राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखाएँ

परिवहन

परिवहन हमारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कच्चे माल को कारखानों तक पहुँचाने और उत्पाद को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए परिवहन जरूरी होता है। किसी देश का परिवहन तंत्र जितना कुशल होगा वहाँ आर्थिक विकास उतनी ही तेजी से होगा। परिवहन और संचार तंत्र मिलकर देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

आज का भारत दुनिया के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में रेल, सड़क परिवहन, हवाई यातायात, अखबार, रेडियो, टेलिविजन, सिनेमा, इंटरनेट, आदि का हमेशा से योगदान रहा है।


सड़क परिवहन

भारत में सड़कों के जाल को आज दुनिया के विशाल सड़क नेटवर्कों में से एक माना जाता है। भारत में कुल 23 लाख किलोमीटर सड़क है। रेल की तुलना में सड़कें निर्माण और रखरखाव के मामले में बेहतर होती हैं। रेल परिवहन की तुलना में सड़क परिवहन का महत्व बढ़ने के कुछ कारण निम्नलिखित हैं:


भारत में सड़कों के प्रकार

भारत में सड़कों की क्षमता के आधार पर इन्हें छ: प्रकारों में बाँटा गया है:

स्वर्णिम चतुर्भुज महाराजमार्ग: दिल्ली-कोलकाता-चेन्नई-मुम्बई और दिल्ली को जोड़ने वाली यह 6 लेन वाली महाराजमार्ग की सड़क परियोजना है। इस महाराजमार्ग का उत्तर दक्षिण कॉरिडोर श्रीनगर और कन्याकुमारी को आपस में जोड़ता है, तथा पूर्व पश्चिम कॉरिडोर सिलचर और पोरबंदर को आपस में जोड़ता है। भारत के बड़े शहरों के बीच की दूरी को कम करना ही इस सुपर हाइवे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इस परियोजना को कार्यरूप दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सुदूर हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं और देश की मुख्य सड़क प्रणाली बनाते हैं। इनके निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट की है।

राज्य राजमार्ग: किसी भी राज्य की राजधानी को विभिन्न जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कों को राज्य राजमार्ग की श्रेणी में रखा जाता है। इनके निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी स्टेट पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट की है।


जिला मार्ग: जिला मुख्यालय को जिले के अन्य भागों से जोड़ने वाली सड़कों को जिला मार्ग कहते हैं। इन सड़कों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला परिषद की है।

अन्य सड़कें: ग्रामीण सड़कों को इस श्रेणी में रखा जाता है। प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इन सड़कों के निर्माण में तेजी आई है। देश के हर गाँव को पक्की सड़क से किसी मुख्य शहर से जोड़ने के उद्देश्य से इस योजना को शुरु किया गया था।

सीमांत सड़कें: सीमा पर स्थित सड़कों को इस श्रेणी में रखा गया है। इनके निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन की है। सीमा पर स्थित पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में सामरिक महत्व की सड़कें बनाने के उद्देश्य से 1960 में इस संस्था का गठन किया गया था। सीमांत सड़कों ने दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान बना दिया है।

सड़क घनत्व

प्रति 100 वर्ग किमी में उपलब्ध सड़क की लंबाई को सड़क घनत्व कहते हैं। हमारे देश में विविध प्रकार की भौगोलिक संरचना पाई जाती है। इसलिये यहाँ सड़कों का फैलाव एक समान नहीं है। जम्मू कश्मीर में सड़क घनत्व 10 किमी प्रति वर्ग किमी है तो केरल में यह आँकड़ा 375 किमी है। 1996 – 97 के आँकड़ों के अनुसार पूरे देश का सड़क घनत्व 75 किमी है।

लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आज भी भारत की सड़कें काफी नहीं हैं। इतनी विशाल जनसंख्या के हिसाब से सड़कों का जाल कम पड़ जाता है। आधे से अधिक सड़कें कच्ची हैं। कई शहरों में तंग और भीड़-भाड़ भरी सड़कें हैं। अधिकतर पुल और पुलिया पुराने हो गये हैं और संकरे हैं।



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