8 हिंदी बसंत

कामचोर

इस्मत चुगताई

NCERT Solution

प्रश्न 1: कहानी में मोटे-मोटे किस काम के है? किनके बारे में और क्यों कहा गया है?

उत्तर: कहानी में घर के बच्चे जो किशोरावस्था के लगते हैं, उनके बारे में कहा गया है। उस घर में नौकर चाकरों की कमी नहीं थी। बच्चों को अपना कोई भी काम करने की आदत नहीं थी। इसलिए उनके अब्बा ने उन्हें नाकारा कहा है।

प्रश्न 2: बच्चों के ऊधम मचाने के कारण घर की क्या दुर्दशा हुई?

उत्तर: बच्चों के ऊधम मचाने के कारण सारा सामान अस्त व्यस्त हो गया था। अच्छे-अच्छे कपड़े गंदे हो गये थे। सब्जी बेचने वाली की सब्जियां बर्बाद हो गई थीं। पूरे घर में लगता था जैसे भूचाल आया हो।

प्रश्न 3: “या तो बच्चा राज कायम कर लो या मुझे रख लो” अम्मा ने कब कहा और इसका क्या परिणाम हुआ?

उत्तर: जब बच्चों ने घर की पूरी दुर्दशा कर दी तो अम्मा ने ऐसा कहा, क्योंकि उनका सोचना था कि उन बच्चों से कोई काम नहीं हो सकता और वे बिलावजह गंदगी ही फैलायेंगे। उनके मायके जाने की धमकी से अब्बा भी हार मान गये और बच्चों को फिर से पुराने तरीके से रहने को कहा।

प्रश्न 4: कामचोर कहानी क्या संदेश देती है?

उत्तर: किसी भी पुरानी आदत को एक दिन में नहीं सुधारा जा सकता है। उसके लिए समय और धैर्य की जरूरत होती है। अब्बा ने एक ही दिन में खाना ना देने की धमकी देकर चाहा कि बच्चों को सुधार लेंगे, लेकिन बदले में सर फुटौव्वल ही हुई।

प्रश्न 5: क्या बच्चों ने उचित निर्णय लिया कि अब चाहे जो भी हो हिलकर पानी भी नहीं पियेंग़े?

उत्तर: बच्चों ने बिलकुल गलत फैसला लिया। जब बच्चे बड़े होने लगते हैं तो उन्हें खुद जिम्मेदारियाँ उठानी शुरु कर देनी चाहिए। यही उम्र होती है जिसमें भविष्य के लिए अच्छी आदतों की नींव डाली जाती है।

प्रश्न 6: घर के सामान्य काम हों या निजी काम, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें करना आवश्यक क्यों है?

उत्तर: खासकर आज के जमाने में जब हर कोई एकल परिवार की तरफ जा रहा है, अपना काम करना हमेशा फायदेमंद होता है। ज्यादातर शहरों में अब नौकरों का मिलना मुश्किल हो गया है। अपना काम करने से स्वावलंबी बनने की आदत भी हम सीखते हैं।

प्रश्न 7: भरा पूरा परिवार कैसे सुखद बन सकता है और कैसे दुखद? कामचोर कहानी के आधार पर निर्णय कीजिए।

उत्तर: इस कहानी में ये दिखाया गया है कि एक संयुक्त परिवार में किस तरह घर के सारे कामों का बोझ महिलाओं पर रहता है। कहानी में आपा खीर पर चांदी क वर्क लगा रही हैं, तो फूफी दुपट्टे पर कशीदा कर रही हैं। दूसरी तरफ घर के पुरुष आराम फरमा रहे हैं, जैसे कि चाचा खाट पर सो रहे हैं। इससे घर की महिलायें ज्यादा प्रताड़ित महसूस कर सकती हैं। यदि हर कोई घर के काम में हाथ बटाएगा तो उससे किसी पर बोझ नहीं पड़ेगा और लोगों में ज्यादा सौहार्द्र बना रहेगा। बच्चों ने तो जिम्मेदारियां संभालने की बजाय दूसरों की नाक में दम कर दिया था। इसलिए अम्मा ने भी मायके जाने की धमकी दे दी।

प्रश्न 8: बड़े होते बच्चे किस प्रकार माता पिता के सहयोगी हो सकते हैं और किस प्रकार भार?

उत्तर: बड़े होते बच्चे यदि घर और बाहर के कामों में माता-पिता का हाथ बटाएंगे तो इससे वे सहयोगी बन सकते हैं। यदि वे ये कोशिश करेंगे कि माता-पिता उनकी सारी जरूरतें पूरी करें और वो अपना शरीर तक ना हिलाएं तो इससे वे भार बन जायेंगे।

प्रश्न 9: कामचोर कहानी एकल परिवार की है या संयुक्त परिवार की? इन दोनों में क्या अंतर होते हैं?

उत्तर: कामचोर कहानी एक संयुक्त परिवार की कहानी है। इस कहानी में कई रिश्तेदारों का उल्लेख हुआ है। दोनों तरह के परिवारों की अपनी खूबियाँ और कमजोरियाँ होती हैं। संयुक्त परिवार में बच्चों का विकास बेहतर होता है और उन्हें खुशियाँ बाँटनी आती है। एकल परिवार में लोगों को जरूरी निजी स्वतंत्रता मिलती है, जिससे आत्मविश्वास का विकास होता है।

अक्सर संयुक्त परिवार में चुनिंदा लोगों पर ही सारा बोझ होता है, और बाकी लोग एक परजीवी की तरह अपना जीवन यापन करते हैं। एकल परिवार के लोग भावनात्मक सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं।

भारत में दोनों का मिला जुला रूप ज्यादा देखने को मिलता है। लोग अपने रोजगार वाली जगह पर रहते हुए एकल परिवार का आनंद उठाते हैं। जब वे छुट्टियों में अपने पैतृक निवास पर जाते हैं तो वहाँ उन्हें संयुक्त परिवार का आनंद मिलता है।

प्रश्न 10: कहानी में एक समृद्ध परिवार के ऊधमी बच्चों का चित्रण है। आपके हिसाब से उनकी आदत क्यों बिगड़ी होगी?

