लोकतंत्र के परिणाम

NCERT Solution

प्रश्न 1. लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी, जिम्मेवार और वैध सरकार का गठन करता है?

उत्तर: लोकतांत्रिक सरकार वैध होती है क्योंकि इसे जनता द्वारा चुना जाता है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र किन स्थितियों में सामाजिक विविधता को सँभालता है और उनके बीच सामंजस्य बैठाता है?

उत्तर: जहाँ सामाजिक विविधता होगी वहाँ टकराव होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र से हमें भिन्नताओं का सम्मान करने की सीख मिलती है। लोकतंत्र में आम राय बनाते समय सामाजिक विविधताओं को सम्मान दिया जाता है। किसी भी अहम फैसले को लेते वक्त समाज के विभिन्न वर्गों की आकांछाओं का सम्मान किया जाता है। इस तरह से लोकतंत्र सामाजिक विविधता को संभालता है और उनके बीच सामंजस्य बैठाता है।


प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों के पक्ष या विपक्ष में तर्क दें:

(a) औद्योगिक देश ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का भार उठा सकते हैं पर गरीब देशों को आर्थिक विकास करने के लिए तानाशाही चाहिए।

उत्तर: एक तरफ हमारे पास संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देश हैं जहाँ लोकतंत्र है तो दूसरी तरफ कई ऐसे देश भी हैं जहाँ गरीबी पर काफी हद तक काबू पाई जा चुकी है। इनमें से अधिकतर देशों में लोकतांत्रिक सरकार है। कई ऐसे भी देश हैं जहाँ तानाशाही है लेकिन भीषण गरीबी है। इसलिए हम कह सकते हैं कि आर्थिक विकास को तय करने में शासन व्यवस्था एकलौता कारक नहीं हो सकता।

(b) गरीब देशों की सरकार को अपने ज्यादा संसाधन गरीबी को कम करने और आहार, कपड़ा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर लगाने की जगह उद्योगों और बुनियादी आर्थिक ढ़ाँचे पर खर्च करने चाहिए।

उत्तर: अर्थव्यवस्था को सुधारने में उद्योगों और बुनियादी आर्थिक ढ़ाँचे का अपना महत्व है। लेकिन इनके साथ मानव संसाधन का विकास भी महत्वपूर्ण है। इसलिए आहार, कपड़ा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर भी संसाधन व्यय करने की जरूरत है।

(c) नागरिकों के बीच आर्थिक समानता अमीर और गरीब, दोनों तरह के लोकतांत्रिक देशों में है।

उत्तर: आर्थिक असमानता है दुनिया के हर देश में है; चाहे वहाँ किसी भी प्रकार की सरकार क्यों न हो। रूस और चीन जैसे देशों में समाजवाद विफल ही रहा है। इससे यह साबित होता है कि ऐसा समाज बनाना असंभव है जहाँ सबकी आय एक समान हो।

(d) लोकतंत्र में सभी को एक ही वोट का अधिकार है। इसका मतलब है कि लोकतंत्र में किसी तरह का प्रभुत्व और टकराव नहीं होता।

उत्तर: हर मनुष्य का यह नैसर्गिक गुण होता है कि किसी दूसरे पर अपना प्रभुत्व जमाये। यही बात लोगों के समूह पर भी लागू होती है। इसलिए हर समाज में प्रभुत्व के टकराव की पूरी संभावना रहती है। लेकिन यह बात भी सच है कि लोकतंत्र की मदद से इस टकराव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


प्रश्न 4. नीचे दिए गये ब्यौरों में लोकतंत्र की चुनौतियों की पहचान करें। ये स्थितियाँ किस तरह नागरिकों के गरिमापूर्ण, सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन के लिए चुनौती पेश करती हैं। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत-संस्थागत उपाय भी सुझाएँ:

(a) उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ओड़िसा में दलितों और गैर-दलितों के प्रवेश के लिए अलग-अलग दरवाजा रखने वाले एक मंदिर को एक ही दरवाजे से सबको प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी।

उत्तर: यहाँ पर लोगों की गरिमा और स्वतंत्रता की चुनौती की बात आती है। उच्च न्यायालय ने दलितों को समान अधिकार दिलाने के लिए हस्तक्षेप किया था।

(b) भारत के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

उत्तर: किसान की आत्महत्या से आर्थिक असमानता की चुनौती का पता चलता है। इसे रोकने के लिए सरकार कई कदम उठा सकती है। किसान का कर्जा माफ करना, कृषि उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, आदि ऐसे ही उपाय हैं।

