जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

मोगली का नया घर

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

भेड़िये अपने बच्चों को मुँह में दबाकर इधर उधर ले जाने में इतने माहिर होते हैं कि वे एक अंडे को भी तोड़े बिना कहीं भी ले जा सकते हैं। इसलिए जब भेड़िये के पिता ने उस बच्चे को मुँह में दबाकर अपने बच्चों के बीच छोड़ा तब उस बच्चे को एक खरोंच तक नहीं आई।

भेड़िये की माँ ने कहा, कितना छोटा है, कितना नाजुक है लेकिन कितना साहसी लगता है। तबतक वह बच्चा भेड़िये के शावकों के बीच में घुसा जा रहा था ताकि उनकी खाल की गरमाहट पा सके। अरे वाह! वह तो हमारे परिवार का हिस्सा बनना चाह रहा है। शायद ही कोई भेड़िया होगा जिसके बच्चों में आदमी का बच्चा भी शामिल हो।

भेड़िये के पिता ने कहा, मैंने ऐसे किस्से कई बार सुने हैं लेकिन हकीकत में नहीं देखा है। देखो तो उसकी चमड़ी पर एक भी रोयाँ नहीं है। मैं तो बस एक हल्की सी थपकी से इसे मार सकता हूँ। लेकिन इसकी आँखों में जरा भी खौफ नहीं दिखता है।

तभी गुफा में आती हुई चांदनी में बाधा पड़ गई क्योंकि शेर खान अपने बड़े से सिर और कंधों को गुफा के द्वार में घुसेड़ना चाहता था। उसके पीछे तबाकी चीत्कार कर रहा था, मेरे आका, वह यहीं आया होगा!

भेड़िये के पिता ने अपना गुस्सा छुपाते हुए कहा, जय हो महान शेर खान की। कहिए कैसे आना हुआ?

शेर खान ने कहा, मेरा शिकार इधर आया है। एक आदमी का बच्चा इस तरफ ही आया है। इसके माँ-बाप मुझसे डरकर भाग गए हैं। इसे मेरे हवाले कर दो।

भेड़िये के पिता को याद आया कैसे शेर खान ने लकड़हारे के अलाव में अपना पैर जला लिया था और गुस्से में था। लेकिन उसे ये भी पता था कि गुफा का मुँह शेर खान के कंधों और पंजों के लिये बहुत छोटा था। उसकी हालत वैसे आदमी की तरह थी जिसे किसी तोप की नली में कुश्ती लड़ने के लिए छोड़ दिया गया हो। इसलिए भेड़िये का पिता निश्चिंत था।

भेड़िये के पिता ने कहा, भेड़िये आजाद होते हैं। वे अपने दल के सरदार का ही आदेश मानते हैं। वे किसी ऐसे वैसे धारीदार जानवर का आदेश नहीं मानते जो मवेशियों को मारता हो। यह आदमी का बच्चा हमारा है। इसे मारना है या जिंदा रखना है इसका फैसला हम करेंगे।

तुम कौन होते हो फैसला लेने वाले? मैं बड़े-बड़े भैंसों का शिकार करता हूँ और तुम्हारी इस तंग गुफा में मुझे अपने ही शिकार के लिए भीख मांगनी पड़ रही है। तुम्हें शेर खान की ताकत का अंदाजा नहीं है?

बाघ की गर्जना से पूरी गुफा गूंजने लगी। भेड़ियों की माँ अपने शावकों के पास से उठी और झपटकर शेर खान के सामने डट गई। अंधेरे में चमकती उसकी हरी-हरी आँखें शेर खान की अंगार जैसी आँखों पर टिकी थीं।

मैं रक्षा बोल रही हूँ। सुन लंगड़े, यह आदमी का बच्चा मेरा है। मेरा मतलब मेरा। उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता है। वह इसी दल के साथ खेलेगा, बड़ा होगा और शिकार करेगा। और यह भी सुन ले कि एक दिन वह तुम्हारा भी शिकार करेगा। वह एक दिन तुम्हारा यानि कीड़े-मकोड़े खाने वाले का अंत कर देगा। तुम्हें पता है कि मैं भूखे जानवरों का नहीं बल्कि हट्टे-कट्टे सांभर का शिकार करती हूँ। जा लंगड़े अपनी माँ के पास चला जा। अपने पैर जलाने का बाद तो तुम और भी अपाहिज हो गये हो, भाग जाओ।

भेड़ियों का पिता मंत्रमुग्ध होकर यह सब देख रहा था। उसके मन में बीते दिनों की याद ताजा हो गई जब उसने पाँच भेड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा में रक्षा को जीता था। उसका नाम रक्षा ऐसे ही नहीं पड़ा था। शेर खान भेड़ियों के पिता का मुकाबला तो कर सकता था लेकिन भेड़ियों की माता का नहीं। उस समय भेड़ियों की माँ के पास स्थान की बढ़त थी। वह आखिरी दम तक लड़ सकती थी। इसलिए शेर खान भी धीमे से गुर्राते हुए पीछे हट गया। जब वह सुरक्षित दूरी पर पहुँच गया तो चिल्लाया,

हर कुत्ता अपनी गली में शेर होता है। मैं देख लूंगा कि इस आदमी के बच्चे को पालने के बारे में दल की क्या राय होती है। यह मेरा शिकार है और आखिर में यह मेरा ही निवाला बनेगा। धिक्कार है तुम जैसे झबरैली दुम वाले चोरों पर।


Copyright © excellup 2014