इंडो चीन का राष्ट्रवाद

शुरुआती इतिहास: आधुनिक वियतनाम, लाओस और कम्बोडिया के क्षेत्रों को इंडो-चीन कहते हैं। प्राचीन समय में यहाँ के लोग विभिन्न समूहों में विभाजित थे और चीन के शक्तिशाली साम्राज्य की छत्रछाया में रहते थे। विश्व के अन्य भागों में स्वतंत्र राष्ट्रों के निर्माण के बाद भी यहाँ के शासक चीन की पुरातन संस्कृति को मानते थे और वहाँ की प्रशासन पद्धति को अपनाते थे। जलमार्ग से होकर जाने वाले सिल्क रूट से वियतनाम भी जुड़ा हुआ था। इसलिए यहाँ सदियों से माल, लोग और विचारों का प्रवाह होता रहा है। व्यापार के अन्य रास्तों से यह अंदर के इलाकों से भी जुड़ा हुआ था जहाँ गैर वियतनामी लोग रहते थे; जैसे कि ख्मेर कम्बोडियन


उपनिवेश का निर्माण: फ्रांस की सेना 1858 में वियतनाम पहुँची थी, और फिर 1880 के दशक के मध्य तक पूरे उत्तरी इलाके पर फ्रांसीसी सेना का कब्जा हो चुका था। फ्रांस और चीन की लड़ाई के बाद फ्रांस का नियंत्रण टोंकिन और अनम पर भी हो गया। इस प्रकार 1887 में फ्रेंच इंडो चीन का निर्माण हुआ।

फ्रांस के लिए उपनिवेश का क्या मतलब था?

यूरोपीय शक्तियों को उपनिवेश की जरूरत इसलिए पड़ी थी कि उन्हें प्राकृतिक संसाधनों और अन्य वस्तुओं की मांग को पूरा करना था। यूरोपीय शक्तियों को लगता था कि ‘विकसित’ होने के नाते पिछड़े लोगों को सुधारना उनकी जिम्मेदारी थी।

फ्रांसीसियों ने फसल की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से मेकांग डेल्टा की जमीन को सींचने के लिये नहर बनाने शुरु कर दिये। इन नहरों से चावल की पैदावार बढ़ाने में काफी मदद मिली। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि 1900 में कुल 274,000 हेक्टेअर के मुकाबले 1930 में 11 लाख हेक्टेअर पर धान की खेती होने लगी थी। 1931 आते-आते वियतनाम में होने वाली धान की कुल उपज का दो तिहाई हिस्सा निर्यात होने लगा, और वियतनाम धान निर्यात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया था।

नहरों के बाद वियतनाम में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण का कार्य शुरु हुआ। सामान और सैनिकों के आसान आवगमन के लिये यह आवश्यक था। फ्रांसीसियों ने एक सकल इंडो चीन रेल तंत्र पर काम शुरु किया। चीन में युन्नान से आखिरी रेल लिंक 1910 में बनकर पूरा हुआ। एक दूसरी लाइन बनाई गई जो वियतनाम को सियाम (थाइलैंड का पुराना नाम) से जोड़ती थी।


क्या उपनिवेशों को विकसित करना चाहिए?

पॉल बर्नार्ड एक जाने माने फ्रांसीसी विचारक थे; जिनको लगता था कि वियतनाम के लोगों को खुशहाल बनाने के लिये मूलभूत सुविधाओं का निर्माण जरूरी था। लोगों की तरक्की से फ्रांस के व्यवसाय के लिये बेहतर बाजार का निर्माण हो सकता था। उन्होंने खेती की पैदावार बढ़ाने के लिये भू-सुधार पर भी बल दिया।

वियतनाम की तत्कालीन अर्थव्यवस्था मुख्य रुप से धान और रबर की खेती पर निर्भर करती थी। इन्हीं क्षेत्रकों को और सुविधा मुहैया कराने के लिए रेल और बंदरगाहों का निर्माण किया गया। लेकिन फ्रांसीसियों ने वियतनाम की अर्थव्यवस्था के औद्योगिकरण के लिए कुछ भी नहीं किया।

