8 हिंदी दूर्वा

दो गौरैया

भीष्म साहनी

प्रश्न 1: दो गैरैयों को पिताजी जब घर से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे तो माँ क्यों मदद नहीं कर रही थी? बस वह हंसती क्यों जा रही थी?

उत्तर माँ यह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए, इसलिए वे पिताजी की मदद नहीं कर रहीं थीं। वो हंस इसलिए रहीं थीं कि उन्हें पता था कि पिताजी अंदर से एक दयालू इंसान हैं। वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे चिड़ियों को ज्यादा हानि पहुँचे। वो शायद ये भी जानती थीं कि थोड़े प्रयास के बाद पिताजी हार मानकर शांत बैठ जाएंगे।

प्रश्न 2: देखो जी, चिड़ियों को बाहर मत निकालो। माँ ने पिताजी से गंभीरता से ये क्यों कहा?

उत्तर माँ इस बात से चिंतित थीं कि कहीं चिड़ियों ने अंडे दे दिये होंगे तो उनके बच्चों का क्या होगा। कोई भी माँ ये कभी नहीं चाहेगी कि किसी दूसरे के बच्चे को कोई हानि पहुँचे। इसलिए माँ ने पिताजी को चिड़ियों को निकालने से मना किया।

प्रश्न 3: “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, पिताजी ने गुस्से में ऐसा क्यों कहा? क्या पिताजी के इस कथन से माँ सहमत थीं? क्या तुम सहमत हो? अगर नहीं तो क्यों?

उत्तर माँ इसके लिए कत्तई सहमत नहीं थीं कि किसी का घर तोड़ा जाए। मैं भी इस बात से सहमत नहीं हूँ। ये बात सच है कि चिड़िया जब घोसला बनाती है तो उससे बहुत गंदगी फैलती है और शोर भी होता है, लेकिन चिड़िया हमारे पर्यावरण का एक अहम हिस्सा होती है। दूसरी ओर वे जब प्रजनन करती हैं तभी कहीं घोसला बनाती हैं। एक बार उनके बच्चे उड़ना सीख जाते हैं तो वे घोसले को छोड़ कर चली जाती हैं। हमें ये समझने की कोशिश करनी चाहिए कि वे थोड़े समय के लिए हमारी मेहमान बनकर रहना चाहती हैं।

प्रश्न 4: कमरे में फिर से शोर होने पर पिताजी अबकी बार गौरैया की तरफ देखकर मुस्कराते क्यों रहे?

उत्तर शायद पिताजी ने अपनी हार कबूल कर ली हो और चिड़ियों को विजेता मान लिया हो। ये भी हो सकता है कि पिताजी चिड़ियों के संघर्ष से प्रभावित हो गये हों। हो सकता है कि जब उन्होंने छोटे बच्चों की चीं चीं सुनी होगी तो उनका दिल भी पसीज गया होगा।



दो गौरैया

माँ यह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए, इसलिए वे पिताजी की मदद नहीं कर रहीं थीं। वो हंस इसलिए रहीं थीं कि उन्हें पता था कि पिताजी अंदर से एक दयालू इंसान हैं। वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे चिड़ियों को ज्यादा हानि पहुँचे। वो शायद ये भी जानती थीं कि थोड़े प्रयास के बाद पिताजी हार मानकर शांत बैठ जाएंगे।

सागर यात्रा

समुद्र का पानी खारा होने की वजह से ना तो पीने लायक होता है ना ही नहाने लायक। ज्यादा खारेपन की वजह से साबुन भी उसमें बेअसर हो जाता है। इसलिए समुद्र के पानी से ना तो हम नहा सकते हैं, ना ही कपड़े धो सकते हैं। इसलिए लेखक और उसके साथियों को समुद्र यात्रा में पानी की समस्या हुई।

उठ किसान ओ

इस कविता में किसान से जग जाने का आह्वान किया गया है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि खेती के नए तरीके हमारे देश में इस्तेमाल होने लगे हैं, फिर भी बारिश का महत्व पहले की तरह ही है।

एक खिलाड़ी की कुछ यादें

लेखक ने एक बार लाहौर में ध्यानचंद को हॉकी खेलते देखा था। ध्यानचंद की दक्षता ने लेखक को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लेखक के शब्दों में एक महान खिलाड़ी आपको अपने खेल की ओर आकर्षित करता है। उस खिलाड़ी की महानता आपके लिए एक प्रेरणाश्रोत का काम करती है।

सस्ते का चक्कर

अजय के अन्य दोस्तों ने कहा कि नरेंद्र की आदतें अच्छी नहीं है। वह चटोर लड़का है। अजय को उसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि नरेंद्र बहुत ही बदनाम लड़का था।

वल्ली अम्माई

बस में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना ज्यादातर लोगों को पसंद आता है। वल्ली को भी खिड़की के पास वाली सीट मिल गयी थी। खिड़की के बाहर का दृश्य वल्ली को बहुत सुंदर लग रहा था। सड़क की एक ओर नहर थी। नहर के पीछे ताड़ के पेड़ थे।

अन्याय के खिलाफ

श्री राम राजू भी एक कोया आदिवासी था। उसने हाई स्कूल तक की पढ़ाई थी। वह 18 साल की उम्र में साधू बन गया था। उसके ज्ञान के कारण लोग उसे अपना नेता मानने लगे थे। जब अंग्रेजों ने कोया आदिवासियों का राशन रोक दिया तो उनपर कहर टूट पड़ा। श्री राम राजू ने अपने लोगों की तकलीफ का अंत करने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।

केशव शंकर पिल्लई

शुरु में पिल्लई जगह-जगह प्रदर्शनी लगाकर अपना संग्रह लोगों को दिखाते थे। लेकिन जब उनका संग्रह बहुत बड़ा हो गया तो उन्हें कहीं भी लाने ले जाने में कठिनाई होने लगी। उनके टूटने का भी खतरा बढ़ने लगा। इसलिए पिल्लई ने एक स्थाई संग्रहालय बनाने की योजना बनाई। इसके अलावा देश विदेश के लोगों ने इस काम में उनका पूरा सहयोग किया।