(c) जम्मू-कश्मीर के गंडवारा में मुठभेड़ बताकर जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा तीन नागरिकों की हत्या करने के आरोप को देखते हुए इस घटना के जाँच के आदेश दिए गये।

उत्तर: यह उदाहरण स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समानता के अधिकर की चुनौती को दर्शाता है। इस मामले में पुलिस और न्यायपालिका को सही कदम उठाने की जरूरत है।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में इनमें से कौन सा विचार सही है – लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं ने सफलतापूर्वक:

  1. लोगों के बीच टकराव को समाप्त कर दिया है।
  2. लोगों के बीच आर्थिक असमानताएँ समाप्त कर दी है।
  3. हाशिए के समूहों से कैसा व्यवहार हो, इस बारे में सारे मतभेद मिटा दिए हैं।
  4. राजनीतिक गैर बराबरी के विचार को समाप्त कर दिया है।

उत्तर: (d) राजनीतिक गैर बराबरी के विचार को समाप्त कर दिया है।

प्रश्न 6. लोकतंत्र के मूल्यांकन के लिहाज से इनमें कोई एक चीज लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के अनुरूप नहीं है। उसे चुनें:

  1. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
  2. व्यक्ति की गरिमा
  3. बहुसंख्यक्तों का शासन
  4. कानून से समक्ष समानता

उत्तर: (c) बहुसंख्यक्तों का शासन


प्रश्न 7. लोकतांत्रिक व्यवस्था के राजनीतिक और सामाजिक असमानताओं के बारे में किए गए अध्ययन बताते हैं कि

  1. लोकतंत्र और विकास साथ ही चलते हैं।
  2. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।
  3. तानाशाही में असमानताएँ नहीं होती।
  4. तानाशाहियाँ लोकतंत्र से बेहतर साबित हुई हैं।

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।

प्रश्न 8. नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़ें:

नन्नू एक दिहाड़ी मजदूर है। वह पूर्वी दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती वेलकम मजदूर कॉलोनी में रहता है। उसका राशन कार्ड गुम हो गया और जनवरी 2006 में उसने डुप्लीकेट राशन कार्ड बनाने के लिए अर्जी दी। अगले तीन महीनों तक उसने राशन विभाग के दफ्तर के कई चक्कर लगाए लेकिन वहाँ तैनात किरानी और अधिकारी उसका काम करने या उसकी अर्जी की स्थिति बताने को कौन कहे उसको देखने तक के लिए तैयार न थे। आखिरकार उसने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए अपनी अर्जी की दैनिक प्रगति का ब्यौरा देने का अवेदन किया।

इसके साथ ही उसने इस अर्जी पर काम करने वाले अधिकारियों के नाम और काम न करने की सूरत में उनके खिलाफ होने वाली कार्रवाई का ब्यौरा भी माँगा। सूचना के अधिकार वाला आवेदन देने के हफ्ते भर के अंदर खाद्य विभाग का एक इंस्पेक्टर उसके घर आया और उसने नन्नू को बताया कि तुम्हारा राशन कार्ड तैयार है और तुम दफ्तर आकर उसे ले जा सकते हो। अगले दिन जब नन्नू राशन कार्ड लेने गया तो उस इलाके के खाद्य और आपूर्ति विभाग के अगले सबसे बड़े अधिकारी ने गर्मजोशी से उसका स्वागत किया। इस अधिकारी ने उसे चाय की पेशकश की और कहा कि अब आपका काम हो गया है इसलिए सूचना के अधिकार वाला अपना आवेदन आप वापस ले लें।

नन्नू का उदाहरण क्या बताता है? नन्नू के इस आवेदन का अधिकारियों पर क्या असर हुआ? अपने माँ पिताजी से पूछिए कि अपनी समस्याओं के लिए सरकारी कर्मचारियों के पास जाने का उनका अनुभव कैसा रहा है।

उत्तर: नन्नू के उदाहरण से पता चलता है कि सूचना के अधिकार ने आम लोगों के हाथों में एक शक्ति दे दी है जिसका इस्तेमाल करके वह सरकार के कामकाज का हिसाब मांग सकता है। इस अधिकार के कारण अब सरकारी दफ्तरों के कामकाज में गति आई है। नन्नू के आवेदन का ही असर था कि उस दफ्तर के अधिकारी हरकत में आये और उसका राशन कार्ड बन गया। मेरे माता पिता बताते हैं अधिकतर सरकारी दफ्तरों में कोई भी काम समय पर नहीं होता है। कुछ काम के लिए तो लोगों को महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं।



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