प्रमुख समुद्री पत्तन

भारत की तटरेखा 7,516.6 किमी लंबी है। इसमें 12 प्रमुख और 181 मध्यम और छोटे पत्तन हैं। देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 95% प्रमुख पत्तनों से संचालित होता है। विभाजन के बाद कराची पत्तन भारत के पास से निकल गया। इससे मुंबई के पत्तन पर लोड बढ़ गया। उस लोड को कम करने के उद्देश्य से आजादी के तुरंत बाद कच्छ में कांडला के पत्तन को विकसित किया गया। कांडला का पत्तन एक ज्वारीय पत्तन है। यह जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के औद्योगिक और खाद्यान्न निर्यात और आयात को सुचारू तरीके से संचालित करता है।

प्राकृतिक रूप से खुले और बड़े हार्बर के कारण मुंबई एक विशाल पत्तन है। मुम्बई के पत्तन पर से भीड़ कम करने के लिए पास में ही जवाहरलाल नेहरू पत्तन का निर्माण किया गया। गोवा का मारमागाओ पत्तन लौह अयस्क के निर्यात के लिए एक अग्रणी पत्तन है। इस पत्तन से भारत के लौह अयस्क के निर्यात का 50% हिस्सा जाता है।


कर्नाटक के न्यू मंगलोर पत्तन से कुद्रेमुख की खानों से निकलने वाला लौह अयस्क निर्यात होता है। कोची का पत्तन सुदूर दक्षिण पश्चिम में है जो लैगून के मुहाने पर स्थित है और जहाँ प्राकृतिक हार्बर है।

पूर्वी तट पर तामिलनाडु का तूतीकोरन पत्तन है। यहाँ एक प्राकृतिक हार्बर है और आस पास के इलाके समृद्ध हैं। इसलिये इस पत्तन से श्रीलंका, मालदीव और भारत के तटीय इलाकों के लिये व्यापार संचालित होता है।

चेन्नई का पत्तन सबसे पुराने कृत्रिम पत्तनों में से एक है। व्यापार की मात्रा और माल ढ़ुलाई के मामले में इसका स्थान मुम्बई के बाद दूसरा है।

विशाखापत्तनम जमीन से घिरा हुआ, गहरा और सुरक्षित पत्तन है। इस पत्तन का निर्माण मूल रूप से लौह अयस्क के निर्यात के लिए किया गया था।

उड़ीसा का पारादीप पत्तन विशेषत: लौह अयस्क का निर्यात करता है।

कोलकाता में एक अंत:स्थलीय नदी पत्तन है। यह पत्तन गंगा और ब्रह्मपुत्र के मैदानों के समृद्ध क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यह एक ज्वारीय पत्तन है। इसलिए इस पत्तन में हुगली के तलछट के जमाव को नियमित रूप से साफ करने की जरूरत पड़ती है। कोलकाता के पत्तन पर से भीड़ हटाने के उद्देश्य से हल्दिया के पत्तन का निर्माण किया गया।

वायु परिवहन

1953 में वायु परिवहन का राष्ट्रीकरण हुआ था। उससे पहले वायु परिवहण केवल निजी कंपनी के हाथों में था। बाद में आर्थिक उदारीकरण के दौर में निजी कम्पनियों को भी वायु परिवहन के क्षेत्र में अनुमति दे दी गई। आज अंतर्देशीय तथा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की सेवा कई निजी कम्पनियों द्वारा भी दी जा रही है। पवनहंस हेलिकॉप्टर लिमिटेड ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कमिशन को और उत्तरी और पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम इलाकों के लिये हेलिकॉप्टर सेवा प्रदान करती है।

वायु परिवहन से दुर्गम इलाकों; जैसे ऊँचे पहाड़, कठिन रेगिस्तान, घने जंगल और दूर दराज के द्वीपों तक भी आसानी से पहुँचा जा सकता है।


संचार सेवाएँ

भारत में टेलिविजन, रेडियो, प्रेस, फिल्मों, टेलिफोन, आदि द्वारा निजी दूरसंचार और जनसंचार की सुविधा उपलब्ध है।

भारतीय डाक: भारतीय डाक सेवा का नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा नेटवर्क है। डाक से पार्सल और चिट्ठियाँ भेज सकते हैं। कार्ड और लिफाफों को फर्स्ट क्लास मेल माना जाता है। बुक पैकेट, अखबार और पत्रिकाओं को सेकंड क्लास मेल का दर्जा दिया जाता है। फर्स्ट क्लास के मेल को हवाई जहाज द्वारा भेजा जाता है जबकि सेकंड क्लास के मेल को भू परिवहन और जल परिवहन द्वारा भेजा जाता है। हाल ही में बड़े शहरों और महानगरों में तेजी से डाक पहुँचाने के लिए छ: चैनलों की शुरुआत की गई है। इन चैनलों के नाम हैं; राजधानी चैनल, मेट्रो चैनल, ग्रीन चैनल, बिजनेस चैनल, बल्क मेल चैनल और पीरियोडिकल चैनल।

