याय के खिलाफ

श्री राम राजू भी एक कोया आदिवासी था। उसने हाई स्कूल तक की पढ़ाई थी। वह 18 साल की उम्र में साधू बन गया था। उसके ज्ञान के कारण लोग उसे अपना नेता मानने लगे थे। जब अंग्रेजों ने कोया आदिवासियों का राशन रोक दिया तो उनपर कहर टूट पड़ा। श्री राम राजू ने अपने लोगों की तकलीफ का अंत करने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।

केशव शंकर पिल्लई

शुरु में पिल्लई जगह-जगह प्रदर्शनी लगाकर अपना संग्रह लोगों को दिखाते थे। लेकिन जब उनका संग्रह बहुत बड़ा हो गया तो उन्हें कहीं भी लाने ले जाने में कठिनाई होने लगी। उनके टूटने का भी खतरा बढ़ने लगा। इसलिए पिल्लई ने एक स्थाई संग्रहालय बनाने की योजना बनाई। इसके अलावा देश विदेश के लोगों ने इस काम में उनका पूरा सहयोग किया।