एक तिनका

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,
एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,
एक तिनका आँख में मेरी पड़ा।

मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन सा,
लाल होकर आँख भी दुखने लगी।
मूँठ देने लोग कपड़े की लगे,
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी।


जब किसी ढ़ब से निकल तिनका गया,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिये।
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।

इस कविता में कवि ने यह दिखाया है कि छोटी से छोटी वस्तु का भी अपना महत्व होता है। इसलिए हमें किसी भी चीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक बार कोई व्यक्ति मुंडेर पर खड़ा होकर अपनी अकड़ दिखा रहा था तो एक तिनका उड़कर उसकी आँखों में पड़ गया। तिनके के आँखों में पड़ते ही उस व्यक्ति की अकड़ में खलल पड़ जाता है, वह बेचैन हो जाता है और उसकी आँखों में दर्द होने लगता है। कुछ लोग उसे कपड़े की मूँठ देते हैं जिससे उसे थोड़ा आराम मिलता है। इस बीच उसकी सारी अकड़ चली जाती है। जब उसकी आँख से किसी तरह वह तिनका निकल जाता है तो उसे थोड़ा होश आता है। उसके बाद उसका अंतर्मन उसे ताने देता है कि उसे अकड़ नहीं करनी चाहिए क्योंकि एक छोटा सा तिनका भी उसे बहुत परेशान कर सकता है।

कविता से

प्रश्न 1: नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलिए

जैसे: एक तिनका आँख में मेरी पड़ा – मेरी आँख में एक तिनका पड़ा।

मूँठ देने लोग कपड़े की लगे – लोग कपड़े की मूँठ देने लगे।

(क) एक दिन जब था मुंडेर पर खड़ा

उत्तर: एक दिन जब मुंडेर पर खड़ा था।

(ख) लाल होकर आँख भी दुखने लगी

उत्तर: आँख भी लाल होकर दुखने लगी।

(ग) ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी

उत्तर: बेचारी ऐंठ दबे पाँव भाग गई।

(घ) जब किसी ढ़ब से निकल तिनका गया

उत्तर: किसी तरह से तिनका निकल गया।


प्रश्न 2: ‘एक तिनका’ कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?

उत्तर: इस कविता में बताया गया है कि कई बार ऐसा होता है जब हम अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटना हो जाती है कि मामूली सी नजर आने वाली चीज भी हमें बता देती है कि हमें हर किसी को सम्मान देना चाहिए।

प्रश्न 3: आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई?

उत्तर: आँख में तिनका पड़ते ही घमंडी की तंद्रा टूट जाती है। वह बेचैन हो जाता है और उसकी आँखों में तेज दर्द होता है।

प्रश्न 4: घमंडी की आँख में तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने क्या किया?

उत्तर: घमंडी की आँख में तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने कपड़े की मूँठ दी। इस काम के लिए कपड़े को थोड़ा समेट कर उस पर मुँह से गर्म हवा छोड़ी जाती है। उसके बाद उस गर्म हुए कपड़े से आँखों की सिकाई की जाती है। इससे काफी आराम मिलता है।

प्रश्न 5: ‘एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दी –

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।

इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है –

तिनका कबहूँ न निंदिए, पाँव तले जो होय।
कबहूँ उड़ि आँखिन परै, पीर घनेरी होय।।

इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर? लिखिए।

उत्तर: पाठ में दी गई कविता में व्यक्ति किसी की निंदा नहीं कर रहा है। वह तो बस अपनी अकड़ में मग्न है। कबीर के दोहे में कहा गया है कि तिनका यदि आपके पैरों के नीचे भी हो तो भी उसकी हँसी नहीं उड़ानी चाहिए। दोनों ही कविताओं में कहा गया है कि यदि तिनका गलती से आँखों में पड़ जाता है तो उससे बहुत पीड़ा होती है।




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