जंगल बुक पार्ट 1: मोगली का बचपन

शेर खान का डर

हिंदी अनुवाद

अजय आनंद

शेर खान एक बाघ था जो 20 मील की दूरी पर वाइनगंगा नदी के पास रहता था।

भेड़ियों के पिता ने गुस्से से कहा, जंगल के कानून के हिसाब से उसे इस बात का कोई हक नहीं है कि बिना चेतावनी दिए वह अपने शिकार का इलाका बदले। वह तो मीलों दूर तक अन्य जानवरों को डरा देगा। और यह मत भूलो कि आजकल तो मुझे दो प्राणियों के लिए भोजन जुटाना पड़ता है।

इसी बीच भेड़ियों की माँ भी धीरे से बोली, उसकी माँ बिना वजह ही उसे लँगड़ा नहीं कहती थी। वह तो जन्म से ही एक पैर से लँगड़ा है। इसलिए वह हमेशा मवेशियों को ही मार पाता है। वाइनगंगा के गाँववाले उससे बहुत गुस्सा हैं और अब वह यहां के गाँववालों को तंग करने आ गया है। जब वह यहां से चला जायेगा तो गाँववाले इस जंगल का कोना-कोना छान मारेंगे। जब वे घास में आग लगाएंगे तो हमारे बच्चों को जान बचाकर भागना पड़ेगा। इसके लिए तो हम हमेशा शेर खान के आभारी रहेंगे!

तबाकी ठिठोली करने के खयाल से बोला, मैं तुम्हारी तरफ से उसे धन्यवाद कह दूंगा।

भेड़िये का पिता गुस्से में बोला, फौरन यहाँ से दफा हो जाओ। जाओ और अपने मालिक के साथ शिकार करो। आज के लिए तुमने हमारा काफी नुकसान कर दिया।

तबाकी ने आराम से कहा, मैं जा रहा हूँ। तुम्हें नीचे झाड़ियों में शेर खान की दहाड़ सुनाई देगी। और मैं तुम्हारी सलाह का ध्यान रखूंगा।

भेड़िये के पिता ने कान लगाया तो उसे नीचे घाटी से एक बाघ की गुस्से और हताशा से भरी गुर्राने की आवाज सुनाई दी जैसे उसे अभी तक कोई शिकार न मिला हो और उसे इसकी जरा भी परवाह न हो कि सारा जंगल उसकी हताशा को जान जाएगा।

भेड़िया बड़बड़ाया, मूर्ख कहीं का, उसे ये भी पता नहीं है कि शिकार पर जाते समय शोर नहीं मचाना चाहिए। उसे क्या लगता है? इस जंगल के हिरण भी वाइनगंगा की भैंसों की तरह मंद बुद्धि वाले हैं?

भेड़ियों की माँ ने कहा, श्श! वह ना तो हिरण ना ही भैंसों का शिकार करेगा बल्कि मनुष्य का शिकार करेगा। अब तक हताशा वाली गुर्राहट एक मीठी दहाड़ में बदल चुकी थी जो चारों दिशाओं से आ रही थी। यह वैसा कोलाहल था जिससे लकड़हारे और जिप्सी घबड़ा जाते हैं और कभी-कभी जान बचाकर भागने के चक्कर में सीधे शेर के मुंह में चले जाते हैं।

भेड़िये के पिता ने कहा, क्या बात करती हो। क्या जंगल में कीड़े मकोड़ों की कमी हो गई है जो वह हमारे इलाके में मनुष्य को मारकर खाएगा।


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