उपनिवेशी शिक्षा पद्धति की दुविधा:

अन्य यूरोपियन शक्तियों की तरह फ्रांस भी अपनी ‘आधुनिक’ संस्कृति को वियतनाम के लोगों पर थोपना चाहता था। फ्रांसीसियों का मानना था कि वियतनामियों को सुधारने के लिये यह आवश्यक था। लेकिन फ्रांसीसी शासक स्थानीय लोगों को केवल इतनी ही शिक्षा देना चाहते थे जिससे क्लर्की करने के लिए श्रमिकों की कमी न हो। उन्हें डर था कि अच्छी शिक्षा से लोगों में जागृति आ जायेगी और फिर उपनिवेशी शासकों के खतरा पैदा हो जायेगा। इसलिए वे अच्छी शिक्षा देने से बचते रहे।


आधुनिक होने का मतलब: वियतनाम के संभ्रांत लोगों पर चीनी संस्कृति का गहरा प्रभाव था, जिसे कम करना फ्रांसीसियों के लिये महत्वपूर्ण था। योजनाबद्ध तरीके से पुरानी शिक्षा पद्धति को तहस नहस किया गया और उसकी जगह नई शिक्षा पद्धति को जमाने की कोशिश की गई। लेकिन संभ्रांत लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीनी भाषा को उखाड़ फेंकना बहुत मुश्किल साबित हो रहा था।

कुछ फ्रांसीसी नीति निर्माता चाहते थे कि पढ़ाई का मीडियम फ्रेंच हो, जिससे एक ऐसा एशियाई फ्रांस बने जिसके तार यूरोप के फ्रांस से मजबूती से जुड़े हों। कुछ अन्य विचारकों का मानना था कि निचली कक्षाओं में वियतनामी भाषा और ऊँची कक्षाओं में फ्रेंच भाषा पढ़ाई जाये। फ्रेंच भाषा और फ्रेंच संस्कृति में महारत हासिल करने वाले के लिए फ्रांस की नागरिकता का प्रावधान भी रखा गया।

लेकिन फ्रेंच क्लास की फाइनल परीक्षा में छात्रों को जानबूझकर फेल कर दिया जाता था। ऐसा इस उद्देश्य से किया जाता था कि स्थानीय लोग अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों के लिए आगे न आ पाएँ। स्कूल की किताबों में फ्रेंच संस्कृति का गुणगान किया जाता था, उपनिवेशी शासन को उचित बताया जाता था, और वियतनामियों को पिछड़ा दिखाया जाता था।

फ्रांसीसियों के मुताबिक पश्चिमी संस्कृति की नकल करना ही आधुनिक होने का मतलब था। वियतनाम के पुरुष लंबे बाल रखते थे जबकि फ्रेंच शासक छोटे बालों को बढ़ावा देते थे।


स्कूलों में विरोध

स्कूलों में इन बातों का विरोध होता था। शिक्षक और छात्र सिलेबस में लिखी बातों को पूरी तरह मानते से इनकार कर देते थे। कुछ विरोध खुले तौर पर होते थे तो कुछ चुपचाप। जब निचली कक्षाओं में वियतनामी शिक्षकों की संख्या बढ़ गई तो इस बात पर नियंत्रण रखना असंभव हो गया कि वास्तव में क्या पढ़ाया जा रहा था।

स्कूलों ने वियतनाम में राष्ट्रवाद की भावना को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई। 1920 का दशक आते-आते छात्रों ने राजनैतिक पार्टियाँ बनानी शुरु कर दी और राष्ट्रवादी पत्रिकाएँ भी निकालने लगे। इसके कुछ उदाहरण हैं: यंग अन्नन पार्टी (एक राजनैतिक पार्टी) और अन्ननीज स्टूडेंट (एक पत्रिका)।

फ्रेंच शिक्षा और संस्कृति का थोपा जाना उल्टा पड़ने लगा था क्योंकि वियतनाम के बुद्धिजीवी इसे अपनी संस्कृति के लिए खतरा मानते थे।



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