टेलिफोन: भारत का टेलिफोन नेटवर्क एशिया के बड़े नेटवर्कों में से एक है। सूचना प्रसारण को हर स्तर तक अच्छा बनाने के उद्देश्य से सरकार ने देश के हर गाँव में 24 घंटे एसटीडी सुविधा देने का प्रावधान किया है। पूरे भारत में एसटीडी (सब्सक्राइबर ट्रंक डायल) की कॉल की दरें एक समान हैं। स्पेस टेक्नॉलोजी और कम्युनिकेशन टेक्नॉलोजी में परस्पर तालमेल के कारण यह संभव हो पाया है।

मोबाइल टेलिफोन: भारत का मोबाइल नेटवर्क दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल फोन ने व्यवसाय करने के तरीके बदल दिये हैं। छोटा कारोबारी भी मोबाइल फोन से जुड़े होने के कारण आज बेहतर व्यवसाय कर पा रहा है।

जनसंचार: जनसंचार से लोगों का मनोरंजन होता है और उन्हें सरकार की योजनाओं और क्रियाकलापों के बारे में जानकारी मिलती है। रेडियो, टेलिविजन, अखबार, पत्रिका, किताब और फिल्म जनसंचार के मुख्य साधन हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन भारत सरकार के उपक्रम हैं। इनके माध्यम से दूर दराज के इलाकों तक मनोरंजन, शिक्षा, खेलकूद, आदि से संबंधित कई प्रकार के कार्यक्रम पहुँचते हैं। आज भारत में कई प्राइवेट टेलिविजन चैनल और रेडियो चैनल भी हैं।

समाचारपत्र: भारत में लगभग 100 भाषाओं और बोलियों में अखबार निकलते हैं। हिंदी भाषा के अखबारों की संख्या सबसे अधिक है। उसके बाद अंग्रेजी और उर्दू अखबारों का नम्बर आता है।

फिल्म: भारत में आज पूरी दुनिया में सबसे अधिक फिल्में बनती हैं। यहाँ फीचर फिल्म, लघु फिल्म और वृत्त चित्र बनते हैं। भारतीय और विदेशी फिल्मों को सर्टिफाई करने का काम सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन करता है।


अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

दो देशों के बीच के व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के दो घटक होते हैं जो नीचे दिये गये हैं।

  1. निर्यात: जब सामान देश से बाहर व्यापार के लिये जाता है तो इसे निर्यात कहते हैं।
  2. आयात: जब बाहर का सामान देश में व्यापार के लिये आता है तो इसे आयात कहते हैं।
भारत से निर्यात में वृद्धि दिखाने वाले सामान
सामाननिर्यात में शेअर
कृषि उत्पाद2.53%
खनिज9.12%
जवाहरात26.75%
रसायन24.45%
इंजीनियरिंग उत्पाद35.63%
पेट्रोलियम उत्पाद86.12%

व्यापार संतुलन: किसी भी देश के निर्यात और आयात में अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। जब आयात की तुलना में निर्यात अधिक होता है तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संतुलन अनुकूल होता है। जब निर्यात की तुलना में आयात अधिक होता है तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संतुलन प्रतिकूल होता है।

भारत के मुख्य आयात
सामानआयात में शेअर
पेट्रोलियम और उत्पाद41.87%
मोती और कीमती पत्थर29.26%
अकार्बनिक रसायन29.39%
कोयला, कोक और ब्रिकेट94.17%
मशीन12.56%

एक समूह के तौर पर भारी वस्तुओं के आयात में वृद्धि हुई है और इसका शेअर कुल आयात का 39.09% है। इस समूह में उर्वरक (67.01%), अनाज (25.23%), खाद्य तेल (7.94%) और न्यूजप्रिंट (5.51%) आते हैं।

पिछले पंद्रह सालों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में जबरदस्त बदलाव आया है। अब वस्तुओं के आदान प्रदान की तुलना में सूचना, ज्ञान और प्रौद्योगिकी का आदान प्रदान अधिक बढ़ गया है। आज भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ्टवेअर महाशक्ति के रूप में जाना जाता है।

पर्यटन: एक व्यापार के रूप में

2003 की तुलना में 2004 में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 23.5% की वृद्धि हुई थी। इससे विदेशी मुद्रा भंडार में 21,828 करोड़ रुपये आये। भारत में हर वर्ष 26 लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटन उद्योग में 1.5 करोड़ लोग सीधे तौर पर लगे हुए हैं।

पर्यटन से लाभ:



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