पापा खो गए

विजय तेंदुलकर

इस नाटक को विजय तेंदुलकर ने लिखा है। इस नाटक में कई बेजान पात्र हैं जो इन्सानों की तरह बातें करते हैं। उनके साथ एक कौवा भी है। इस नाटक के पात्र हैं: पेड़, खंभा, लेटर बॉक्स, कौवा, सिनेमा के पोस्टर में नाचनेवाली औरत, एक लड़की और एक आदमी। रात में जब पेड़, खंभा, लेटरबॉक्स और कौवा आपसे में बातें कर रहे होते हैं तभी एक दुष्ट आदमी कहीं से एक बच्ची का अपहरण करके लाता है। उस बच्ची को वहीं लिटाकर वह आदमी अपने लिए भोजन ढ़ूँढ़ने जाता है। इस बीच बाकी पात्र मिलकर उस लड़की को बचाने की योजना बनाते हैं। जब वह दुष्ट आदमी लौटता है तो बात करते पेड़, खंभे, लेटरबॉक्स और कौवे को सुनकर उन्हें भूत समझ बैठता है। डरकर वह भाग जाता है। उसके बाद सभी पात्र मिलकर आगे की योजना बनाते हैं कि किस तरह उस लड़की को उसके घर पहुँचाया जाये।


नाटक से

प्रश्न 1: नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों?

उत्तर: लेटरबक्स पढ़ना भी जानता है। मतलब वह पढ़ा लिखा है। इसलिए इस नाटक में मुझे सबसे बुद्धिमान पात्र लेटरबक्स लगा।

प्रश्न 2: पेड़ और खंभे में दोस्ती कैसे हुई?

उत्तर: एक बार तेज आंधी आई थी जिसमें खंभे के पाँव जमीन से उखड़ गये थे। उसे पेड़ ने गिरने से बचा लिया था। उसके बाद पेड़ और खंभे में दोस्ती हो गई।

प्रश्न 3: लेटरबक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे?

उत्तर: लेटरबक्स लाल रंग का है और वह किसी बड़े बुजुर्ग की तरह बुद्धिमानी की बातें करता है। इसलिए उसे सभी लाल ताऊ कहकर पुकारते थे।


प्रश्न 4: लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है?

उत्तर: लाल ताऊ के पास तमाम तरह की चिट्ठियाँ आती हैं। समय मिलने पर वह छुप-छुप कर उन चिट्ठियों को पढ़ता है। इस तरह उसे बैठे-बैठे ढ़ेर सारी बातें पता चलती हैं। इसलिए वह अन्य पात्रों से भिन्न है।

प्रश्न 5: नाटक में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको मजेदार लगीं? लिखिए।

उत्तर: नाटक में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में सजीव पात्र कौवा है। कौवे की कई बातें मजेदार लगती हैं। उसे कर्कश बोलने की इतनी आदत पड़ गई है कि मधुर संगीत अच्छा नहीं लगता। वह पूरे शहर में भर दिन घूमता रहता है। इसलिए उसे मनुष्यों के बारे में बहुत जानकारी है।

प्रश्न 6: क्या वजह थी कि सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे?

उत्तर: उस लड़की को अपने घर का पता नहीं मालूम था। वह अपनी गली या सड़क का नाम नहीं बता पा रही थी। इसलिए सभी पात्र मिलकर भी उस लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे।




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