उत्तर: समृद्ध परिवार के बच्चों में यह मानसिकता विकसित हो सकती है कि उनकी हर जरूरत पूरी करने के लिए कोई न कोई हमेशा तैयार रहता है। कहानी में बच्चों की जरूरतों को पूरी करने के लिये नौकर-चाकर हैं, तथा बहुत सी महिला रिश्तेदार हैं। यहाँ तक कि उनको नहलाने के लिए भी नौकर तैयार हैं। उन्हें अपने व्यक्तिगत काम भी खुद से नहीं करने की आदत पड़ी हुई है।

इसमें बच्चों की कोई गलती नहीं है। गलती ज्यादातर उनकी अम्मा की लगती है। उनके अब्बा तो उनसे काम करवाना चाहते हैं, और उसके लिए एक असफल प्रयास भी करते हैं। लेकिन अम्मा यथास्थिति को बने रहने देना चाहती हैं। यह उनके मायके जाने की धमकी से पता चलता है। बच्चों में अच्छी आदत विकसित करने में माँ और बाप दोनों की अहम भूमिका होती है।



ध्वनि

इस कविता में वसंत ऋतु की शुरुआत में जो माहौल होता है उसकी चर्चा की गई है। कविता का शीर्षक उस मधुर संगीतमय वातावरण की तरफ इशारा करता है जो वसंत ऋतु के शुरु होने पर रहता है। अभी तो मधुर वसंत की शुरुआत ही हुई है। इसलिए अभी उसका अंत नहीं होने वाला। हर सुंदर चीज का अस्तित्व थोड़े ही समय के लिए रहता है। या कई बार ऐसा होता है कि उसकी सुंदरता निहारने में हम इतने मगन हो जाते हैं कि हमें लगता है जैसे समय जल्दी बीत गया हो। वसंत साल का सबसे सुन्दर मौसम होता है और खुशनुमा होने की वजह से लगता है जैसे बहुत थोड़े समय के लिए ठहरता है। कवि ने इसी भावना को चित्रित करने की कोशिश की है।

लाख की चूड़ियाँ

लेखक को बचपन से मामा के गाँव जाने में इसलिए सबसे ज्यादा मजा आता था क्योंकि वहां बदलू उसके लिए ढ़ेर सारी रंग बिरंगी लाख की गोलियाँ बना देता था। लेखक का बाल्य मन इन गोलियों पर मोहित हो चुका था। चूँकि बदलू लेखक के ननिहाल का था इसलिए उसे ‘बदलू मामा’ कहा जाना चाहिए। लेकिन गाँव के अन्य बच्चे उसे ‘बदलू काका’ कहते थे। उनकी देखा-देखी लेखक भी उसे ‘बदलू काका’ ही कहा करता था।

बस की यात्रा

बस के सारे पेंच ढ़ीले हो गए थे। इसलिये इंजन चलने से पूरी ही बस इंजन की तरह शोर मचा रही थी और काँप भी रही थी। शोर शराबे और बुरी तरह हिलने डुलने से ऐसा लग रहा था कि वे लोग बस में नहीं बल्कि इंजन में ही बैठे हों।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

फोन या एसएमएस क्षणिक सुख देते हैं। जैसे फास्ट फूड कभी भी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद नहीं दे सकते हैं, उसी तरह पत्र का स्थायित्व कभी भी फोन या एसएमएस द्वारा नहीं मिल सकता है। एक पत्र को बार बार पढ़ा जा सकता है। पुराने पत्र पुरानी यादों को ताजा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि फोन पर की हुई बात वर्तमान में ही समाप्त हो जाती है।

क्या निराश हुआ जाए

जीवन में जरूरी नहीं कि हर बात आपके अनुकूल हो। अच्छाइयां और बुराइयां जीवन के सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। लेखक धोखा खाने के बाद भी निराश नहीं हुआ है। इसकी वजह है लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक रुख। यदि हम निरर्थक बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो उससे हमारी नकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा मिलता है।

जब सिनेमा ने बोलना सीखा

जब किसी एक भाषा की फिल्म में दूसरी भाषा की आवाज डाली जाती है तो उसे डब करना कहते हैं। हर भाषा की अपनी बारीकियां होती हैं। चाहे कितना भी अच्छा डब करने वाला कलाकार हो और कितनी भी आधुनिकतम तकनीक इस्तेमाल हो, भाषा की बारीकियों का अंतर नहीं मिटाया जा सकता है।

कामचोर

जब बच्चों ने घर की पूरी दुर्दशा कर दी तो अम्मा ने ऐसा कहा, क्योंकि उनका सोचना था कि उन बच्चों से कोई काम नहीं हो सकता और वे बिलावजह गंदगी ही फैलायेंगे। उनके मायके जाने की धमकी से अब्बा भी हार मान गये और बच्चों को फिर से पुराने तरीके से रहने को कहा।